14 जुलाई को सिंह में प्रवेश करेगा बृहस्पति, जानिए भारत पर प्रभाव
[पं. अनुज के शुक्ल] विक्रम संवत् 2072 में अषाढ़ कृष्ण पक्ष दिनांक 14 जुलाई 2015 को, मिथुनगत चन्द्रमा के समय बृहस्पति ग्रह मधा नक्षत्र के अधीन सुबह 6:26 बजे सिंह राशि में में गोचर करना प्रारम्भ करेगा, जो 11 अगस्त 2016 तक इसी राशि में ही गोचर करता रहेगा। आइये जानते हैं इस परिवर्तन से भारत देश और आपकी लाइफ पर क्या प्रभाव पड़ सकते हैं।
देवों के देव बृहस्पति धर्म के प्रवर्तक हैं। बृहस्पति यानी गुरु- शिक्षा, धर्म, ज्ञान, सेवा, सहानुभूति, सहयोग, संस्कार व सद्बुद्धि को बढ़ावा देते हैं। बृहस्पति की गति 8 मील प्रति सेकण्ड है। यह अपनी धुरी पर प्रायः 10 घंटों में धूमता है अथवा 12 वर्ष में एक प्रदिक्षणा पूरी कर लेता है। गुरु एक राशि में एक वर्ष तक भ्रमण करता है और उसका अगला पड़ाव सिंह राशि है।
भारत पर पड़ने वाले प्रभाव
जब गुरु सिंह राशि में संक्रमण करता है तो देव, ब्रहाण अर्थात धर्म-निष्ठ व सज्जन व्यक्तियों का मान-सम्मान बढ़ता है। ऐसे में भारत देश पर निम्न प्रभाव पड़ने की संभावना है-
- पीतल, तांबा, चांदी, चावल, गेंहू व तेल इत्यादि चीजें मंहगी होंगी।
- विषधारी जीव एंव रोगुणओं मलेरिया-डेंगू आदि बीमारियों का प्रकोप।
- दक्षिण को रिया में फैले मर्स से भारत को भी सावधान रहना होगा।
- जुलाई, अगस्त और सितम्बर के मध्य तक अच्छी वर्षा होने की संभावना है।
- शासकों को क्लेश, मन्त्रियों को शारीरिक कष्ट झेलना पड़ सकता है।
- देश के किसी भी भाग में नई प्रकार का शुभारंभ हो सकता है।
- पूर्वोत्तर राज्यों में अच्छी वर्षा होगी, अर्थिक सशक्तीकरण होगा।
- राजनैतिक क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे।
- भारत की अर्थव्यस्था में तेजी से विकास होगा।
और सबसे महत्वपूर्ण यह कि सिंहस्थ गुरु के कार्यकाल में ही भारत संयुक्त राष्ट्र का स्थायी सदस्य घोषित किया जा सकता है।
आपकी लाइफ पर पड़ने वाले प्रभाव हमने राशियों के हिसाब से नीचे स्लाइडर में दर्शा रहे हैं-

जानिए आपकी लाइफ पर प्रभाव
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मेष- जीवन में उन्नति होगी
इस राशि पर गुरु ताम्र पाद रहेगा। नव-विवाहित वर्ग को सन्तान की प्राप्ति होगी। बुद्धि का विकास, मित्रों से लाभ, आध्यात्मिक उन्नति और विद्याभ्यास में वृद्धि होगी। नवमेश व द्वादशेश होकर बृहस्पति पंचम भाव में बैठकर आपकी उन्नति करायेगा।

वृष- लाभ मिलेंगे पर माता को कष्ट
रजत पाद का गुरु होने से दाम्प्त्य व पुत्र सुख में वृद्धि होती है। शासन से जुड़े लोगों को लाभ होता है। अष्टमेश और लाभेश होकर गुरु चैथे भाव में स्थित है। गुप्त सम्बन्ध उजागर हो सकते है। भूमि व प्रापर्टी से धन लाभ हो सकता है। माता को कष्ट हो सकता है।

मिथुन- जीवन साथी के साथ प्रेम बढ़ेगा
स्वर्ण पाद का गुरु कठिन परिश्रम से अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति कराता है। सेवा करने से प्रगति होती है। सप्तमेश व दशमेश होकर बृहस्पति पराक्रम भाव में बैठा है। भाईयों से विरोध हो सकता है। जीवन साथी के साथ मधुरतम पल व्यतीत होंगे।

