Makar Sankranti 2021: पंचग्रही योग में मनेगी मकर संक्रांति, 8 घंटे 5 मिनट रहेगा पुण्यकाल
Makar Sankranti 2021: Date, time,Shubh Muhurat, Know Worship Method and do and dont: भगवान सूर्यदेव के उत्तरायण होने का पर्व मकर संक्रांति इस बार पौष शुक्ल प्रतिपदा 14 जनवरी 2021 गुरुवार को पंचग्रही योग में आ रहा है। इसके साथ ही धनुर्मास समाप्त हो जाएगा और शुभ कार्यो पर लगा प्रतिबंध हट जाएगा, लेकिन वैवाहिक आयोजन प्रारंभ नहीं हो सकेंगे क्योंकिगुरु 18 जनवरी को अस्त हो जाएंगे।
मकर संक्रान्ति मुहूर्त
भगवान भुवन भास्कर 14 जनवरी को प्रात: 8.14 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। संक्रांति का पुण्यकाल सायं 4.19 बजे तक रहेगा। इस प्रकार कुल 8 घंटे 5 मिनट के पुण्यकाल में पवित्र नदियों में स्नान, दान, जप, तप आदि किए जा सकेंगे। इस वर्ष संक्रांति का वाहन सिंह और उपवाहन गज है। सिंह साहस, निडरता, आत्मविश्वास और बल का प्रतीक है, वहीं गज सुख-समृद्धि और स्थायित्व का प्रतीक है। इसलिए यह संक्रांति सुख-समृद्धि में वृद्धि करने के साथ साहस और आत्मविश्वास में भी वृद्धि करने वाली रहेगी।

पंचग्रही योग
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही मकर राशि में पंचग्रही योग बनेगा। मकर राशि में सूर्य, चंद्र, बुध, गुरु, शनि होने के कारण पंचग्रही योग बनेगा। इस योग का विपरीत प्रभाव प्रकृति, पर्यावरण, जीव-जंतुओं पर देखने को मिलेगा।
ऐसी होगी मकर संक्रांति
- वाहन- सिंह
- उपवाहन- गज
- गमन- पूर्व दिशा की ओर
- दृष्टि- अग्नि कोण में
- वस्त्र- श्वेत
- पात्र- स्वर्ण
- भक्षण- अन्न
- लेप- कस्तूरी
- जाति- देव
- अवस्था- बाल्य

मकर संक्रांति का प्रभाव
मकर संक्रांति के दिन श्रवण नक्षत्र है। अत: जिनका जन्मनक्षत्र श्रवण हो उनके लिए 14 जनवरी से 13 फरवरी तक की अवधि अशुभ फलदायक रहेगी। इस अवधि में वाद-विवाद होंगे, जन्मराशि या जन्म लग्न मकर वालों को मानसिक पीड़ा, अर्थ संकट रहेगा। जन्म नक्षत्र उत्तराषाढ़ा से धनिष्ठा तक हो तो यह मकर संक्रांति यात्राकारक, शतभिषा से भरणी तक हो तो सुख भोग, सौख्यता में वृद्धि, कृतिका से मार्गशीर्ष तक हो तो कष्टदायक, आद्र्रा से पूर्वाफाल्गुनी तक हो तो नए वस्त्राभूषण प्राप्त होंगे, घर में मांगलिक कार्य होंगे। उत्तराफाल्गुनी से चित्रा तक हो तो हानि तथा स्वाति से पूर्वाषाढ़ा तक जन्मनक्षत्र हो तो श्रेष्ठ, धन लाभ होने के योग बनेंगे।

क्या करें
मकर संक्रांति के पुण्यकाल में सफेद तिलमिश्रित जल में पवित्र नदी-तालाब में स्नान करें। यदि घर में ही स्नान कर रहे हैं तो जलपात्र में मिल व तीर्थजल मिलाकर तीर्थो का ध्यान करते हुए स्नान करें। शिवलिंग पर रूद्राभिषेक करते हुए जल अर्पित करें। भगवान सूर्यदेव को सूर्योदय के समय जल का अर्घ्य दें, पूजन करें। आदित्यहृदय स्तोत्र, महाभारत में वर्णित अष्टोत्तरनामात्मक सूर्य स्तोत्र, सूर्य सहस्त्रनामावली अथवा वेदोक्त सूर्य सूक्त का पाठ करें। सूर्य के बीज मंत्र ऊं घृणि सूर्याय नम: का जाप करें। सूर्य सूक्त आदि मंत्रों से हवन करें। इसके बाद नूतन पात्र, श्वेत तिल, श्वेत धान्य, चावल, धातु, सूखा अन्न, गुड़, खिचड़ी का दान करें। गायों को घास खिलाएं।
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