Shani 2024: साल 2024 में कैसा रहेगा शनि का प्रभाव? ये राशि वाले बनेंगे धनवान
Shani effects 2024 on Life: शनि ने 17 जनवरी 2023 को रात्रि में 8 बजकर 2 मिनट पर कुंभ राशि में गोचर प्रारंभ किया था और इस साल अर्थात साल 2024 में शनि का कोई राशि परिवर्तन नहीं है। शनि इस साल कुंभ राशि में ही गोचर करता रहेगा।

29 मार्च 2025 को रात्रि 11:01 बजे शनि मीन राशि में जाएगा। शनि के कुंभ राशि में स्थित होने के कारण मकर पर साढ़ेसाती का अंतिम ढैया, कुंभ पर दूसरा ढैया और मीन राशि पर साढ़ेसाती का प्रथम ढैया चल रहा है। कर्क और वृश्चिक राशि पर साढ़ेसाती का लघुकल्याणी ढैया चल रहा है।
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तीन राशियों पर साढ़ेसाती
मीन : मीन राशि के जातकों पर चांदी के पाये से मस्तक पर साढ़ेसाती का प्रथम ढैया चल रहा है। शनि आपके 11वें और 12वें भाव का स्वामी होकर बारहवें स्थान में भ्रमण करने से कामकाज में परेशानी, पारिवारिक मतभेद, गृह क्लेश, शारीरिक पीड़ा, पति-पत्नी एवं पुत्र संतान के लिए अरिष्टप्रद, कर्ज लेने की स्थिति रहेगी।
कुंडली में शनि बलवान होगा
आय के साधनों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। कुंडली में शनि बलवान होगा तो अशुभ फलों में कमी आएगी। व्यावसायिक उन्नति, मित्रों से सहायता रहेगी।
कुंभ : कुंभ राशि के जातकों पर तांबे के पाये से साढ़ेसाती का दूसरा चरण हृदय पर चल रहा है। इसके शुभाशुभ फल प्राप्त होंगे। मित्रों से लाभ, काम धीमी गति से होने के बावजूद स्थायी फल प्राप्त होंगे।
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नौकरी व्यापार में उन्नति के योग बनेंगे
पद-प्रतिष्ठा बढ़ेगी, नौकरी व्यापार में उन्नति के योग बनेंगे। जन्मकालिक शनि निर्बल होगा तो पति-पत्नी को पीड़ा, स्वास्थ्य में पीड़ा, कार्यों में रूकावट, पारिवारिक मतभेद रहेंगे।
मकर : मकर राशि के जातकों को साढ़ेसाती का अंतिम ढैया सोने के पाये से चरणों पर चल रहा है। पारिवारिक क्लेश, अकारण विवाद, पारिवारिक जन का वियोग, स्त्री कष्ट, नौकरी-व्यवसाय में उतार-चढ़ाव रहेगा।
गृहत्याग के योग भी बन सकते हैं
द्रव्यहानि, कर्ज लेने की नौबत आएगी। गृहत्याग के योग भी बन सकते हैं। जन्मकुंडली में शनि मजबूत होने पर व्यवसाय-नौकरी में सफलता, कोर्ट केस में विजय होगी।
कर्क-वृश्चिक राशि पर लघु कल्याणी ढैया
कर्क एवं वृश्चिक राशि पर शनि का लघु कल्याणी ढैया चल रहा है। ये दोनों राशियां शनि के प्रभाव के कारण मानसिक रूप से परेशान रहेंगी। इनके कामकाज अटकेंगे या धीमी गति से होंगे।
शारीरिक रूप से भी कष्टप्रद समय रहेगा
अशुभ फल प्राप्त होंगे किंतु साढ़ेसाती के मुकाबले लघुत्तम रूप में घटनाएं घटित होंगी। पारिवारिक क्लेश, कुटुंबजनों से मतभेद, धन तंगी, कर्ज लेने जैसी नौबत आएगी। शारीरिक रूप से भी कष्टप्रद समय रहेगा।
अन्य राशियों पर प्रभाव
