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Matsya Purana: कैसा है नवग्रहों का स्वरूप, क्या कहता है मत्स्य पुराण?

By Pt. Gajendra Sharma
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नई दिल्ली, 08अप्रैल। भारतीय की आध्यात्मिक धरोहर वेदों के साथ ही ज्योतिष शास्त्र में नवग्रह परिषद का वर्णन मिलता है। अनेक पुराणों में भी नवग्रहों के स्वरूप, स्वभाव आदि के संबंध में विस्तार से जानकारी मिलती है। मत्स्य पुराण में नवग्रहों के स्वरूपों को विस्तार से स्पष्ट किया गया है।

Matsya Purana: कैसा है नवग्रहों का स्वरूप, क्या कहता है मत्स्य पुराण?

आइए जानते हैं नवग्रहों का स्वरूप....

  • सूर्य : सूर्यदेव की दो भुजाएं हैं। वे कमल के आसन पर विराजमान रहते हैं। उनके दोनों हाथों में कमल सुशोभित हैं। कांति कमल के भीतरी भाग जैसी है और वे सात घोड़ों तथा सात रस्सियों से जुते रथ पर आरूढ़ रहते हैं।
  • चंद्रमा : चंद्रमा गौरवर्ण, श्वेत वस्त्र और श्वेत अश्वयुक्त हैं। उनका वाहन श्वेत अश्वयुक्त रथ है। दो हाथ हैं, एक में गदा और दूसरा वरदमुद्रा में है।
  • मंगल : मंगल की चार भुजाएं हैं। उनके शरीर के रोएं लाल हैं, वे लाल रंग की पुष्पमाला और लाल रंग के वस्त्र धारण करते हैं। उनके चारों हाथों में क्रमश: शक्ति, त्रिशूल, गदा एवं वरदमुद्रा है।
  • बुध : बुध पीले रंग की पुष्पमाला और वस्त्र धारण करते हैं। उनके शरीर की कांति कनेर के पुष्प के समान है। चार हाथों में क्रमश: तलवार, ढाल, गदा और वरदमुद्रा है। ये सिंह पर सवारी करते हैं।
  • बृहस्पति : देवताओं के गुरु बृहस्पति का वर्ण पीत है। ये इन्हीं रंगों के वस्त्र धारण करते हैं। चार भुजाओं में दंड, रुद्राक्ष की माला, कमंडलु और वरमुद्रा है।

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  • शुक्र : दानवों के गुरु शुक्राचार्य का वर्ण श्वेत है। ये इन्हीं रंगों के वस्त्र धारण करते हैं। चार भुजाओं में दंड, रुद्राक्ष की माला, कमंडलु और वरमुद्रा है।
  • शनि : शनैश्चर की शरीर कांति इंद्रनीलमणि के समान है। ये गीध पर सवार रहते हैं और हाथ में धनुष, बाण, त्रिशूल और वरमुद्रा धारण किए रहते हैं।
  • राहु : राहु का मुख भयंकर है। इनके हाथों में तलवार, ढाल, त्रिशूल और वरमुद्रा शोभा पाती हैं तथा ये नील रंग के सिंहासन पर विराजित होते हैं।
  • केतु : केतु बहुतेरे हैं। उन सब की दो भुजाएं हैं। शरीर और वस्त्र धूम्रवर्ण के हैं। उनके मुख विकृत हैं। दोनों हाथों में गदा और वरमुद्रा धारण किए हैं। नित्य गीध पर सवार रहते हैं।

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English summary
The Matsya Purana is one of the eighteen major Puranas, read everythins about Navagrahas.
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