Kundali: कुंडली में सूर्य खराब है तो नमक कम, मीठा ज्यादा खाएं
नई दिल्ली। सूर्य केवल ग्रहों का राजा ही नहीं है, बल्कि यह अगर प्रसन्न हो जाए तो व्यक्ति का जीवन राजा के समान बना भी सकता है और यदि सूर्य किसी व्यक्ति की कुंडली में खराब हो तो व्यक्ति को दर-दर भटकने के लिए मजबूर भी कर सकता है। जन्म कुंडली में सूर्य आत्मा और पिता का प्रतिनिधित्व करता है। सूर्य से ही सभी अन्य ग्रहों को रोशनी मिलती है और सूर्य के ग्रहों की दूरी या नजदीकी उन्हें अस्त भी कर देती है। कुंडली में सूर्य को पूर्वजों का प्रतिनिधि ग्रह भी माना गया है। यदि सूर्य पर एक या अधिक बुरे ग्रहों की दृष्टि हो तो उस कुंडली में पितृ दोष का निर्माण होता है। व्यक्ति की आजीविका में सूर्य सरकारी पद, नौकरी का कारक ग्रह है। सूर्य प्रधान व्यक्ति कार्यक्षेत्र में अनुशासित रहता है, उच्च पद पर आसीन अधिकारी बनता है।

सूर्य कब होता है अशुभ
- बारह राशियों में सूर्य मेष, सिंह तथा धनु में विशेष बलवान होता है तथा मेष में उच्च का होता है। सिंह इसकी अपनी राशि होती है। मित्र ग्रह चंद्र, मंगल और गुरु हैं। सूर्य के शत्रु ग्रह शुक्र, शनि, राहु और केतु होते हैं।
- सूर्य पर जब इसके शत्रु ग्रहों की दृष्टि होती है या इनमें से कोई शत्रु ग्रह सूर्य के साथ हो। व्यक्ति के जीवन में अशुभ सूर्य की महादशा चल रही हो तो भारी परेशानियां आती है। कुंडली के अलग-अलग भावों में सूर्य के अशुभ होने के अलग-अलग परिणाम होते हैं।
- प्रथम भाव में अशुभ सूर्य है तो जातक के बचपन में ही उसके पिता की मृत्यु हो जाती है। स्वयं उस व्यक्ति की संतानें भी जल्द ही मृत्यु की शिकार हो जाती है।
- दूसरे भाव का अशुभ सूर्य व्यक्ति को लालची बनाता है। लालच के चलते यह अपनों से ही धोखेबाजी करता है।
- तीसरे भाव में अशुभ सूर्य हो तो व्यक्ति के घर में बार-बार चोरी, डकैती होती है।
- चतुर्थ भाव में अशुभ सूर्य हो तो व्यक्ति नेत्र रोग का शिकार होता है। उसकी किस्मत भी साथ नहीं देती।
- पंचम भाव का अशुभ सूर्य व्यक्ति के जीवनसाथी के लिए कष्टप्रद होता है।
- - छठे भाव में अशुभ सूर्य हो तो व्यक्ति को संतान सुख नहीं मिलता। संतान उसकी बात नहीं मानती और उनके कारण अपमान झेलना पड़ता है।
- सातवें भाव में अशुभ सूर्य हो तो व्यक्ति तो त्वचा संबंधी रोग होते हैं।
- आठवें भाव का अशुभ सूर्य व्यक्ति को रोगी बनाता है।
- नवम भाव का अशुभ सूर्य हो तो व्यक्ति की प्रतिष्ठा मिट्टी में मिल जाती है।
- दसवें भाव में अशुभ सूर्य होने पर व्यक्ति अल्पायु होता है। सरकारी नौकरी से उसे हटाया जाता है।
- 11वें भाव का अशुभ सूर्य हो और उस पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो तो व्यक्ति की आयु कम होती है।
- 12वें भाव में अशुभ सूर्य हो तो व्यक्ति को वाहन, मशीनरी से घात होती है।
- मानसिक रूप से हमेशा विचलित रहता है।
- यदि कुंडली में सूर्य अशुभ फल दे रहा हो तो सबसे पहले व्यक्ति को नमक का सेवन कम कर देना चाहिए। इसका अर्थ यह हुआ कि भोजन, सब्जी, दाल वगैरह में ऊपर से नमक डालकर नहीं खाना चाहिए। साथ ही प्रत्येक रविवार को बिना नमक का भोजन करें। ऐसे व्यक्ति को मीठा अधिक खाना चाहिए।
- पहले भाव के अशुभ सूर्य के लिए पति या पत्नी में से को एक गुड़ खाना बंद कर दे।
- दूसरे भाव के अशुभ सूर्य के लिए किसी धार्मिक स्थान पर नारियल का तेल, सरसों का तेल और बादाम दान करें।
- तीसरे भाव के अशुभ सूर्य के लिए मां की सेवा करें।
- चतुर्थ भाव के अशुभ सूर्य के लिए रविवार के दिन जरूरतमंद और नेत्रहीन लोगों को दान दें, भोजन करवाएं।
- पंचम भाव के अशुभ सूर्य के लिए लगातार 43 दिनों तक सरसों के तेल की कुछ बूंदें जमीन पर गिराएं।
- छठे भाव के अशुभ सूर्य के लिए अपने घर में हमेशा गंगाजल रखें। बंदरों को गुड़-चना खिलाएं।
- सातवें भाव के अशुभ सूर्य के लिए नमक कम खाएं। किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले मीठा खाएं।
- आठवें भाव के अशुभ सूर्य के लिए संभव हो तो किसी जलती चिता में तांबे का सिक्का डालें और नदी में गुड़ बहाएं।
- नवें भाव के अशुभ सूर्य के लिए उपहार में चांदी की वस्तुएं न लें। पैतृक बर्तन न बेचें।
- दसवें भाव के अशुभ सूर्य के लिए काले और नीले कपड़े पहनने से बचें।
- 11वें भाव के अशुभ सूर्य के लिए रात को सोते समय सिरहाने बादाम रखें। सुबह उन्हें किसी मंदिर में दान दें।
- 12वें भाव के अशुभ सूर्य के लिए धार्मिक कार्य करते रहें। घर में चक्की रखें।

पंचम भाव का अशुभ सूर्य

व्यक्ति अल्पायु होता













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