ग्रहों की शांति में पलाश के फूलों का महत्व
1- जिस जातक को अधिक परिश्रम करने पर भी व्यापार में सफलता नहीं मिल रही हो, तथा लगातार कर्ज की समस्या बढ़ रही हो। वह व्यक्ति शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को पलाश की जड़ लें आयें। इसे स्वच्छ जल से साफ कर लें उसके पश्चात एक कमरे में सुविधानुसार कोई स्थान चुन कर गंगाजल अथवा गोमूत्र से छींटे मारकर स्वच्छ कर लें उसके उपर बाजोट रखकर , बाजोट पर लाल रेशमी कपड़ा विछायें ।
बाजोट के बीच में 7 प्रकार अनाज लेकर सभी को मिलाकर एक ढेरी बनायें। इस पर पलाश की जड़ रखें तथा इसी पर दीपक जलायें। धूप जलाकर लक्ष्मी जी के किसी भी मन्त्र की 3 या 4 माला का जाप करें। उसके पश्चात अब इस जड़ को एक लाल कपड़े में बांधकर अपने गल्ले या धन रखने के स्थान पर रख दें। मां लक्ष्मी की कृपा से आपकी आर्थिक समस्यायें धीरे- धीरे दूर होकर आर्थिक सम्पन्नता आ जायेगी।
2- पलाश की जड़ को शुभ मुहूर्त में किसी रविवार के दिन में निकाल लें। इसे एक सूती धागे में लपेट कर दाहिनी भुजा में बांधने से किसी भी प्रकार ज्वर दूर हो जाता है।
3- पुत्र सन्तान की प्राप्ति करने वाले जातक यह प्रयोग करेंगे तो लाभ मिलेगा। पलाश का एक ताजा पत्ता 250 ग्राम दूध में उबालकर यदि कोई महिला गर्भधारण के पूर्व से प्रारम्भ कर , गर्भाधारण के दो महीने बाद तक नियमित रूप से सेंवन करती है तो उसे पुत्र सन्तान की प्राप्ति होती है। पत्ते को उबालने के बाद निकालकर फेंक दिया जाता है। केवल दूध का ही सेंवन किया जाता है।
ज्योतिषीय प्रयोगः
1- जिन व्यक्तियों का सूर्य ग्रह पीडि़त होकर अशुभ फल दे रहा है वे जातक पलाश की लकड़ी से हवन करे या फिर लकड़ी को अभिमन्त्रित करके चांदी के लाकेट में गले में धारण करें।
2- नवग्रहों के कुप्रभाव से बचने के लिये पलाश के पुष्प, गुलाब के पुष्प अथवा चमेली के पुष्प और तुलसी की पत्तियां स्नान जल में डालकर उस जल से स्नान करना लाभकारी सिद्ध होगा। यह प्रयोग लगातार 42 दिन तक करना चाहिए।













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