Haridra Mala: विवाह में आ रही बाधाएं दूर करती हैं हरिद्रा माला

Haridra Mala: हिंदू पूजा पद्धति में हल्दी एक अत्यंत पवित्र, शुभ और महत्वपूर्ण पूजन सामग्री के तौर पर प्रयोग की जाती है। वास्तव में हमारी पूजा में प्रयोग की जाने वाली प्रत्येक वस्तु का अपना महत्व और लाभ होता है। हल्दी का उपयोग प्रारंभ से ही शुभ कार्य में होता आया है और इसे सौभाग्य का सूचक माना जाता है। यह जीवन में आने वाली अनेक प्रकार की समस्याओं से मुक्ति भी दिलाती है। ज्योतिष और तंत्र शास्त्र में इसके महत्व को स्वीकार किया गया है। हल्दी की गांठ के अनेक प्रयोग इन शास्त्रों में मिलते हैं जिनके माध्यम से धन, संपत्ति, सुख, वैभव, वैवाहिक सुख प्राप्त किया जा सकता है।

पीली वस्तुओं का दान करने की सलाह दी जाती है

पीली वस्तुओं का दान करने की सलाह दी जाती है

वैसे तो हल्दी के अनेक प्रयोग हैं लेकिन हम यहां केवल विवाह कार्य में आ रही बाधाएं दूर करने में इसके चमत्कारिक प्रभाव की बात करेंगे। ज्योतिष शास्त्र में हल्दी का संबंध बृहस्पति से बताया गया है। बृहस्पति की शुभ स्थिति में ही विवाह सुख प्राप्त होता है और यदि जन्मकुंडली में बृहस्पति अशुभ है तो विवाह सुख में बाधा आती है। इसलिए गुरुवार के व्रत, गुरुवार को पीले रंग के वस्त्र पहनने और पीली वस्तुओं का दान करने की सलाह दी जाती है, बृहस्पति से संबंधित दोष दूर करने के लिए हल्दी की गांठ से बनी माला का मुख्य रूप से प्रयोग किया जाता है।

आइए जानते हैं इसका प्रयोग कैसे और किन परेशानियों में किया जाता है...

लक्ष्मीनारायण का पूजन करके हरिद्रा माला को धारण करें

लक्ष्मीनारायण का पूजन करके हरिद्रा माला को धारण करें

  • हरिद्रा माला का सबसे बड़ा और कारगर प्रयोग वैवाहिक कार्यो में आ रही बाधा दूर करना है। जिन युवक-युवतियों का विवाह नहीं हो रहा है, हर बार बात पक्की होते-होते अटक जाती हो उन्हें हरिद्रा माला धारण करना चाहिए। गुरुवार के दिन भगवान लक्ष्मीनारायण का पूजन करके हरिद्रा माला को धारण करें। इसके बाद प्रत्येक गुरुवार को पूजन करते रहें और गुरुवार का व्रत करें। इससे सौभाग्य की प्राप्ति होती है। शीघ्र विवाह का मार्ग खुलता है।
  • बृहस्पति भाग्य को मजबूत बनाने में सहायता करते हैं। जिनका भाग्य कमजोर है, परेशानियां पीछा नहीं छोड़ती, बहुत मेहनत करने के बाद भी लाभ नहीं मिलता वे जातक लगातार एक वर्ष तक आने वाले प्रत्येक बुधवार के दिन भगवान श्रीगणेश जी को हरिद्रा माला पहनाएं। माला में हल्दी की 27 गांठ होना आवश्यक है, जो 27 नक्षत्रों की प्रती होती हैं।
  • हरिद्रा माला गले में धारण करने से आयु और आरोग्य में वृद्धि होती है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करती है साथ ही श्वसन संबंधी रोग दूर होते हैं। वर्तमान में चल रहे कोरोना वायरस के प्रभाव से भी यह रक्षा करने में मदद करती है। पीलिया के रोगी इसे धारण करे तो रोग शीघ्र ठीक होता है। यह धारण करने वाले व्यक्ति के आसपास एक सुरक्षित घेरा बनाती है जिससे रोग फैलाने वाले कीटाणु पास नहीं आ पाते।
पीपल के पेड़ की शाखा पर एक हरिद्रा माला अपित करें

पीपल के पेड़ की शाखा पर एक हरिद्रा माला अपित करें

  • कर्ज मुक्ति करवाने और धन की आवक बढ़ाने में हरिद्रा माला का प्रयोग किया जाता है। इसके लिए अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की जड़ में जल में कच्चा दूध और बताशा डालकर अर्पित करें। पीपल के पेड़ की शाखा पर एक हरिद्रा माला अपित करें और भगवान लक्ष्मीनारायण से धन प्राप्ति की प्रार्थना करें। तीन माह में समस्या दूर होगी।
  • मस्तिष्क को शांत रखने में मददगार होती है हरिद्रा माला। यदि आपका मन शांत नहीं है। कोई निर्णय लेने में कठिनाई आती है। मन भटकता है, विचलित होता है तो हरिद्रा माला सोमवार के दिन धारण करें।
  • भगवान विष्णु को 27 गांठ वाली हरिद्रा माला अर्पित करने से धन, सुख, वैभव प्राप्त होता है।
  • जिन लोगों की जन्मकुंडली में गुरु कमजोर है, बुरे ग्रहों के प्रभाव में है, नीच स्थान में बैठा है उन्हें हरिद्रा माला गुरुवार के दिन पहनना चाहिए।
  • शत्रुओं को परास्त करने में भी हरिद्रा माला का प्रयोग किया जाता है। हरिद्रा माला मां बगलामुखी के मंत्रों से सिद्ध करके गले में धारण करने से जीवन में कभी शत्रु भय नहीं रहता।
  • नवग्रहों की पीड़ा दूर करने के लिए हरिद्रा माला को रविवार के दिन कच्चे दूध में डुबोकर नवग्रह यंत्र पर अर्पित करें। नवग्रह के मंत्रों का जाप करें। इससे पीड़ा दूर होती है।

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