काम वासना में डुबो देती है कुंडली में मंगल-शुक्र की युति

नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में दो या दो से अधिक ग्रहों का कुंडली के किसी एक घर में एक साथ बैठना युति कहलाता है। जब तीन ग्रह साथ में हो तो यह त्रिग्रही योग, चार ग्रह साथ में हो तो चतुर्ग्रही योग और पांच ग्रह साथ में हो तो पंचग्रही योग होता है। आज हम बात करते हैं मंगल-शुक्र की युति की। ज्योतिषीय परिभाषा के अनुसार जब किसी स्त्री या पुरुष की कुंडली में मंगल और शुक्र एक साथ एक ही घर में मौजूद हों तो ऐसे जातक में काम वासना की अधिकता होती है। इन दोनों ग्रहों की स्थिति यदि अत्यंत मजबूत हो तो यह काम वासना अत्यधिक तीव्रता वाली हो जाती है और जातक को खुद पर नियंत्रण रखना भी मुश्किल हो जाता है।

आइए जानते मंगल-शुक्र की युति के बारे में और अधिक...

मंगल को अग्नि और तेज का प्रतीक माना गया है

मंगल को अग्नि और तेज का प्रतीक माना गया है

वैदिक ज्योतिष में मंगल को अग्नि और तेज का प्रतीक माना गया है। शरीर में रक्त पर मंगल का प्रभाव होता है। वहीं शुक्र सौंदर्य, प्रेम, वासना, काम, यौन इच्छा का प्रतिनिधि ग्रह होता है। जब इन दोनों ग्रहों का मिलन होता है तो इनके गुणधर्मों के अनुसार व्यक्ति में काम वासना बलवती हो जाती है। कुंडली के अलग-अलग भावों के अनुसार इनके फल में कम-ज्यादा हो सकता है, लेकिन मूलत: यह व्यक्ति को अत्यंत कामी बनाता है।

ये होते हैं प्रभाव

ये होते हैं प्रभाव

  • जब किसी जातक की जन्मकुंडली में मंगल और शुक्र एक साथ बैठे हों और दोनों ग्रह सामान्य अवस्था में हो तो जातक में यौन इच्छाएं तो अत्यंत प्रभावी होती हैं, लेकिन उसका उन इच्छाओं पर पूर्ण नियंत्रण होता है। यह परिस्थिति के अनुसार खुद को कंट्रोल कर सकता है।
  • यदि मंगल और शुक्र एक साथ बैठे हों और दोनों अत्यंत प्रबल अवस्था में हो, बलवान हो तो व्यक्ति की काम वासना की भावना बहुत बलवती होती है। कई बार जातक अपनी वासना को नियंत्रित नहीं कर पाता
मंगल ज्यादा प्रभावी हो और शुक्र कमजोर हो तो ...

मंगल ज्यादा प्रभावी हो और शुक्र कमजोर हो तो ...

  • यदि दोनों ग्रहों में से मंगल ज्यादा प्रभावी हो और शुक्र कमजोर हो तो जातक दुष्कर्मी भी बन सकता है, क्योंकि मंगल उसे अतिचारी बना देता है और व्यक्ति कैसे भी करके अपनी यौन इच्छा पूरी कर लेना चाहता है। ऐसी स्थिति में केवल यौन भावनाएं प्रबल होती हैं, प्रेम नहीं होता।
  • यदि दोनों ग्रहों में से शुक्र ज्यादा प्रभावी हो और मंगल कमजोर हो तो जातक संतुलित, सधा हुआ और नियंत्रित यौन व्यवहार करता है। ऐसे व्यक्ति के लिए यौन भावनाएं दूसरे स्थान पर आती हैं, जबकि यह प्रेम को अधिक बल देता है। ऐसा व्यक्ति अपने पार्टनर की इच्छाओं को समझते हुए यौन संबंध बनाता है।
मंगल-शुक्र दोनों संतुलित अवस्था में हो तो...

मंगल-शुक्र दोनों संतुलित अवस्था में हो तो...

  • जिस जातक की कुंडली में मंगल-शुक्र दोनों संतुलित अवस्था में हो तो उसके अनेक विपरीत लिंगी मित्र होते हैं और वह सबके साथ समान व्यवहार करता है।
  • पुरुष की कुंडली में यह युति है तो उसकी महिला मित्र अधिक होंगी और स्त्री की कुंडली में इस युति के होने से उसके पुरुष मित्र अधिक होते हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+