Nakshatra Connection: रेवती, अनुराधा नक्षत्र में बीमारी आई तो ठीक होने में लगेगा समय
Nakshatra Connection: भारतीय मनीषियों ने वैज्ञानिक आधार पर ग्रह-नक्षत्रों की सटीक गणना करके प्रत्येक कार्य के बारे में सूक्ष्मता से जानकारी दी है। इनमें नक्षत्रों के आधार पर किसी रोग की उत्पत्ति और उसके ठीक होने के बारे में भी बताया गया है। इन दिनों जहां पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है, ऐसे में लोगों की यह चिंता स्वाभाविक है कि यदि उन्हें रोग हुआ तो वे ठीक कितने दिन में होंगे। ज्योतिष के प्रमुख ग्रंथ मुहूर्तचिंतामणि में नक्षत्रों के आधार पर रोग मुक्ति का समय बताया गया है। कौन से नक्षत्र में रोग प्रारंभ होने पर कितने दिनों में रोगी ठीक हो सकता है, यह जानकारी बड़ी ही सूक्ष्मता से अध्ययन करके बताई गई है।

मुहूर्तचिंतामणि के नक्षत्र प्रकरण के 46वें श्लोक के अनुसार-
मूलाग्निदास्त्रे नव पितृभ्ये नखा बुध्न्यार्यमेज्यादितिधातृंभे नगा: ।
मासोब्जवैश्वेथ यमाहिमूलभे मिश्रेशपितृये फणिदंशने मृति: ।।
इसके अनुसार स्वाती, ज्वेष्ठा, पूर्वा षाढ़ा, पूर्वा भाद्रपद, पूर्वा फाल्गुनी, आद्र्रा, आश्लेषा इन सात नक्षत्रों में जिस मनुष्य को रोग प्रारंभ हो उसकी मृत्यु की आशंका बनी रहती है। यदि जन्म कुंडली में पाप ग्रहों की संख्या शुभ ग्रहों से अधिक हो तो यह आशंका प्रबल हो जाती है।
- रेवती, अनुराधा नक्षत्र में रोग प्रारंभ हो तो उसे ठीक होने में देर लगती है। निश्चित समय नहीं बताया जा सकता।
- भरणी, श्रवण, शतभिषा, चित्रा इन चार नक्षत्रों में रोगोत्पत्ति हो तो 11 दिन तक रोग का प्रकोप अधिक रहता है। 11 दिन बार रोग मुक्ति होती है।
- विशाखा, हस्त, धनिष्ठा नक्षत्र में रोग आए तो 1 पक्ष अर्थात् 15 दिन रोग ठीक होने में लगते हैं।
- मूल, कृतिका, अश्विनी नक्षत्र में रोग प्रारंभ होने पर वह 9 दिनों तक रहता है।
- मघा नक्षत्र में रोग प्रारंभ होने पर वह 20 दिन बाद ठीक होता है।
- उत्तराभाद्रपद, उत्तराफाल्गुनी, पुष्य, पुनर्वसु, रोहिणी इन पांच नक्षत्रों में कोई बीमारी शुरू हो तो वह ठीक होने में 7 दिन तक का समय ले लेती है।
- मृगशिरा, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में होने वाला रोग एक मास अर्थात् 30 दिन में ठीक होता है।
- भरणी, आश्लेषा, मूल, मिश्रसंज्ञक कृतिका-विशाखा, आद्र्रा एवं मघा इन सात नक्षत्रों में सर्पदंश हो या कोई जहरीला जंतु काटे तो मृत्यु हो जाती है।
- यदि सर्प काटे हुए व्यक्ति की राशि से चंद्रमा चौथा, आठवां, 12वां हो या चंद्र कमजोर हो तो मृत्यु की आशंका रहती है।












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