ज्योतिष विज्ञान बता रहा कब होगी मूसलाधार बारिश, जानिए 2015 का हाल
हर साल की तरह इस साल भी मौसम वैज्ञानिकों ने मॉनसून की भविष्यवाणी करते हुए कहा कि बारिश औसत से 15 प्रतिशत कम होगी। यह अनुमान सेटेलाइट से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर लगाया गया। लेकिन क्या आप जातने हैं कि ग्रहों का असर भी बारिश पर होता है? जी हां ग्रह-नक्षत्र भी तय करते हैं कि मॉनसून के दौरान कितनी बारिश होगी। इन सबके पीछे कार्य करता है नवतपा काल।
क्या होता है नवपता काल
इस वर्ष नवतपा काल 25 मई, 2015 से आरम्भ हुआ। नवतपा को ज्येष्ठ महीने के ग्रीष्म ऋतु में तपन की अधिकता का ध्योतक माना जाता है। शुक्ल पक्ष में आर्द्रा नक्षत्र से लेकर 9 नक्षत्रों में 9 दिनों तक नवतपा रहता है। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष, बुधवार के दिन ही आर्द्रा नक्षत्र शुरू हो रहा है। जरूरी नहीं कि नवतपा में अधिक गर्मी पड़े। आर्द्रा के 10 नक्षत्रों तक जिस नक्षत्र में सबसे अधिक गर्मी पड़ती है, आगे चलकर उस नक्षत्र में 15 दिनों तक सूर्य रहते हैं और अच्छी वर्षा होती है।

ज्योतिष विद्या से लगाये गये ये पूर्वानुमान
ग्रहों की स्थिति को देखते हुए देश के पूर्व, पश्चिम व दक्षिण में मॉनसून के दौरान प्राकृतिक आपदा का योग बन रहे हैं।

किसानों तथा व्यापारी वर्ग को लाभ
भारत में प्राकृतिक रूप से भरपूर बारिश होगी। किसानो तथा व्यापारी वर्ग को फसलों का बंपर उत्पादन लाभदायक रहेगा।

अनाज सस्ता होने की संभावना
बारिश के फलस्वरूप नजर डालें तो अनाज सस्ता होने की संभावना।

भारी बारिश
22 अगस्त से 14 सितम्बर के बीच गुरु-शुक्र का एक साथ आयेंगे, इसलिये भारी बारिश होगी।

मानसून सम्पूर्ण भारतवर्ष में प्रभावी
इस वर्ष लगभग 25 जून, 2015 के पूर्व ही मानसून सम्पूर्ण भारतवर्ष में प्रभावी हो जाएगा। 30 मई,2015 से 08 जून,2015 के बीच दक्षिण भारत में मानसून सक्रीय रहेगा। 17 जून,2015 से 22 जुन,2015 के मध्य उत्तर भारत में मानसून सक्रीय रहेगा। 22 जुन,2015 से 03 जुलाई,2015 के मध्य पश्चिमी मानसून सक्रीय रहेगा।
जब से रोहिणी नक्षत्र शुरू होगा तब से नवतपा भी शुरू हो जाएगा।नवतपा में तेज हवा के साथ बवंडर और वर्षा का अंदेशा है। नवतपा समय की ग्रह स्थिति तेज हवा, बवंडर और वर्षा का संकेत दे रहा है। इस बार नवतपा का प्रारंभ 25 मई को शुरू हुआ और 2 जून को समाप्त हो गया।
आगामी 14 जुलाई, 2015 (मंगलवार) को गृहस्पतिका सिंह राशि में प्रवेश स्वतंत्र भारत की कुंडली के अनुसार चौथे भाव (सुख भाव) में होगा। 16 जुलाई, 2015 (गुरुवार) की अर्धरात्रि के पश्चात बनाने वाला गुरु अमृत पुष्य योग उत्तम वर्षा के योग बना रहा है। वहीं सप्तमभाव में वृश्चिक राशि में 02 अगस्त,2015 को शनि देव मार्गी होंगे। इसी समय इन सभी ग्रहीय प्रभावों के कारण भारत धीरे धीरे विश्व गुरु बनाने की और अग्रसर होता रहेगा।
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