Ravi Pushya Yoga: अधिकमास में रवि पुष्य का शुभ संयोग, मिलेगा धन, मान-सम्मान
नई दिल्ली। नक्षत्रों का राजा कहलाने वाला पुष्य नक्षत्र 20 मई रविवार को आ रहा है। इस खास दिन का इंतजार हर उस व्यक्ति को होता है जो ग्रह-नक्षत्रों को अपने अनुकूल करके धन, मान, सम्मान, पद, प्रतिष्ठा हासिल करना चाहता है। इस बार पुष्य नक्षत्र के साथ कई अन्य शुभ संयोग बनने से यह दिन वर्ष का सबसे श्रेष्ठ दिन कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। 20 मई को रविवार होने से रवि-पुष्य का शुभ संयोग है। दूसरा, इस दिन रवि योग भी है और तीसरा शुभ कारण यह कि रवि-पुष्य का यह संयोग अधिकमास में आ रहा है। अधिकमास प्रत्येक तीन साल में आता है, इस लिहाज से देखा जाए तो यह खास संयोग तीन वर्षों में बना है।

क्यों खास है रवि-पुष्य संयोग
ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्रों के चक्र में पुष्य आठवां नक्षत्र होता है। इसे नक्षत्रों का राजा कहा गया है। इस नक्षत्र के देवता बृहस्पति और स्वामी शनि हैं। सभी नक्षत्रों में इसे सर्वाधिक शुभ नक्षत्र की संज्ञा दी गई है। इसमें किया गया कोई भी कार्य पुण्यदायी और तुरंत फल देने वाला होता है। वार के साथ पुष्य नक्षत्र का संयोग होने से गुरु पुष्य और रवि पुष्य जैसे महायोगों का निर्माण होता है, जिनमें खरीदी करने का विशेष महत्व माना गया है। यह संयोग खास इसलिए होता है क्योंकि ग्रहों के राजा सूर्य के दिन रविवार और नक्षत्रों के राजा पुष्य का संयोग होना एक तरह के राजयोग का निर्माण करता है। जब ग्रह और नक्षत्रों के राजा आपस में मिले तो वह संयोग अपने आप में खास हो जाता है। इस संयोग में किया गया शुभ कार्य अनंत गुना फलदायी होता है। पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति हैं इसलिए इस दिन पीली धातु जैसे सोना खरीदना अत्यंत शुभ होता है। इस दिन किए गए मंत्र जाप तुरंत फलदायी होते हैं।

अधिकमास और रवि-पुष्य संयोग
वशिष्ठ सिद्धांत के अनुसार भारतीय हिंदू कैलेंडर सूर्य मास और चंद्र मास की गणना के अनुसार चलता है। अधिकमास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घटी के अंतर से आता है। इसका प्राकट्य सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच अंतर का संतुलन बनाने के लिए होता है। भारतीय गणना पद्धति के अनुसार प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, जो हर तीन वर्ष में लगभग 1 माह के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अस्तित्व में आता है, जिसे अतिरिक्त होने के कारण अधिकमास का नाम दिया गया है। इस माह के अधिपति देवता भगवान विष्णु हैं। इसलिए इस माह में उनकी कृपा पाने के लिए विशेष जप-तप, व्रत-उपवास किए जाते हैं। इसमें किए गए कार्य 10 हजार गुना अधिक फल देते हैं। इसमें रवि-पुष्य का संयोग होने से परिणाम प्राप्ति की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

क्या करें इस खास दिन
- रवि पुष्य के दिन प्रात: सूर्योदय से पूर्व उठकर पानी में गंगाजल डालकर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं। उदित होते सूर्य को अर्घ्य दें और ऊं घृणि: सूर्याय नम: मंत्र की एक माला जाप करें। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। इससे आयु और आरोग्य की प्राप्ति होती है। सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले या सरकारी नौकरी में प्रमोशन चाहने वालों को यह उपाय जरूर करना चाहिए।
- जिन लोगों की कुंडली में सूर्य बुरे प्रभाव दे रहा हो वे इस दिन सूर्य को जल में शकर और लाल पुष्प डालकर अर्घ्य दें। इससे सूर्य की पीड़ा कम होती है और तरक्की के रास्ते खुलते हैं।
- जो लोग सूर्य का रत्न माणिक्य धारण करना चाहते हैं, उनके लिए यह दिन वर्ष का सर्वश्रेष्ठ दिन है
- धन, संपत्ति की चाह रखने वाले इस दिन नमक का सेवन बिलकुल न करें। भोजन में मीठे की मात्रा रखें। सूर्यदेव को मावे की मिठाई का भोग लगाएं और गरीब बच्चों में उसका दान करें।
- रवि पुष्य नक्षत्र खरीदारी के लिए अत्यंत शुभ दिन होता है। इस दिन स्वर्ण खरीदने से वह उत्तरोत्तर बढ़ता जाता है।
- अधिकमास का संयोग होने के कारण इस दिन निवेश संबंधी कार्य करने से उसमें वृद्धि होगी।
- दांपत्य जीवन में खुशहाली चाहते हैं या प्रेम संबंध प्राप्त करना चाहते हैं तो इस खास दिन एक मोरपंख लाकर उसे अपने बेडरूम की उत्तरी दीवार पर लगाएं।
- धन की कभी कमी न हो, इसके लिए गोल्ड प्लेटेड श्रीयंत्र पर केसर की स्याही से 9 बिंदी लगाकर लाल रेशमी कपड़े में बांधकर तिजोरी या दुकान के गल्ले में रखें।













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