Astrology: कैसे करें असली रत्नों की पहचान?

लखनऊ। आज संसार में कौन है जो अपना भाग्य बदलना नहीं चाहता है ? कौन है जो जीवन के संघर्षो से मुक्ति नहीं पाना चाहता है ? लेकिन यह सुधार ज्योतिष द्वारा किया जा सकता है, कौन सा रस आपके भाग्य को जगायेगा और आपको रोग, बीमारी और शत्रुओं से बचायेगा और आपके विवाह, सम्बन्धित विलम्ब को दूर करेगा इत्यादि अनेक प्रकार के समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है।

असली रत्नों की पहचान

असली रत्नों की पहचान

कुछ रत्न चट्टानों से अलग होकर झरने नदियों की तलहटी में जमा होकर गोल व चिकने हो जाते है। खनिज रत्नों के अलावा जैविक प्रक्रिया द्वारा कई रत्न प्राप्त होते है, जैसे-मोती, मूंगा आदि।मोती सीप के भीतर रहने वाले घोंघा के द्वारा बनाया जाता है। सीप के अन्दर बाहरी तत्व चले जाने के कारण उसको कष्ट होता है। जिसे सीप अपने वृक से एक विशेष द्रव्य से लपेट देता है, जो मोती के रूप प्राप्त होता है। इसी सिद्धान्त पर कृत्रिम मोतियों का निर्माण ‘‘पेलिप्स'' नामक समुद्री जीव की अस्थियों से होता है।

रत्नों का निर्माण कैसे होता है....

रत्नों का निर्माण कैसे होता है....

इसी प्रकार से चट्टानें भूगर्भ में गर्मी तथा दबाव से परिवर्तित होकर नए खनिज तत्वों के साथ नई चट्टानों में परिवर्तित हो जाती है, ऐसी प्रक्रिया होने पर उनके भीतर रत्नों का निर्माण होता है।

उदाहरणार्थ-

  • लाइमस्टोन से परिवर्तित होकर संगमरमर में माणिक्य रत्न मिलता है।
  • ओपल आस्ट्रेलिया में-मौसम के प्रभाव स्वरूप टुकड़ों में जमा हो जाने से निर्मित होते है।
  • फिरोजा भी इसी प्रकार से कुछ चट्टानों की दरारों में मिलता है।

अन्य इसी प्रकार से हैलाइट तथा जिप्सम आदि भी चट्टानों में माणिक्य के रूप चिपके रहते है।

रत्नों की पहचान

रत्नों की पहचान

  • प्रत्येक रत्नों में रेगों का फिंगर प्रिंट या स्पेक्ट्रम होता है, जो प्रत्येक रत्न में भिन्न-भिन्न हेाता है। जो कि आॅखों से नहीं देखा जा सकता है, इसीलिए रत्नशास्त्री इसे ‘‘स्पेक्ट्रोस्कोप'' से देखते है। यह यन्त्र से निकलने वाली रोशनी को इसके रंगों के स्पेक्ट्रम में विभाजित कर देता है, जो कि प्रत्येक रत्न का अलग-अलग होता है। जिससे रत्नों की पहचान आसानी से की जा सकती है।
  • कुछ रत्नों की कृत्रिम प्रकाश पड़ने पर उनकी रंग और आभा बदल जाती है। जैसे-पुखराज-सूर्य की रोशनी में जितनी अच्छी आभा देगा उतना कृत्रिम रोशनी का बल्ब में नहीं। लेकिन माणिक्य और पन्ना सूर्य की रोशनी में कम आभा और कृत्रिम रोशनी में दोगुनी आभा देता है। सबसे ज्यादा फर्क ‘‘एलेवजेन्ड्राइट'' में होता है। सूर्य की रोशनी में हरा विद्युत रोशनी में लाल दिखाई देता है।
  • कुण्डली भी उस वास्तविक सौर मण्डल का आभासी परन्तु तात्कालिक खाका होता है। जिससे यह पता चलता है कि जन्म के समय कौन सा ग्रह उस कुण्डली या जातक के लिए ज्यादा प्रभावी था और कौन सा ग्रह कम भारत में ज्योतिष धारण के अनुसार सात मुख्य ग्रह है तथा दो छाया ग्रह है जिनके द्वारा मानव का जीवन संचालन और विघटन होता है।
  • 1-सूर्य। 2-चन्द्र। 3-मंगल। 4-बुध। 5-गुरू। 6-शुक्र। 7-शनि। 8-राहु। 9-केतु।
  • इसका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है हाल में ही पश्चिमी ज्योतिषयों ने तीन अन्य ग्रहों की खोज की जो-हर्षल, प्लूटो, नेपच्यून है। इनकी उत्पत्ति बहुत पहले हो चुकी थी। किन्तु इनको भारतीय ज्योतिष में इसीलिए सम्मिलत नहीं किया क्योंकि यह ग्रह बहुत ही दूर और अत्यन्त धीमी गति से चलते है जिनका प्रभाव नगण्य के बराबर होता है।

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