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Saturn transit to Aquarius: शनि का हुआ महा राशिपरिवर्तन, जानिए असर

नई दिल्ली, 29 अप्रैल। कर्मफल दाता शनिदेव ढाई साल के बाद अपनी राशि मकर को छोड़कर अपनी ही दूसरी राशि कुंभ में प्रवेश करने जा रहे हैं। शनि का यह महा राशिपरिवर्तन वैशाख कृष्ण 14, विक्रम संवत 2079 दिनांक 29 अप्रैल 2022 आज प्रात: 7.52 बजे होगा। शनि के कुंभ राशि में प्रवेश करने के साथ ही धनु राशि से साढ़ेसाती समाप्त हो जाएगी। इसके साथ मकर राशि पर साढ़ेसाती का अंतिम ढैया, कुंभ राशि पर दूसरा ढैया और मीन राशि पर साढ़ेसाती का प्रथम ढैया प्रारंभ हो जाएगा। इसी तरह मिथुन और तुला राशि पर से शनि का लघु कल्याणी ढैया समाप्त होगा और कर्क तथा वृश्चिक राशि पर लघु कल्याणी ढैया प्रारंभ हो जाएगा।

शनि का हुआ महा राशिपरिवर्तन, जानिए असर

30 वर्ष बाद पुन: कुंभ राशि में

शनि एक राशि में ढाई वर्ष तक रहते हैं। इस प्रकार बारह राशियों का एक चक्र पूरा करने में शनि को 30 वर्ष का समय लगता है। शनि 30 वर्ष बाद अब पुन: कुंभ राशि में आ रहे हैं। शनि के इस महा राशिपरिवर्तन का विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा।

तीन राशियों पर साढ़ेसाती का प्रभाव

  • मीन : मीन राशि के जातकों के मस्तक पर शनि की साढ़ेसाती का प्रथम ढैया प्रारंभ हो रहा है। यह शुभप्रद नहीं है। नौकरी-कार्य में रूकावट, परदेस गमन, राजकीय संकट, पति-पत्नी को पीड़ा, धन का अपव्यय, भाग्य मंद, संतान कष्ट तथा कुटुंबजन से दूर होने का योग बनता है।
  • कुंभ : कुंभ राशि के जातकों को शनि की साढ़ेसाती का दूसरा ढैया प्रारंभ हो रहा है। ह्दय पर शनि भ्रमण करने पर शुभाशुभ फल प्राप्त होंगे। मित्रों से लाभ, कार्य में विलंब होने पर भी स्थायी लाभ, नौकरी व्यवसाय में उन्नति एवं पद प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। जन्म का शनि निर्बल होने की स्थिति में स्वास्थ्य में गिरावट, मस्तिष्क पीड़ा, जीवनसाथी को कष्ट, कार्यो में अवरोध, स्वजन से वैर होगा।
  • मकर : मकर राशि के जातकों को शनि की साढ़ेसाती का तीसरा और अंतिम ढैया ताम्रपाद से चरणों पर प्रारंभ होगा जो मध्यम शुभाशुभ होगा। जन्मत: शनि बलवान होने पर आय में वृद्धि, स्थायी संपत्ति सुख, कोर्ट में विजय एवं यश-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। जन्म कुंडली में शनि निर्बल होने पर कुटुंबजन का वियोग, आर्थिक तंगी, स्वयं तथा जीवनसाथी के स्वास्थ्य में गिरावट, कार्य में असफलता, अपमान बनेगा।

लघुकल्याणी ढैया वालों पर प्रभाव

  • कर्क : कर्क राशि पर शनि का लघुकल्याणी ढैया अष्टम स्थान में चांदी के पाये से प्रारंभ होगा जिसमें शुभ फल कम एवं अशुभ फल अधिक प्राप्त होंगे। किसी भी मार्ग से धन लाभ, कार्य में भागदौड़, अत्यधिक परिश्रम करना होगा। भागीदार से हानि, कार्य में रूकावट, संपत्ति, संतति, मित्र, पशु-एवं वाहन से हानि, राजभय, अपमान, जीवनसाथी को पीड़ा होगी।
  • वृश्चिक : वृश्चिक राशि के जातकों को लघुकल्याणी ढैया चतुर्थ स्थान में रजत पाद से भ्रमण शुभाशुभ फल प्रदान करेगा। जन्म शनि बलवान होने पर स्थावर संपत्ति का लाभ, कार्यो में सफलता, किसी की मृत्यु से होने वाला लाभ मिलेगा, नौकरी कार्य में उन्नति। जन्मकालीन शनि निर्बल होने पर यात्रा में कष्ट, स्थान परिवर्तन, प्रियजन का वियोग होगा।

अन्य राशियों पर प्रभाव

  • मेष : धन लाभ, पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि, व्यवसाय-नौकरी में सफलता, भूमि, लोहा, पत्थर व स्त्रीवर्ग से लाभ। निरोगता।
  • वृषभ : माता-पिता अस्वस्थ, कार्य में परिवर्तन, हानि, चल-अचल संपत्ति प्राप्ति, विवाद-मतभेद, मानसिक पीड़ा।
  • मिथुन : शनि बलवान हो तो संतान सुख, तीर्थयात्रा, संत समागम, द्रव्य प्राप्ति, रूका धन मिलेगा, शनि कमजोर हो तो कष्ट, संतान की चिंता, अनिष्ट प्रसंग।
  • सिंह : नैतिक मार्ग से धन लाभ, व्यापार में लाभ, अचल संपत्ति की प्राप्ति, विवाह योग, शेयर में लाभ, मानसिक संताप, संतान को कष्ट।
  • कन्या : शत्रु नाश, दांपत्य में सुख, आरोग्यता, कर्ज से मुक्ति, मित्रों से लाभ, व्यवसाय में उन्नति, संपदा की प्रािप्त।
  • तुला : संतान एवं जीवनसाथी की चिंता, अनिष्ट प्रसंग, परदेस वास, शेयर में हानि, आय कम व्यय अधिक, स्थावर संपत्ति में विवाद।
  • धनु : कार्य में प्रगति, द्रव्यलाभ, पद प्रतिष्ठा पराक्रम में वृद्धि, शत्रुनाश, भाइयों से लाभ। कुटुंबजनों से पीड़ा, कष्टकारक यात्रा।

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