Surya Grahan 2022: सूर्य ग्रहण खत्म होने के बाद जरूर करें ये काम, हर परेशानी हो जाएगी छू मंतर
सूर्य ग्रहण खत्म होने के बाद क्या करें? : आज पूरा भारत भव्य खगोलीय घटना यानी की सूर्यग्रहण का गवाह बना। पूरे 27 साल बाद ये सूर्य ग्रहण दिवाली के दूसरे दिन आया। आपको बता दें कि आज का सूर्यग्रहण आंशिक ग्रहण था, जो कि सबसे पहले अमृतसर में दिखाई दिया, इसके बाद ये दिल्ली समेत और शहरों में भी नजर आया। वैदिक धर्म में सूर्य ग्रहण को अच्छा नही माना जाता है और इसी वजह से ग्रहण के दौरान ना तो पूजा पाठ किया जाता है और ना ही शुभ काम होते हैं और इसी कारण सूर्यग्रहण के दौरान मंदिरों के पट बंद कर दिए गए थे, बहुत सारे लोगों ने ग्रहण काल के दौरान भोजन भी नहीं किया। ऐसे में अब प्रश्न उठता है कि ग्रहण खत्म हो जाने के बाद सबसे पहले क्या करें? तो चलिए आपकी इस समस्या का समाधान हम कर देते हैं और बताते हैं कि ग्रहण खत्म हो जाने के बाद क्या करना चाहिए?
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- सूर्य ग्रहण खत्म हो जाने के बाद आप अपने घरों की साफ-सफाई कीजिए।
- फिर आप नहाधोकर स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा स्थल पर गंगाजल से छिड़काव करें।
- घर और मंदिर में धूप बत्ती जलाएं , जिससे घर से सारी निगेटिव एनर्जी बाहर निकल जाए।
- इसके बाद तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाएं और उनसे सुख-शांति की प्रार्थना करें।
- इसके बाद तुलसी की पत्ती को खाने-पीने की चीजों में डाल देना चाहिए।
- हो सके तो गरीबों को दान करें और गणेश जी , हनुमान जी और सूर्यदेव की आरती करें।
गणेश जी इन मंत्रों से करें पूजा
- "ॐ गं गणपतये नमः
- "वक्रतुण्डाय हुं" "
- ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।"
- "ॐ वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा"
- ''ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा''

मां तुलसी की करें इन मंत्रों से पूजा
- महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।
- तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
- धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमनः प्रिया।।
- लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
- तुलसी भूर्महालक्ष्मीः पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।

अब चूंकि सूर्य देव को आज ग्रहण लगा और वो पीड़ित रहे ऐसे में उनकी अराधना जरूर करनी चाहिए, इससे इंसान के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
सूर्यदेव की आरती
- ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
- जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
- धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।
- अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।
- फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।
- गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।
- स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।
- प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।
- वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।
- ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
- जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।
- धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।












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