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Palmistry : यदि आपके हाथ में है सरस्वती योग तो बनेंगे मशहूर वक्ता-लेखक

By Pt. Gajendra Sharma
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Saraswati Yog and its Benefits: कभी आपने सोचा है किबड़े-बड़े वक्ता या संत, प्रवचनकार कैसे किसी भी विषय पर घंटों धाराप्रवाह बोल लेते हैं, या कोई लेखक कैसे रातोंरात प्रसिद्धि पा लेता है। दरअसल यह सब कर्म के साथ किस्मत का खेल होता है। मनुष्य कर्म तो करता है लेकिन उसकी सफलता-असफलता उसके भाग्य पर निर्भर करती है। इसलिए कर्म के साथ भाग्य का होना भी जरूरी है। आज हम बात करेंगे हस्तरेखा को आधार बनाते हुए एक ऐसे विशेष योग की, जो यदि किसी व्यक्ति के हाथ में है तो उसे लेखन या उद्बोधन देने के क्षेत्र में बड़ी सफलता प्राप्त होती है। यह विशेष योग है सरस्वती योग। जी हां, मां सरस्वती ज्ञान और विद्या की देवी हैं, उन्हीं के नाम पर इस योग का नाम सरस्वती योग है।

यदि आपके हाथ में है सरस्वती योग तो बनेंगे ख्यात वक्ता-लेखक

कैसे बनता है सरस्वती योग

हथेली में यदि कोई रेखा बृहस्पति पर्वत से प्रारंभ होकर चंद्र पर्वत तक जाती हो और एक रेखा चंद्र पर्वत से प्रारंभ होकर बृहस्पति पर्वत तक पहुंचती हो। ये दोनों रेखाएं पूर्ण विकसित, लालिमा युक्त, बिना कटी-फटी हो तो सरस्वती योग बनता है। बृहस्पति पर्वत तर्जनी अंगुली के मूल में होता है तथा चंद्र पर्वत कनिष्ठिका अंगुली के नीचे बुध पर्वत की समाप्ति से प्रारंभ होकर मणिबंध से पहले तक का हथेली के किनारे वाला क्षेत्र होता है। यदि ऐसा योग हथेली में हो तो इसे सरस्वती योग कहा जाता है।

सरस्वती योग का फल

  • सरस्वती योग के प्रभाव से व्यक्ति काव्य, संगीत, नृत्य आदि के क्षेत्र में पारंगत होता है तथा कोई एक समय आता है जब वह अपनी कला के माध्यम से शीर्ष प्राप्त करता है।
  • ऐसा व्यक्ति अपनी कला के माध्यम से देश-विदेश में पूर्ण सम्मान तथा ख्याति अर्जित करता है। सरस्वती के साथ उस पर लक्ष्मी की कृपा भी होती है।
  • सरस्वती योग वाला व्यक्ति लेखन और साहित्य के क्षेत्र में बड़ी सफलताएं अर्जित करता है। इनकी लेखनी का लोहा पूरी दुनिया मानती है।सरस्वती योग जिनके हाथ में होता है वे जातक प्रसिद्ध वक्ता होते हैं। इनमें किसी भी विषय पर लगातार घंटों बोलने की क्षमता होती है। लोग इनकी वाणी से प्रभावित रहते हैं।
  • फिल्मों में ऐसा व्यक्ति विशेष उपलब्धि हासिल करता है।
  • अपनी आवाज के दम पर ऐसा जातक सर्वत्र लोकप्रियता हासिल करता है
  • इस योग का एक खराब पक्ष भी है। वह यह किजातक बहुत ज्यादा भावुक और संवेदनशील होता है। कभी कभी ऐसा व्यक्ति छोटी-छोटी बातों में विचलित हो जाता है और अपना आपा खो बैठता है।
  • यदि सरस्वती योग बनाने वाली रेखाएं कटी-फटी हो तो ऐसा जातक अपनी वाणी के कारण अपमानजनक परिस्थितियों का सामना करता है।

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English summary
Saraswati Yoga is described or introduced by the Astrological Classic Phaladeepika Written by Sage Mantreswar. here is its Benefits
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