Inspirational Story: प्राण लेना आसान है लेकिन बचाना मुश्किल
नई दिल्ली। भगवान बुद्ध की समस्त शिक्षाओं का मूल एक ही है, अहिंसा। वास्तव में बौद्ध धर्म का मूल सिद्धांत ही अहिंसा आधारित है। यहां अहिंसा केवल मानव जगत तक ही सीमित नहीं है। बौद्ध धर्म में अहिंसा का अर्थ हर उस अस्तित्व का सम्मान करना है, जिसमें प्राण स्पंदित हों। इसका अर्थ है कि बौद्ध धर्म मनुष्यों के साथ ही हर जीव जंतु यहां तक कि पेड़ पौधों में भी एकात्म प्राण की अनुभूति करता है।

आज इसी संदर्भ में भगवान बुद्ध के जीवन की एक घटना का स्मरण करते हैं-
एक बार की बात है। भगवान बुद्ध देशाटन पर अकेले जा रहे थे। राह में एक जंगल मिला। जंगल इतना गहन था कि लोग दिन में भी अकेले वहां जाने से बचते थे। भगवान को मृत्यु का भय नहीं था, वास्तव में उनमें किसी भी अंश में भय का भाव ही नहीं था। इसीलिए वे निसंकोच जंगल में चले गए। वहां तथागत का सामना एक डाकू से हुआ। डाकू ने उनसे कहा, मेरे नाम से लोग थर्राते हैं। तुम कौन हो, जो सीधे मेरे इलाके में चले आ रहे हो? भगवान ने मधुर स्वर में कहा- पुत्र ! लोग तुमसे क्यों डरते हैं? डाकू ने कहा- मैं सबसे अधिक शक्तिशाली हूँ। मैं किसी को भी मार सकता हूँ। ऐसा कोई काम नहीं है, जो मैं ना कर सकूं। बुद्ध ने कहा- तब तो तुम मेरी एक सहायता अवश्य कर सकते हो। तुम सामने वाले पेड़ से मेरे लिए 5 पत्तियां तोड़ कर ला सकते हो क्या? डाकू तुरंत ही पेड़ से पत्तियां तोड़ कर ले आया और तथागत को सौंप दीं।
बुद्ध की बात सुनकर डाकू गुस्सा हो गया
तथागत ने कहा- पुत्र! अब एक काम और कर दो। इन पत्तियों को वापस पेड़ में जोड़ दो। बुद्ध की बात सुनकर डाकू गुस्सा हो गया और चिल्लाकर बोला- सन्यासी! ये तुम कैसी बात करते हो? टूटी हुई पत्तियां भी कभी जोड़ी जा सकती हैं? भगवान ने शांत भाव से कहा- जिसे तुम जोड़ नहीं सकते, उसे तोड़ने का तुम्हें क्या अधिकार है? जिसे तुम जीवन नहीं दे सकते, उसे मारने का तुम्हें क्या अधिकार है? याद रखो, ये जीवन उस परमात्मा ने दिया है और वही इसे वापस ले सकते हैं। संसार मे किसी भी अन्य व्यक्ति को यह अधिकार नहीं है। तथागत की बात सुनकर डाकू सकते में आ गया। कुछ पल वह विचार करता रहा और अंततः भगवान के चरणों मे गिर पड़ा। उसी पल से उसने सारे बुरे काम छोड़ दिए और संघ की शरण में चला गया।
शिक्षा
दोस्तों, किसी को कष्ट देना वाकई बहुत आसान होता है, पर किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना उतना ही मुश्किल। किसी के प्राण लेना बहुत आसान है, किन्तु किसी को बचाना उतना ही मुश्किल। लेकिन जब कोई किसी अन्य की रक्षा करता है, तो वह भगवान का काम करता है और भगवान उसकी रक्षा स्वयं करते हैं।












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