Kundli: स्त्री के चरित्र का राज खोल देती है जन्म कुंडली

नई दिल्ली, 01 सितंबर। किसी स्त्री या पुरुष का चरित्र कैसा है यह उसकी जन्मकुंडली देखकर पता लगाया जा सकता है। हम अभी यहां केवल स्त्री की जन्मकुंडली की बात करते हैं। किसी स्त्री की जन्मकुंडली में वे कौन सी ग्रह स्थितियां होती हैं जिनके कारण उसका चरित्र अच्छा या बुरा बनता है। वस्तुत: लग्न एवं चंद्र से स्त्री के शरीर का, सप्तम एवं अष्टम भाव से उसके सौभाग्य और संतान आदि का पता लगाया जा सकता है।

Kundli: स्त्री के चरित्र का राज खोल देती है जन्म कुंडली

आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ ग्रह योग...

  • स्त्री की कुंडली में लग्न एवं चंद्र सम राशि में हो तो स्त्री स्वभाव युक्त होती है। अर्थात् उसमें लज्जा, नग्रता, कोमलता आदि गुण पाए जाते हैं।
  • सातवें भाव में शुभ एवं पापी दोनों प्रकार के ग्रह हों तो स्त्री एक से अधिक विवाह करती है।
  • सातवें भाव में निर्बल पापी ग्रह बैठा हो और उसे शुभ ग्रह देख रहा हो तो किसी कारणवश पति उसे त्याग देता है।
  • स्त्री की कुंडली के आठवें भाव में राहु हो तो स्त्री कुल धर्म का नाश करने वाली होती है।
  • सप्तम भाव में मंगल या शनि की राशि या मंगल या शनि के नवांश में हो तो उसकी योनि में रोग होता है।
  • यदि लग्न चंद्र, शुक्र, मंगल या शनि की राशि और नवांश में हो तो स्त्री व्याभिचारिणी होती है।
  • पंचम में मंगल हो तो स्त्री में चंचलता, निर्लज्जता अधिक होती है।
  • शुक्र मंगल के नवांश में और मंगल शुक्र के नवांश में हो तो व्याभिचारिणी होती है।
  • मेष, वृश्चिक, मकर या कुंभ लग्न हो तथा लग्न में चंद्र व शुक्र दोनों हों तथा लग्न पर पाप ग्रह की दृष्टि हो तो परपुरुषगामिनी होती है।

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