रक्षाबंधन विशेष: जानिए कब बांधे कलाई पर प्यार जिससे जीवन भर रहे भाई का साथ
रक्षा बन्धन हिन्दू पंचाग के अनुसार हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाना वाला यह त्यौहार भाई-बहन के प्यार को जताने का प्रतीक है। इस दिन बहन अपने भाईयों की कलाई में राखी बांधती है और उनकी दीर्घायु व प्रसन्नता के लिये प्रार्थना करती है। और भाई अपनी बहन की हर विपत्ति पर रक्षा करने का वचन देते है। इन राखियों के मध्य भावनात्मक प्रेम भी छिपा होता है। इस बार रक्षा बन्धन का त्यौहार 10 अगस्त दिन रविवार श्रवण नक्षत्र एंव मकर राशिस्थ चन्द्रमा में पड़ रहा है।
पौराणिक कथाः पुराणों मे वर्णन है कि एक बार देव व दानवों में जब युद्ध शुरू हुआ तब दानव हावी होते नजर आने लगे। भगवान इन्द्र घबराकर गुरू बृहस्पति के पास गये और अपनी व्यथा सुनाने लगे । वहां पैर बैठी इन्द्र की पत्नी इन्द्राणी यह सब सुन रही थी। उन्होने एक रेशम का धागा मन्त्रों की शक्ति से पवित्र कर अपने पति की कलाई पर बांध दिया। वह श्रावण पूर्णिमा का दिन था। इन्द्र को इस युद्ध में विजयी प्राप्ति हुयी। तभी से लोगो का विश्वास है कि इन्द्र को विजय इस रेशमी धागा पहनने से मिली थी। उसी दिन से श्रावण पूर्णिमा के दिन यह धागा बांधने की प्रथा चली आ रही है। यह धागा ऐश्वर्य, धन, शक्ति, प्रसन्नता और विजय देने में पूरी तरह सक्षम माना जाता है।
विधि-विधानः पूर्णिमा के दिन प्रातः काल हनुमान जी व पित्तरों को धोक देकर जल, रोली, मोली, धूप, फूल, चावल, प्रसाद, नारियल, राखी, दक्षिणा आदि चढ़ाकर दीपक जलाना चाहिए। भोजन के पहले घर के सब पुरूष व स्त्रियां राखी बांधे। बहने अपने भाईयों को राखी बांधकर तिलक करें व गोला नारियल दें। भाईयों को चाहिए कि वे बहन को प्रसन्न करने के लिये रूपया अथवा यथाशक्ति उपहार दें। राखी में रक्षा सूत्र अवश्य बांधें।
आईये जानते हैं कैसे बांधें राखी पर अपने भाई की हाथों पर अपना प्यार...

रक्षा बन्धन का शुभ मुहूर्त-
रक्षाबन्धन अपरान्हव्यापिनी श्रावण पूर्णिमा में मनाया जाता है। भद्रा में यह निषिद्ध है। 10 अगस्त को अपरान्ह 1:38मिनट तक भद्रा रहेगी। अतः अपरान्ह 1: 40 मिनट से 3:30 मिनट तक शुभ मुहूर्त है। वैसे भद्रा के बाद पूरे मूहूर्त रहेगा।

रक्षा सूत्र बांधते समय क्या करें-
1- रक्षाबन्धन के दिन सर्वप्रथम गणेश जी को राखी बांधे तत्पश्चात अन्य लोगों को बाॅधें।
2- राखी बॅधवाने वाले व्यक्ति का मुॅख पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए।

रक्षा सूत्र बांधते समय क्या करें-
a. रक्षा सूत्र बॅधवाते वक्त सिर पर रूमाल या कोई कपड़ा अवश्य रखें।
b. महिलावर्ग रखी बाॅधते समय लाल, गुलाबी, पीले या केसरिया रंग कपड़े पहने तो विशेष लाभ होगा।

रक्षा सूत्र बांधते समय क्या करें-
सर्वप्रथम कलाई में कलावा बांधे उसके बाद अन्य कोई फैशनेबल राखी बांधे।

रक्षा सूत्र बांधते समय क्या करें-
बहने जों रक्षा सूत्र बांधें उसे एक वर्ष तक कलाई में बाॅधे रखे और दूसरे वर्ष पुराना वाला रक्षा सूत्र उतार कर किसी नदीं में प्रवाहित करके पुनः नया रक्षा सूत्र बहनों से बॅधवायें। ऐसा करने पर आपकी सुख, समृद्धि व स्वास्थ्य की रक्षा पूरे वर्ष होती रहेगी।

