अक्षय तृतीया पर शुभ कार्य करने पर मिलता ईश्‍वर का आर्शीवाद

बैंगलोर। अक्षय तृतीया जिसे आखा तीज भी कहते हैं, हिंदु धर्म के अनुयायियों के अलावा जैन धर्म को मानने वालों के लिए भी एक पवित्र दिन माना जाता है। यह मौका शादी और गहनों को खरीदने के लिए सबसे शुभ माना गया है और इस बार भी यानी दो मई को अक्षय तृतीया के मौके पर देश में लाखों शादियां होंगी। कई लोग गहने खरीदेंगे तो कई लोग इस दिन मकान खरीदने जैसे कुछ और शुभ काम को भी करना पसंद करते हैं।

इस मौके पर छत्‍तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक नई मिसाल पेश की जाएगी। रायपुर में इस शुभ मौके पर उन विधवाओं की जिंदगी को शुभ बनाया जाएगा जिनकी जिंदगी पिछले कई वर्षों से अकेली है। अक्षय तृतीया पर उनका पुनर्विवाह होने जा रहा है। अपने पति को खोने के बाद निराशामय जीवन व्यतीत कर रहीं विधवाएं अब नए जीवनसाथी के साथ खुशहाल जीवन जीने के लिए फिर से फेरे लेंगी। विधवाओं का पुनर्विवाह करवाकर उनके

जीवन में नई रोशनी बिखेरने के लिए 'नेचर्स केयर एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी' के सदस्य जोरशोर से तैयारी में जुटे हैं। सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. विनीता पांडेय का कहना है कि प्रत्येक समाज में युवक-युवतियों का परिचय सम्मेलन आयोजित किया जाता है, लेकिन असमय विधवा हो चुकीं महिलाओं के लिए कुछ नहीं किया जाता। इसलिए उनके संगठन ने यह कदम उठाया है।

उन्होंने कहा कि विधवाएं जिंदगीभर परिवार के दूसरे सदस्यों पर निर्भर रहकर जैसे-तैसे जीवन गुजारती हैं। परिवार के लोग ही उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करते हैं। विवाह, जन्मदिन, हवन, यज्ञ जैसे उत्सवों में विधवाओं को शामिल नहीं किया जाता। पारिवारिक व सामाजिक बंधनों के चलते विधवाएं भी मांगलिक उत्सवों से दूरी बनाकर चलती हैं और जीवनभर घुटती रहती हैं। विधवाओं के जीवन में फिर से रंग भरने के लिए पहली बार कोशिश की जा रही है।

आगे की स्‍लाइड में देखें कि आखिर क्‍यों अक्षय तृतीय शास्‍त्रों में इतनी महत्‍वपूर्ण हैं और क्‍यों इस दिन शुभ कार्यों को करने में यकीन रखा जाता है।

बदलेगी इनकी जिंदगी

बदलेगी इनकी जिंदगी

रायपुर में इस शुभ मौके पर उन विधवाओं की जिंदगी को शुभ बनाया जाएगा जिनकी जिंदगी पिछले कई वर्षों से अकेली है। अक्षय तृतीया के शुभ मौके पर निराशामय जीवन व्यतीत कर रहीं विधवाएं की जिंदगी में नई आशा और नए रंग भरने के मकसद से उनका पुर्नविवाह कराया जाएगा।

गणेश जी ने शुरू की महाभारत की रचना

गणेश जी ने शुरू की महाभारत की रचना

अक्षय तृतीया को भगवान विष्‍णु का दिन माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश ने इसी दिन से महाभारत को लिखना शुरू किया था। भगवान गणेश ने वेद व्‍यास जी के सामने शर्त रखी थी कि जिस समय वह महाभारत को लिखना शुरू करेंगे, तब उनकी कलम एक क्षण भी नहीं रुकेगी।

अक्षय यानी कभी खत्‍म न होना

अक्षय यानी कभी खत्‍म न होना

अक्षय शब्‍द संस्‍कृत भाषा का शब्‍द है और इसका मतलब होता है कभी खत्‍म न होने वाला या जिसका कभी क्षय न हो। ऐसा माना जाता है कि यह दिन लोगों की जिंदगी में गुडलक और सफलता लेकर आता है। ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन पर अगर दान या फिर धर्म से जुड़े कार्य किए जाते हैं तो भगवान का आशीर्वाद लोगों को मिलता है।

हजारों शादियाें का गवाह बनती तारीख

हजारों शादियाें का गवाह बनती तारीख

अक्षय तृतीया के मौके पर पिछले वर्ष पूरे देश में करीब 10,000 शादियां हुई थीं और इस बार भी माना जा रहा है कि इतनी ही शादियां दो मई को अक्षय तृतीया के मौके पर होंगी। ऐसा माना जाता है कि इस दिन शादी के बंधन में बंधने वाली जोड़ियां अगले सात जन्‍मों तक साथ रहती हैं और उन्‍हें ईश्‍वर का आशीर्वाद मिलता है।

बच्‍चन परिवार के लिए खास है दिन

बच्‍चन परिवार के लिए खास है दिन

अक्षय तृतीया के मौके पर ही अमिताभ बच्‍चन और जया बच्‍चन के बेटे अभिषेक बच्‍चन ने पूर्व मिस वर्ल्‍ड और बॉलीवुड की एक्‍ट्रेस ऐश्‍वर्या राय बच्‍चन के साथ सात फेरे लिए थे। बच्‍चन परिवार का इस दिन में यकीन इतना ज्‍यादा है कि खुद बिग बी की शादी भी इस दिन के मौके पर हुई थी।

 जमकर गहनों की खरीदारी

जमकर गहनों की खरीदारी

अक्षय तृतीया के मौके पर लोग गहनों की खरीदारी जमकर करते हैं। ऐसा माना जाता है कि शुद्ध और पवित्र मौका गहनों को खरीदने के लिए अक्षय तृतीया से बेहतर और कोई मुहूर्त नहीं होता है। इस मौके पर गहनों की खरीदारी जमकर होती है और सोने के दाम भी आम दिनों की तुलना में थोड़े बढ़ जाते हैं।

एक और खास दिन

एक और खास दिन

बताते हैं कि इस दिन ही देवी अन्‍नपूर्णा का जन्‍म भी हुआ था और इसलिए इस दिन के मायने अपने आप में और ज्‍यादा बढ़ जाते हैं। इस दिन से ही त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी और इसी दिन से गंगा नदी ने धरती पर बहना प्रारंभ किया था।

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