नवसंवत्सर यानी कि प्रकृति का हैप्पी न्यू ईयर

ऐसा हैप्पी न्यू ईयर जिसका प्रकृति स्वंय स्वागत करती है। नव चेतना को जाग्रत करने वाले नवसंवत्सर में प्राकृतिक उत्सव का आनन्द लिया जा सकता है। आनन्द की अनुभूति मन के द्वारा प्राप्त की जा सकती है। अनुभूति और अनुभव में फर्क है। अनुभव के पाठ में जो पढ़ा जाता है, वह किसी किताब में नहीं मिलेगा। संवय को जीने से अनुभव का ज्ञान आता है और जब मन निर्विचार अवस्था में होता है, तब होती है आनन्द की परम अनुभूति।

प्रकृति के कण-कण में आनन्द का रस भरा है। प्रकृति हमें देना जानती, लेना नहीं। जो लेना जानता है, वह देने का बहुत इच्छुक नहीं होता है। क्या मनुष्य सिर्फ प्रकृति से लेता रहेगा, उसे कुछ देगा नहीं है ? प्रकृति लेने की इच्छुक नहीं है, उसे बचाये रखना ही देने के समान है । आईये इस भारतीय नववर्ष पर सकंल्प ले कि प्रकृति की प्रत्येक कलाकृति को बचाये रखने में अपना हर सम्भव सहयोग करेंगे।

नवसंवत्सर भारतीय काल गणना का आधार पर्व है, जिसमें यह पता चलता है कि भारत का पुरातन गणित एंव नक्षत्र विज्ञान कितना समृद्ध था। भारतीय कालगणना के अनुसार 21 मार्च 2015 को सृष्टि की 1,95, 58, 85, 116 वीं जयन्ती मनाई जायेगी। भारतीय इतिहास में विख्यात सम्राट विक्रमादित्य ने विक्रमी संवत् का प्रवर्तन किया था, जो आज भी लोकप्रिय है। नूतन संवत्सर 2072 का प्रारम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा दिनांक 21 मार्च 2015 दिन शनिवार से हो रहा है। भारतीय पंचाग विज्ञान के अनुसार कीलक नामक सवंत्सर जिसकी मन्त्रिपरिषद इस प्रकार है- राजा-शनि, मन्त्री-मंगल, धनेश-गंरू, धान्येश-बुध, सस्येश-गुरू, मेघेश-चन्द्र , रसेश-शनि, नीरसेश-गुरू, फलेश-चन्द्र, दुग्रेश-चन्द्र।

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सम्वत 2072 का राजा शनि है तथा सेनापति मंगल है। शनि और मंगल का आपस में विरोधी स्वभाव जगजाहिर है। शनि अन्याय, अपराध और भ्रष्टाचार का प्रबल विरोधी है। मंगल अनुशासन, पावर, रक्षा व सुरक्षा का प्रतिनिधित्व करता है। हालांकि राजा और सेनापति का कहीं-2 किसी मुद्दे पर समांजस्य गड़बड़ायेगा। फिर भी राजा शनि और सेनापति मंगल की यह जोड़ी विकास, सुरक्षा एंव भ्रष्टाचार पर काबू पाने में काफी कारगर सिद्ध होगी।

सम्वत 2072 का राजा शनि है तथा सेनापति मंगल

मोदी की राशि वृश्चिक है, जिसका मालिक मंगल है। कीलक नामक संवत्सर में मंगल सेनापति है, जिस कारण मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति एंव विकास दर में वृद्धि होगी। रक्षा सम्बन्धी कई देशों से महत्वपूर्ण समझौते होंगे। धनेश गुरू होने के कारण भारत की जीडीपी में वृद्धि होगी। मेघेश चन्द्र के कारण भारत में वर्षा रूक-रूक के होगी किन्तु अच्छी वर्षा होने के संकेत नजर आ रही है। भारत के उत्तरी व पूर्वी हिस्सों में बाढ़, भूकम्प या तूफान आने की आशंका है। चन्द्र का फलेश होना इस बात का सूचक है कि भारत की विश्वपटल पर साख में चार-चाॅद लगने की आशा नजर आ रही है।

आप सभी पाठक गणों को मेरी तरफ से भारतीय नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें।

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