महाशिवरात्रि 2017: जानिए पूजा की पूरी कथा

इस बार महाशिवरात्रि 24 फरवरी को है, इस दिन चित्रभान नाम के शिकारी की कथा का प्रचलन है।

लखनऊ। एक समय की बात है। शिव-पार्वती कैलाश पर्वत पर विराजमान थे। तभी पार्वती जी ने भगवान शिव से प्रश्न किया। कोई ऐसा सरल व्रत-पूजन बताइये जिससे मृत्युलोक में विराजमान मनुष्यों के संकटों का समाधान हो सके। शिवजी ने शिवरात्रि का विधान बताकर एक कथा सुनाई-एक चित्रभान नाम का शिकारी था। वह अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए जंगली पशुओं की हत्या करता था। कभी-कभी शिकार न मिलने पर वह एक साहूकार से धन ऋण लेकर अपने परिवार का पेट भरता था। ऋण न चुका पाने पर एक दिन साहूकार ने शिकारी को एक शिव मन्दिर में बन्दी बना लिया। संयोगवश उस दिन चतुर्दशी तिथि के कारण शिवरात्रि थी। शिकारी चित्रभान ने शिव से सम्बन्धति धार्मिक बातें व कथा भी सुनी।

महाशिवरात्रि 2017: जानिए पूजा की पूरी कथा

ऋण अदा करने की बात कही

प्रातःकाल साहूकार ने शिकारी को अपने पास बुलाकर ऋण अदा करने की बात कही तो शिकारी ने ऋण आदा करने के लिए दो दिन का वक्त का मॉगा। साहूकार ने दो दिन का वक्त देकर शिकार को छोड़ दिया। बॅधन से छूटने के बाद शिकारी जंगल की ओर चल पड़ा। लेकिन दिनभर बंदी रहने के कारण वह भूख-प्यास से व्याकुल था। शिकार करने के लिए वह एक तालाब के किनारे बेल-वृक्ष पर बैठने का प्रयास करने लगा। बेल-वृक्ष के नीचे एक शिवलिंग छिपी थी। वृक्ष पर बैठने का स्थान बनाते समय कई टहनिया तोड़ी जो शिवलिंग पर गिर गई। जिस कारण शिकारी का व्रत भी पूर्ण हो गया। रात्रि का एक पहर बीत जाने के बाद एक गर्भवती मुगी तालाब पर पानी पीने आयी।

यदि तुम मुझे मारते हो तो दो जीवों की हत्या एक साथ होगी

शिकारी ने ज्यों ही धनुष पर तीर चढ़ाया त्यों ही मृगी बोली। मैं गर्भिणी हूं और यदि तुम मुझे मारते हो तो दो जीवों की हत्या एक साथ होगी। मैं बच्चे को जन्म को देकर शीघ्र ही तुम्हारे समझ प्रस्तुत हो जाउंगी। शिकारी ने दया भाववश मृगी को छोड़ दिया। कुछ समय व्यतीत के होने बाद दूसरी मृगी तालाब पर आयी। जैसे ही शिकारी ने धनुष बाण सम्भाला वैसे ही मृगी ने विनम्र निवेदन के साथ कहा हे शिकारी मैं थोड़ी देर पहले ऋतु से निवृत हुई हॅू। कामातुर विरहिणी हॅू। अपने प्रिय की खोज में भटक रही हॅू। अपने पति से मिलने के पश्चात मैं शीघ्र ही तुम्हारे पास आउंगी। शिकारी ने फिर से इस मृगी को जीवनदान दे दिया। दो बार शिकार छोड़ देने के कारण शिकारी काफी चिन्तित था।

शिकारी ने उत्तर दिया मेरे बच्चे भी भूख-प्यास से तड़प रहे होंगे

अब रात्रि का अन्तिम पहर था। तभी एक मृगी अपने बच्चों के साथ आती हुई दिखाई पड़ी। शिकारी ने मन में ठान लिया इस बार आये हुये अवसर को नहीं छोड़ूगा। शिकारी अपने धनुष से तीर छोडने वाला ही था तभी मृगी ने कहा मुझे जाने दो इन बच्चों को इनके पिता के पास पहुंचाना है। शिकारी ने उत्तर दिया मेरे बच्चे भी भूख-प्यास से तड़प रहे होंगे। मृगी ने कहा जैसे तुम्हें अपने बच्चो की ममता सता रही है वैसे मुझे भी। इसलिए सिर्फ बच्चों के नाम पर थोड़ी देर के लिए जीवनदान मॉग रही हूं। मेरा विश्वास करो, मैं इन्हें इनके पिता के पास छोड़कर तुरन्त लौट आउंगी।

मृगी का दीन स्वर

मृगी का दीन स्वर सुनकर शिकारी ने उसे जाने दिया। शिकार के अभाव में बेल-वृक्ष पर बैठा शिकारी बेलपत्र तोड़-तोडकर नीचे फेंकता जा रहा था। सुर्योदय होने वाला ही था कि एक हष्ट-पुष्ट मृग उसी रास्ते से गुजरा। शिकारी ने सोंचा इसे नहीं छोड़गा। शिकारी की तनी प्रत्यंचा को देखकर मृग विनीत स्वर में बोला। हे शिकारी भाई, यदि तुमने मुझसे पूर्व आने वाली तीन मृगियों तथा छोटे बच्चों को मार डाला है, तो मुझे भी मारने में विलम्ब न करो ताकि उनके वियोग में मुझे मरने का एक क्षण भी दुःख न हो। मैं उन मृगियों का पति हूं। यदि तुमने उन्हें छोड़ दिया है तो कुछ क्षण के लिए मुझे भी जीवन दो ताकि मैं उनसे मिलकर आपके समझ प्रस्तुत हो सकूं।

रात्रि जागरण से शिकारी का हिंसक ह्रदय निर्मल हो गया

मृग की बात सुनते ही शिकारी के सामने पूरी रात्रि का घटनाचक्र घूम गया, उसने सारी कहानी मृग को सुना दी। तब मुग ने कहा मेरी तीनों पत्नियॉ जिस प्रकार प्रतिज्ञाबद्ध होकर गई है, मेरी मृत्यु होने से अपने धर्म का पालन नहीं कर पायेगी। मैं उन सबसे मिलकर शीघ्र ही आपके समझ प्रस्तुत हो जाउंगा। शिवरात्रि व्रत, शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने व रात्रि जागरण से शिकारी का हिंसक ह्रदय निर्मल हो गया था। उसके हाथ से धनुष बाण सहज छूट गये थे। भगवान शिव की कुपा से शिकारी की आत्मा करूणा भावों से भर गई थी।

मृग सपरिवार के साथ शिकारी के सामने आ गया

कुछ समय पश्चात वह मृग सपरिवार के साथ शिकारी के सामने आ गया, ताकि वह उनका शिकार कर सके। लेकिन जंगली पशुओं की ऐसी वचनबद्धता, सत्यता व कर्तव्यता देखकर शिकारी को बहुत आत्मग्लानि हुई। शिकारी ने अपने हिंसक व कठोर ह्रदय को जीव हिंसा से सदा के लिए हटाकर धार्मिकता व सेवा के मार्ग पर अग्रसर हो गया। इस घटना से प्रफुल्लित होकर भगवान शिव ने शिकारी तथा मृग के परिवार को मोक्ष प्राप्त का आशीर्वाद दिया। Must Read: महाशिवरात्रि 2017: भोलेशंकर और मां पार्वती की शादी का दिन...

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+