कर्क- धन की प्राप्ति होगी
लौह पाद का गुरु होने मित्र वर्ग से लाभ तथा धन की प्राप्ति हो सकती है। भौतिक वस्तुओं का क्रय हो सकता है। महिलाओं को सत्संग करने का अवसर प्राप्त होगा। षष्ठेश व नवमेश गुरु नौकरी में प्रगति एंव भाग्य में वृद्धि करायेगा।

सिंह- बीमारियां लग सकती हैं
स्वर्ण पाद का गुरु मित्र, सन्तान, परिवार जनों का सुख दिलाता है। भाग्य की वृद्धि और शासन से लाभ होता है। पंचमेश व अष्टमेश गुरु लग्न में बैठा है। जिस कारण सिर में चोट या दर्द रह सकता है। धर्म-कर्म में रूचि बढ़ेगी एंव यात्रा करने का अवसर मिलेगा।

कन्या- अनायास धन खर्च होगा
ताम्र पाद का गुरु मित्रों से वैर, अधिकारियों से भय बना रहता है। अनेक प्रकार की चिन्तायें घेरे रहती है। धन का व्यर्थ में अपव्यय होता रहता है। चतुर्थेश व सप्तमेश गुरु आपके द्वादश भाव में बैठा है। माता से लाभ होगा एंव कुछ लोगों को वाहन का सुख भी मिलेगा।

तुला- अनेक सुखों की प्राप्ति होगी
रजत पाद का गुरु अरोग्यता, ऐश्वर्य, वाहन सुख आदि दिलायेगा। अनेक प्रकार के सुखों की प्राप्ति हो सकती है। पराक्रमेश व षष्ठेश गुरु लाभ भाव में स्थित है। आप-अपने पराक्रम व बुद्धि के बल पर आगे बढ़ेगे। लाख कोशिशे करने के बावजूद भी विरोधी आपका बाल भी बांका नहीं कर पायेगे।

वृश्चिक- रुके हुए काम बनेंगे
लौह पाद का गुरु मान-सम्मान में वृद्धि एंव उत्साह प्रदान करेगा। गुरु के सिह में आने से शनि के प्रकोप में कुछ कमी आयेगी। रुके हुये कार्यो में प्रगति होगी। द्वतीयेश व पंचमेश गुरु दशम भाव में बैठकर अच्छा फल देगा।

धनु- मेहनत रंग लायेगी
ताम्र पाद का गुरु बुद्धि में वृद्धि करायेगा एंव स्त्री विलास करायेगा। लग्नेश एंव चतुर्थेश गुरु भाग्य भाव में बैठकर मिश्रित फल प्रदान करेगा। अपनी मेहनत के दम पर ही आप आगे बढ़ेगे। भाग्य का सपोर्ट कम ही मिलेगा।

मकर- ससुराल से टकराव होगा
स्वर्ण पाद का गुरु मित्रों से वैर व विरोध करवाता है। बुद्धि को भ्रमित करवाता है एंव द्रव्य की हानि होती है। द्वादशेश व तृतीयेश गुरु अष्टम भाव में बैठा है। उत्साह में कमी आयेगी व ससुराल पक्ष से टकराव भी हो सकता है।

कुम्भ- जीवन साथी से मतभेद
रजत पाद का गुरु कुछ लोगों को परदेश की यात्रा करा सकता है। सरकार से सुख एंव व्यवसाय में लाभ करवाता है। लाभेश एंव चतुर्थे गुरु सप्तम भाव में स्थित है। भौतिक वस्तुओं का क्रय होगा। जीवन साथी से मतभेद हो रहेगा। धन लाभ होगा।

मीन- किसी से बड़ा झगड़ा होगा
लौह पाद का गुरु होने जातकों का कुटुम्ब से विरोध, शत्रुवृद्धि, बल हानि एंव द्रव्य नाश से नाना प्राकर की चिन्तायें घेरे रहती है। लग्नेश व दशमेश बृहस्पति षष्ठम भाव में बैठा है। रोग की वृद्धि करायेगा एंव मामा से तनाव हो सकता है।












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