कुंडली कहती हैं राजस्थान चुनाव में वसुंधरा, गहलोत पर भारी
आखिर कब-तक ? क्या कभी भारत की जनता देश के विकसित होने के लिए वोट करेगी ? जागो जनमानस जागो ?
चलो मैं अपने विषय पर आता हूं और ज्योतिषीय विवेचन के आधार पर पता लगाता हूॅ कि राजस्थान में अशोक गहलोत सत्ता पर दूसरी बार काबिज होंगे या फिर भाजपा की पूर्व मुख्यमन्त्री वसुंधरा राजे के हाथों में सत्ता की चाबी आयेगी ?
कांग्रेस के अशोक गहलोत का जन्म 03 मई सन् 1951 को सुबह 9:30 मि. पर जोधपुर में हुआ था। उस काल में क्षितिज पर मिथुन लग्न उदित हो रही थी। मिथुन राशि एक द्विस्वभाव राशि है, जिसके फलस्वरूप गहलोत के स्वभाव में दोहरापन पाया जायेगा, कभी धीर गम्भीर तो कभी चंचल और वाचाल रहेंगे। आपके सोचने का तरीका वैज्ञानिक व तर्कसंगत होगा।
इस समय आपकी कुण्डली में मंगल की दशा में राहु की अन्तर एंव केतु की प्रत्यन्तर दशा चल रही है। षष्ठेश और लाभेश होकर मंगल अपनी मेष राशि में लाभ भाव में राजा सूर्य के साथ संग्रस्थ है। मंगल और सूर्य की सप्तम नजर जनता के कारक पंचम भाव पर पड़ रही है। यह स्थिति शुभ कही जा सकती है। राहु भाग्य भाव में स्वराशि का होकर गुरू के नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद पर कब्जा किये हुये है। गुरू सप्तमेश होकर दशम भाव में बैठा है। सप्तम भाव परिवर्तन का कारक एंव दशम स्थान राज्य का संकेतक है। अतः अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस को लगभग 86 सीटें प्राप्त हो सकती है और गहलोत दूसरी बार सत्ता के सुख से वचिंत रह जायेगे।
राजस्थान की पूर्व सीएम एंव भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष वसुंधरा राजे का जन्म 08 मार्च 1953 ई0 को मध्यान्ह 12 बजे मुम्बई में हुआ था। आपकी कुण्डली के प्रथम भाव में वृष लग्न पड़ी है। वृष राशि एक स्थिर राशि है, जिसके कारण आप में प्रबल शारीरिक व मानसिक सहनशक्ति एंव सहिष्णुता होगी। आप स्वभाव से हठी एंव योजनाओं को पूर्ण करने की योग्यता रखेंगी।
वर्तमान में आपकी जन्मतालिका में मंगल की दशा में, शनि की अन्तर एंव बुध की प्रत्यन्तर दशा चल रही है। मंगल सप्तमेश एंव द्वादशेश होकर लाभ में पंचम के स्वामी बुध के साथ बैठा है। मंगल व बुध दोनों की सप्तम दृष्टि जनता के संकेतक भाव पंचम पर पड रही है। यह एक शुभ स्थिति है। शनि भाग्येश एंव दशमेश होकर षष्ठम भाव में पड़ा है।
शनि उच्च का है एंव वक्री भी है। शनि वंसुधरा राजे को एक बार फिर मुख्यमन्त्री की कुर्सी पर आसीन होने का सुनहरा अवसर देगा किन्तु बुध नीच का होकर अपनी सप्तम नजर पंचम भाव पर डाल रहा है, इसलिए पूर्ण बहुमत पाकर सरकार बना पाना मुश्किल है, क्योंकि राजस्थान में भाजपा को लगभग 94 सीटें पाने के संकेत नजर आ रहें है।













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