रक्षा सूत्र बांधते समय क्या करें-
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामानुवध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।
बहने राखी बाॅधते समय उपरोक्त मन्त्र का उच्चारण करें।

रक्षा सूत्र बांधते समय क्या करें-
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः
राखी बांधवाते समय दाहिने हाथ की मुठ्ठी में फॅूल अवश्य रखें।

रक्षा सूत्र बांधते समय क्या करें-
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः
रक्षा सूत्र शत-प्रतिशत सूती धागे का ही होना चाहिए।

रक्षा सूत्र बांधते समय क्या करें-
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः
राखी को 7 या 5 बार घुमाकर ही हाथ में बाॅधना चाहिए।

रक्षा सूत्र क्यों बांधा जाता है ?
1- कलावा या मोली बांधने की प्रथा तब से चली आ रही है, जब से दानवीर राजा बलि की वीरता की रक्षा के लिए भगवान वामन ने उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बाॅधा था। शास्त्रों में इस श्लोक का उल्लेख मिलता भी मिलता है।
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामानुवध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

रक्षा सूत्र क्यों बांधा जाता है ?
रक्षासूत्र बांधने से त्रिदेव ब्रहमा, विष्णु, महेश व तीनों देवियां लक्ष्मी, सरस्वती व दुर्गा की कृपा बनी रहती है।

रक्षा सूत्र क्यों बांधा जाता है ?
शरीर की संरचना का प्रमुख नियन्त्रण हाथ की कलाई में होता है। इसलिए कलाई में रक्षा सूत्र बाॅधने से आत्म-विश्वास आता है एंव तीनों दोष वात, पित्त व कफ में सन्तुलन बना रहता है, जिससे स्वास्थ्य उत्तम रहता है।

रक्षा सूत्र क्यों बांधा जाता है ?
कलावा या मोली बांधने से ब्लडप्रेशर व तनाव का रोग कम होता है।

यदि बहन भाई से रूष्ठ है तो क्या करें-
जन्मकुण्डली में बहन का कारक ग्रह बुध होता है। यदि आपका बुध अशुभ है, पापी है या नीच का है तो बहन से आपके रिश्तें मधुर नहीं रहेंगे। किसी भी प्रकार की नोंक-झोक चलती रहेगी।
1-बहन से रिश्तें मधुर हो जायें इसके लिए आपको रक्षा बन्धन के दिन अपनी बहन को हरें रंग साड़ी, हरे रंग की चूडियाॅ उपहार में दें।

यदि बहन भाई से रूष्ठ है तो क्या करें-
2- नाक व कान में पहनें वाली कोई वस्तु भेंट करने से भी रिश्तें अच्छें हो जाते है।
3- रक्षा बन्धन के दिन बहन को सौंफ युक्त मीठा पान खिलायें।

यदि बहन भाई से रूष्ठ है तो क्या करें-
4- विष्णु सह्रसनाम का पाठ करें।
5- अपनी बहन को हरे रंग की ब्रेसलेट या कोई अन्य उपहार जो हरें रंग का हो उसे दें।

यदि भाई नाराज है तो बहनें क्या करें-
भाई का कारक ग्रह मंगल होता है। स्त्रियों की कुण्डली में मंगल अशुभ, नीच का या भावसन्धि में फॅसा है तो भाई से रिश्तें अच्छे नहीं रहेंगे।
1- बहनें रक्षा बन्धन के दिन सबसे पहले हनुमान जी को रखी बाॅधे और उसके बाद भाई को राखी बाॅधते वक्त हनुमान जी की दाहिने भुजा से लिया हुआ वन्दन भाई को लगायें। ऐसा करने से आपस में प्रेम सम्बन्ध मजबूत होंगे।
2- आज के दिन बहनें सुन्दर काण्ड का पाठ करके भाई को राखी बाॅधें तथा बेसन लडडू खिलायें।

यदि भाई नाराज है तो बहनें क्या करें-
3- बहनें अपनें भाईयों को गहरे लाल रंग का कोई उपहार दें।
4- रक्षाबन्धन के दिन बहनें अपनें भाईयों को अपने हाथों से भोजन करायें तथा केसर युक्त कोई मीठी वस्तु अवश्य खिलायें।

यदि भाई नाराज है तो बहनें क्या करें-
5- भाई को राखी बांधते समय बहन मन में कार्तिकेय भगवान का स्मरण करें। हे कार्तिकेय जी मेरे और भाई के बीच रिश्तें हमेशा मधुर बनें।












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