दीवाली पर लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त
[पं. अनुज कुमार शुक्ल] इस वर्ष दीपावली 11 नवम्बर सन् 2015 को कार्तिक कृष्ण अमावस्या बुधवार को मनाई जायेगी। दीवाली के उपलक्ष्य में लक्ष्मी पूजन के अलावा कई अन्य पूजाएं भी होती हैं। सभी प्रमुख पूजाओं और रस्मों के लिये शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं।
दीपावली पूजन 11 नवंबर
इस दिन अमावस्या रात्रि 11:16 बजे तक रहेगी। दीपावली के पूजन का मुख्य काल प्रदोष काल माना गया है। इस दिन प्रदोष काल रहने से स्थिर लग्न और ज्यादा बलवती हो जायेगी।
- इस दिन प्रदोष काल सांय 5:41 बजे से रात्रि 8:15 बजे तक है।
- स्थिर लग्न में पूजन करने वाले के लिए
- प्रथम स्थिर लग्न: वृष सांय 5:58 बजे से 7:58 बजे तक रहेगी।
- दूसरी स्थिर लग्न: सिंह अर्द्धरात्रि के बाद 12:28 बजे से रात्रि 02:35 बजे तक।
- महानिशीथ काल: रात्रि 10:43 बजे से रात्रि 01:15 बजे तक रहेगा।
चैघड़ियाॅ मुहूर्त- चैघड़ियाॅ मुहूर्त के अनुरागियों को लाभ का समय रात्रि 7:19 बजे से रात्रि 11:57 बजे तक। इस लग्न में शुभ, अमृत, चर की चैघड़ियाॅ प्राप्त हो रही है। इस अवधि में महालक्ष्मी कुबेरादि व खाता पूजन करना सर्वथा हितकारी रहेगा।
दीपावली के बाद दुकान खोलने का मुहूर्त-
13 नवम्बर को सुबह 7:44 बजे तक शुभ है। सुबह 10:34 मि0 से अपरान्ह 02:49 तक चर लाभ। अमृत की चैघड़ियाॅ सांय 04:14 बजे से सांय 05:39 मि0 तक शुभ चैघड़ियाॅ रहेगी।
भैया दूज का मुहूर्त
भैया दूज का त्यौहार 13 नवम्बर को मनाया जायेगा। इस तारीख को पूरे दिन द्वितीया तिथि रहेगी। स्थिर लग्न में बहन-भाई को चूरा व मीठा खिलाने से प्यार स्थिर रहता है। सुबह 7 बजे से 09 बजे तक पहली स्थिर लग्न वृश्चिक रहेगी। दूसरी स्थिर लग्न कुम्भ मध्यान्ह 12:55 बजे से अपरान्ह 02:10 बजे तक रहेगी। इन दोनों स्थिर लग्नों में भैय्या दूज मनाना ज्यादा श्रेष्ठ रहेगा।













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