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Panchak: जानिए प्ंचक नक्षत्रों में किये जाने वाले शुभ कार्य

By Pt. Anuj K Shukla
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लखनऊ। भारतीय ज्योतिष के मुहूर्त विज्ञान में तिथि, करण, योग, वार व नक्षत्र इन सभी की विशेष भूमिका होती है। इन सभी के परस्पर मिलान से मुहूर्त का निर्माण किया जाता है। कुछ मुहूर्त शुभ माने जाते है, जिसमें सभी प्रकार के कार्य किये जाते है तो कुछ मुहूर्त अशुभता की श्रेणी में आते है। जैसे पंचक का नाम तो आप लोगों ने सुना ही होगा। कुछ झोला छाप पंडितों ने पंचक को समाज में इतना हव्वा बना दिया है कि पूछो मत।

चलिए आज हम आप सभी को पंचक की शुभता और अशुभता दोनों के बारे में विस्तार से बताते हैं..

पंचक के प्रकार

पंचक के प्रकार

रविवार को शुरू होने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है,इसके प्रभाव से ये पांच दिन शारीरिक और मानसिक परेशानियों वाले होते हैं,इस पंचक में किसी भी तरह के शुभ काम नहीं करने चाहिए,हर तरह के मांगलिक कार्यों में ये पंचक अशुभ माना गया है।

राज पंचक

सोमवार को शुरू होने वाला पंचक राज पंचक कहलाता है,ये पंचक शुभ माना जाता है,इसके प्रभाव से इन पांच दिनों में सरकारी कामों में सफलता मिलती है,राज पंचक में संपत्ति से जुड़े काम करना भी शुभ रहता है।

अग्नि पंचक

मंगलवार को शुरू होने वाला पंचक अग्नि पंचक कहलाता है,इन पांच दिनों में कोर्ट कचहरी और विवाद आदि के फैसले,अपना हक प्राप्त करने वाले काम किए जा सकते हैं,इस पंचक में अग्नि का भय होता है,इस पंचक में किसी भी तरह का निर्माण कार्य, औजार और मशीनरी कामों की शुरुआत करना अशुभ माना गया है,इनसे नुकसान हो सकता है।

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मृत्यु पंचक

मृत्यु पंचक

शनिवार को शुरू होने वाला पंचक मृत्यु पंचक कहलाता है,नाम से ही पता चलता है कि अशुभ दिन से शुरू होने वाला ये पंचक मृत्यु के बराबर परेशानी देने वाला होता है,इन पांच दिनों में किसी भी तरह के जोखिम भरे काम नहीं करना चाहिए। इसके प्रभाव से विवाद, चोट, दुर्घटना आदि होने का खतरा रहता है।

चोर पंचक

शुक्रवार को शुरू होने वाला पंचक चोर पंचक कहलाता है.विद्वानों के अनुसार, इस पंचक में यात्रा करने की मनाही है,इस पंचक में लेन-देन, व्यापार और किसी भी तरह के सौदे भी नहीं करने चाहिए, मना किए गए कार्य करने से धन हानि हो सकती है।

नोट-इसके अतिरिक्त बुधवार और गुरुवार को शुरू होने वाले पंचक में ऊपर दी गई बातों का पालन करना जरूरी नहीं माना गया है,इन दो दिनों में शुरू होने वाले दिनों में पंचक के पांच कामों के अलावा किसी भी तरह के शुभ काम किए जा सकते हैं।

पंचक के नक्षत्रों का अशुभ प्रभाव

पंचक के नक्षत्रों का अशुभ प्रभाव

  • धनिष्ठा में अग्नि का भय रहता है।
  • शतभिषा में काम करने से घर में तनाव का वातावरण रहेगा।
  • पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में अशुभ काम करने से घर में रोग बना रहता है।
  • उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में अशुभ कर्म करने से आर्थिक दण्ड व सामाजिक अपमान होने की आशंका रहती है।
  • रेवती नक्षत्र में अशुभ कार्य करने से धन हानि तथा दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है।
  • पंचक नक्षत्रों में न करने वाले 5 कार्य

    पंचक नक्षत्रों में न करने वाले 5 कार्य

    • पंचक में चारपाई बनवाना भी अच्छा नहीं माना जाता,विद्वानों के अनुसार ऐसा करने से कोई बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
    • पंचक के दौरान जिस समय घनिष्ठा नक्षत्र हो उस समय घास, लकड़ी आदि जलने वाली वस्तुएं इकट्ठी नहीं करना चाहिए, इससे आग लगने का भय रहता है।
    • पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नही करनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है,इन नक्षत्रों में दक्षिण दिशा की यात्रा करना हानिकारक माना गया है।
    • पंचक के दौरान जब रेवती नक्षत्र चल रहा हो, उस समय घर की छत नहीं बनाना चाहिए, ऐसा विद्वानों का कहना है,इससे धन हानि और घर में क्लेश होता है।
    • सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि पंचक काल में यदि किसी की मृत्यु होती है या उस शव का अन्तिम संस्कार किया जाता है, तो ऐसा मानना है कि उस कुटुम्ब अथवा उससे सम्बन्धित रिलेशन में पाॅच लोगों की और मृत्यु होती है।

    उपाय- यदि परिस्थितिवश किसी शव का अन्तिम संस्कार पंचक में करना पड़े तो कुश के पाॅच शव बनाकर उस पर जौ का चूर्ण लेप करके बरगद या मिटटी के पात्र में रखकर मनुष्य के शव के समीप रखकर संकल्प करें तत्पश्चात कुश के बने पाॅचों पुतलों को क्रमशः ह्रदय, कमर के बाॅये व दाॅये हिस्से में और दोनों घुटनों पर एक-2 कुश का पुतला रखकर मनुष्य के शव को जलाना चाहिए। विधि-विधान से पंचक पूजन करने से पंचक दोष समाप्त हो जाता है। शुद्धि कर्म व तेरहीं के पश्चात पुनः पंचक पूजन करायें। सवा लाख महामृत्युंजय मृत्यु का जप करवाने से पंचक दोष पूर्णतः समाप्त हो जाता है।

    बृहत् होराशास्त्र के अनुसार पंचक में किये जाने वाले शुभ कार्य

    पंचक में आने वाले नक्षत्रों में ये शुभ कार्य हो सकते हैं, पंचक में आने वाला उत्तराभाद्रपद नक्षत्र वार के साथ मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बनाता है, वहीं धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र यात्रा, व्यापार, मुंडन आदि शुभ कार्यों में श्रेष्ठ माने गए हैं।

    पंचक को भले ही अशुभ माना जाता है, लेकिन इस दौरान सगाई, विवाह आदि शुभ कार्य भी किए जाते हैं, पंचक में आने वाले तीन नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद व रेवती रविवार को होने से आनंद आदि 28 योगों में से 3 शुभ योग बनाते हैं, ये शुभ योग इस प्रकार हैं- चर, स्थिर व प्रवर्ध,इन शुभ योगों से सफलता व धन लाभ का विचार किया जाता है..।

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English summary
Panchak Starts On April 28, 2019 (Sunday) at 15:46 and Ends On May 03, 2019 (Friday) at 14:41, here is some important facts about it.
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