मेष : व्यवसाय व नौकरी में अच्छी सफलता मिलेगी। धन लाभ, पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि, स्त्रीवर्ग से लाभ, रोग मुक्ति एवं विवाह के योग बनेंगे। एकादश स्थान में शनि लोहे के पाये से भ्रमण करने पर संतान व जीवनसाथी को पीड़ा, मित्रों से विश्वासघात मिल सकता है।
वृषभ : दशम स्थान में ताम्र पाद से शनि का भ्रमण होने के कारण पारिवरिक वियोग, नौकरी-व्यवसाय में परिवर्तन, धन हानि, माता-पिता को शारीरिक कष्ट रहेगा। जन्मस्थ शनि बलवान होने पर व्यावसायिक उन्नति, कोर्ट में विजय, धन लाभ, संपत्ति सुख मिलेगा।
मिथुन : नवम स्थान में स्वर्ण पाद से शनि का भ्रमण होना शुभ नहीं है। संतान की चिंता, अनिष्ट प्रसंग, परदेस प्रवास, भाई-बहनों को पीड़, आर्थिक कष्ट, रोग, कार्यों में बाधाएं आएंगी। जन्म का शनि बलवान होने पर धार्मिक प्रवास, धन लाभ, प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
सिंह : सप्तम भाव में लोहे के पाये से शनि का गोचर मानसिक पीड़ा देगा। करियर में बाधा, धन तंगी, शिक्षार्जन में रूकावट, द्रव्यहानि, शारीरिक रोग रहेंगे। जन्मस्थ शनि बली होने के कारण अशुभ फलों में कमी आएगी। रूका धन मिलेगा। शेयर से लाभ अर्जित होगा।
कन्या : तांबे के पाये से छठे स्थान में शनि का भ्रमण होना शुभप्रद रहेगा। रोग मुक्ति, शत्रुनाश, कोर्ट में विजय, कर्ज मुक्ति, नौकरी व्यवसाय में अच्छी सफलता प्राप्त होगी। जन्मस्थ शनि निर्बल होने पर धन हानि, अनावश्यक खर्च, स्थान परिवर्तन हो सकता है।
तुला : चांदी के पाये से पंचम भाव में शनि का गोचर ठीक रहेगा। मान-सम्मान, प्रतिष्ठा में वृद्धि, शिक्षा में सफलता, स्थायी संपत्ति मंय वृद्धि, शेयर कारोबार से लाभ, मित्रों से सहयोग रहेगा। जन्मकुंडली में शनि कमजोर हो तो संतान को पीड़ा, कार्यों में बाधा बनेगी।
धनु : शनि का तृतीय स्थान में लोहे के पाये से भ्रमण करना श्रेष्ठफलकारक है। पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि, शत्रु नाश, पराक्रम में वृद्धि, धन लाभ, परिवार का सहयोग रहेगा। जन्मस्थ शनि कमजोर होने पर मानसिक कष्ट, आलस्य हावी रहेगी, धन का अपव्यय करेंगे।
शनि अस्त
- 17 फरवरी 2024 सायं 7:07 से
- 23 मार्च 2024 प्रात: 5:33 तक
- कुल अस्त अवधि 35 दिन
शनि वक्री
- 30 जून 2024 रात्रि 12:35 से
- 15 नवंबर 2024 सायं 7:51 तक
- कुल वक्री अवधि 139 दिन
क्या उपाय करें
शनि ग्रह की शांति के लिए हनुमानजी की उपासना करना लाभदायक रहता है। सुंदरकांड, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण का पाठ करें। शनैश्चर स्तोत्र, शनि कवच, शनि अष्टोत्तर शत नामावाली का पाठ करना चाहिए। शनि के मंत्र ऊं शं शनैश्चराय नम: के 23 हजार जाप करें और दशांश हवन करने से शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है।
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