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Ganesh Chaturthi 2019: जानिए गणेश पूजा और मुहूर्त का समय

By Pt. Gajendra Sharma
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नई दिल्ली। प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश की स्थापना का दिन भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी 2 सितंबर 2019, सोमवार को आ रही है। इस दिन से चतुर्दशी यानी 12 सितंबर तक 10 दिन के लिए लगभग प्रत्येक हिंदू परिवारों में धूमधाम से गणेणजी की पार्थिव मूर्ति को स्थापित किया जाता है और 10 दिनों तक पूर्ण भक्ति भाव से उनकी आराधना की जाती है। रिद्धि सिद्धि के दाता भगवान श्री गणेश के मंदिरों में भी इन 10 दिनों में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। 2 सितंबर को प्रातः 8.35 बजे से रवियोग भी प्रारंभ हो जाएगा, जो स्थापना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

चौघडि़या के अनुसार स्थापना के मुहूर्त

चौघडि़या के अनुसार स्थापना के मुहूर्त

  • अमृत: प्रातः 6.10 से 7.44 बजे तक
  • शुभ: प्रातः 9.18 से 10.52 बजे तक
  • लाभ: दोप. 3.34 से सायं 5.08 बजे तक
  • अमृत: सायं 5.08 से 6.42 बजे तक
  • चर: सायं 6.42 से रात्रि 8.08 बजे तक
  • लग्न के अनुसार स्थापना के मुहूर्त

गणेश जन्म की कथा

गणेश जन्म की कथा

पुराणों में भगवान गणेश के जन्म की अनेक कथाएं प्रचलित हैं, लेकिन जो कथा सर्वाधिक प्रचलित और प्रामाणिक मानी जाती है वो यहां प्रस्तुत है। कथा के अनुसार एक बार माता पार्वती स्नान करने चलीं। स्नान से पहले उन्होंने अपने शरीर के उबटन से एक पुतला बनाया और उसका नाम गणेश रखा। अपने इस पुत्र को मुद्गल देकर, द्वार पर पहरा देने का काम देते हुए उन्होंने कहा कि जब तक मैं स्नान करूं, तुम किसी भी पुरुष को अंदर मत आने देना। इतना कहकर पार्वती जी स्नान करने चली गईं और गणेश द्वार पर पहरा देने लगे।

भगवान शिव आए और पार्वती के कक्ष में जाने लगे

इसी बीच भगवान शिव आए और पार्वती के कक्ष में जाने लगे। द्वार पर बैठे इस नन्हें बालक ने उन्हें भीतर जाने से रोका। शिवजी ने उसका परिचय मांगा तो उसने स्वयं को पार्वती का पुत्र बताया। इस बात को असत्य जान शिवजी क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने त्रिशूल से गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया। ऐसे अनिष्ट से अनभिज्ञ पार्वती ने शिवजी को क्रोधित देखकर कारण पूछा तो शिवजी ने कहा एक बालक मुझे भीतर जाने से रोक रहा था तो मैंने उसका सर धड़ से अलग कर उसे उचित दंड दे दिया है।

माता पार्वती सन्न रह गईं

शिव जी की बात सुन माता पार्वती सन्न रह गईं। उन्होंने कहा कि वह मेरा पुत्र था जिसे मैंने अभी-अभी अपने शरीर के उबटन से बनाया था और द्वार पर पहरा देने का आदेश दिया था। आपने मेरे पुत्र को मार डाला। शोकाकुल होकर वे विलाप करने लगीं और शिवजी से प्रार्थना करने लगीं कि उनके पुत्र को किसी भी तरह जीवित करें। शिवजी ने अपने गणों से कहा कि जो भी जीव अभी तुरंत ही जन्मा हो और मार्ग में जो सबसे पहले मिले उसका सिर काट लाओ। गणों को एक हाथी का नवजात शिशु मिला और वे उसका सिर काट लाए। शिवजी ने उस सिर को गणेश के धड़ से जोड़ कर उन्हें फिर से जीवित कर दिया। अपने पुत्र को वापस पाकर पार्वती अत्यंत प्रसन्न हुईं। यह घटना भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को हुई थी, इसीलिए इसका नाम गणेश चतुर्थी पड़ गया।

 पूजा विधि

पूजा विधि

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होना चाहिए। इसके बाद मिट्टी के गणपति बनाकर विधि विधान के अनुसार शुभ मुहूर्त में उनकी स्थापना करनी चाहिए। गणपति जी को मोदक अत्यंत प्रिय हैं अतः पूजा के समय 21 मोदकों का भोग लगाया जाना चाहिए। इसी तरह गणेश जी को दूर्वा भी बहुत पसंद है अतः पूजा में हरी दूर्वा अवश्य रखना चाहिए। पूजा करते समय हरी दूर्वा के 21 अंकुर ले, गणेश जी के निम्न द्वादश नामों का उच्चारण करते हुए उन्हें दुर्वांकुर अर्पित करें। ये द्वादश नाम हैं वक्रतुंड, एकदंत, कर्णपिंगाक्ष, गजवक्त्र, लंबोदर, विकटमेव, विघ्नराजेंद्र, धूम्रवर्ण, भालचंद्र, विनायक, गणपति, गजानन। पूजा के बाद 10 मोदक ब्राह्मणों को दान दें और 11 स्वयं परिवार सहित ग्रहण करें। इस प्रकार विधि विधान से पूरे 10 दिन तक गणपति जी की पूजा के साथ उनके जन्म का उत्सव मनाया जाता है। ऐसा करने वाले भक्तों पर विघ्नहर्ता की पूर्ण कृपा बरसती है।

यह पढ़ें: Ganesh Chaturthi 2019: इस बार घर पर बनाएं इको फ्रेंडली गणेश

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English summary
Celebrate Ganesh Chaturthi on 2nd September 2019, here is Ganesh Chaturthi 2019 date and puja time and Muhurat.
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