वासना में डूबे रहते हैं रोहिणी नक्षत्र में जन्मे लोग
नई दिल्ली। पृथ्वी पर जन्म लेने वाले प्रत्येक मनुष्य का जीवन ग्रह-नक्षत्रों से प्रभावित रहता है, जिस तरह नौ ग्रह मिलकर व्यक्ति के जीवन में एक-एक पल की घटनाएं तय करते हैं उसी प्रकार जन्म नक्षत्र भी शुभ-अशुभ घटनाओं का निर्धारण करता है। 12 राशि चक्र में 27 नक्षत्र होते हैं और एक अभीजित नक्षत्र होता है। हर दिन एक नक्षत्र रहता है।
आइये जानते हैं अपने जन्म नक्षत्र के अनुसार मनुष्य का स्वभाव कैसा होता है और उसका भविष्य उसे किस राह पर ले जाता है। पहले भाग में प्रथम पांच नक्षत्रों की जानकारी:...

अश्विनी
27 नक्षत्रों में सबसे पहला नक्षत्र होता है अश्विनी। ज्योतिष सिद्धांत के अनुसार अश्विनी नक्षत्र में जन्म लेने वाला मनुष्य धनी, हंसमुख, सुंदर, बुद्धिमान, अच्छी परिधान धारण करने वाला, आभूषणों के शौकीन, स्वस्थ और सुंदर शरीर वाला होता है। ऐसा व्यक्ति प्रत्येक कार्य को निपुणता के साथ संपन्न करता है। परोपकार इनके रक्त में होता है, इसलिए ये हमेशा दूसरों के हित के लिए कार्य करते हैं। सर्व साधन संपन्न होते हैं। इनका भाग्योदय 20 वर्ष की आयु के बाद होता है। इनके जीवन में जब-जब क्रूर ग्रह की दशा आती है इनके साथ धोखाधड़ी होती है।

भरणी
नक्षत्र चक्र का दूसरा नक्षत्र है भरणी। इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति सत्यवादी और सुमार्ग पर चलने वाले होते हैं। स्त्रियों और सौंदर्य के प्रति इनका सहज आकर्षण होता है। इनकी मनोवृत्ति अस्थिर होती है। विदेश जाने की तीव्र इच्छा होती है और उसे पूरा करने के लिए ये कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाते हैं। इनकी आयु लंबी होती है और शत्रुओं को अपनी तर्क शक्ति से पराजित करने में कुशल होते हैं। इनका भाग्योदय 25 वर्ष के बाद होता है। इन्हें चोट लगने की आशंका बार-बार बनती है।

कृतिका
तीसरा नक्षत्र होता है कृतिका। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस नक्षत्र में जन्में स्त्री-पुरुष कामी प्रवृत्ति के होते हैं। ये सदा नए-नए संबंधों की तलाश में रहते हैं। कंजूस और कृतघ्न वृत्ति के होने से ये अपने मित्रों और संबंधियों से बिगाड़ कर बैठते हैं। हालांकि दृढ़ निश्चयी होते हैं और जिस काम में हाथ डाल लेते हैं उसे पूरा करने में जी-जान लगा देते हैं। अच्छा भोजन करना इन्हें पसंद होता है। विपरीत लिंग मनुष्यों से मित्रता करने में माहिर होते हैं। इनका व्यक्तित्व भव्य होता है और भाग्योदय 29 वर्ष की आयु के पश्चात होता है।

रोहिणी
चौथा नक्षत्र है रोहिणी। सुंदर, आकर्षक और लुभावना व्यक्तित्व इनकी खासियत होती है। सुमार्ग पर चलने वाले होते हैं और मधुर भाषी होते हैं। जनता के बीच इनकी लोकप्रियता अच्छी होती है। कलाकार किस्म के इंसान होते हैं और सांसारिक कार्यों को कुशलता अैर बौद्धिकता से संपन्न करते हैं। इस नक्षत्र के व्यक्तियों का जन्म यदि रात्रि में हो तो कामी और वासना में डूबे रहते हैं। इनका भाग्योदय 30 वर्ष की आयु के बाद होता है। क्रूर ग्रह की दशा हो और राहु, शनि व केतु की अंतर्दशा में शत्रुओं से कष्ट होता है।

मृगशिरा
क्रोधी और चालाक किस्म के होते हैं पांचवे नक्षत्र में मृगशिरा में जन्मे व्यक्ति। इन्हें छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आ जाता है और ये नहीं देखते कि किससे बात कर रहे हैं। अपना काम निकालने में निपुण होते हैं। प्रियजनों का अनादर करने में भी नहीं चूकते। हालांकि भीतर से डरपोक किस्म के होते हैं। यात्राओं में इनकी खास रुचि होती है। इनका भाग्योदय 28 वर्ष की आयु के बाद होता है। विद्वान और शिक्षित होते हुए भी ऐसे व्यक्तियों के पास धन की कमी होती है और धन टिकता नहीं है।












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