Kundali: क्या होता है सात संख्या योग?
नई दिल्ली, 14 जुलाई। वैदिक ज्योतिष में अनेक योगों का वर्णन मिलता है, इनमें सात संख्या योग काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। दरअसल यह योग सात प्रकार से बनता है और सभी का अलग-अलग नाम होता है लेकिन समग्र रूप से इसे सात संख्या योग कहा जाता है।

लघुजातकम के अनुसार किसी मनुष्य की जन्मकुंडली में सभी ग्रह एक ही राशि में बैठे हों तो गोल योग, दो राशि में सभी ग्रह हों तो युग योग, तीन राशियों में सभी सभी ग्रह हों तो शूल योग, चार राशियों में सभी ग्रह हों तो केदार योग, पांच राशियों में सभी ग्रह हों तो पाश योग, छह राशियों में सभी ग्रह हों तो दाम योग और सात राशियों में सभी ग्रह बैठे हों तो वीणा योग होता है।
क्या है इन योगों का फल
- गोल योग में जन्मा जातक दुखी
- युग योग में जन्मा जातक दरिद्र
- शूल योग में जन्मा जातक घातक
- केदार योग में जन्मा जातक कृषक
- पाश योग में जन्मा जातक दुष्ट स्वभाव वाला
- दाम योग में जन्मा जातक पशु पालन करने वाला
- वीणा योग में जन्मा जातक प्रत्येक कार्य में निपुण होता है।
इस प्रकार इन संख्या योग में जन्मा जातक दूसरे के भाग्य से जीते हैं। इनके भाग्य पर दूसरों के भाग्य का गहरा प्रभाव रहता है और उसी के अनुसार इनके जीवन में सुख-दुख का आगमन प्रस्थान होता है।












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