क्या DRS में होता है AI का इस्तेमाल? इंटरनेशनल क्रिकेट में कैसे मिलती है इससे अंपायर को मदद
AI in DRS: मॉडर्न जमाने में हर दिन कोई न कोई तकनीक इजाद होती है। उनमें से सबसे ज्यादा चर्चा जिस तकनीक की हो रही है, उसका नाम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है। हर क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल तेजी से देखने को मिल रहा है। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या इंटरनेशनल क्रिकेट में इसका इस्तेमाल होता होगा?
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ब्रॉडकास्ट के दौरान कई तरह की तकनीक का इस्तेमाल होता है। अंपायरिंग आसान बनाने के लिए डिसीजन रिव्यू सिस्टम (DRS) लाया गया। इससे फैसलों में काफी हद तक सटीकता आई लेकिन पूरी 100 फीसदी इसे भी सही नहीं मान सकते।

डिसीजन रिव्यू सिस्टम तकनीकी चरणों से गुजरता है, तो क्या वहां एआई का इस्तेमाल करके फैसला दिया जाता है। इसकी तह तक जाने के लिए हमने एआई पर ही सवाल दाग दिया। चैटजीपीटी के अनुसार DRS में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल होता है लेकिन तरीका अलग रहता है।
DRS में कैसे होता है AI का उपयोग
डिसीजन रिव्यू सिस्टम में एआई का उपयोग किया जाता है लेकिन यह डायरेक्ट निर्णय में शामिल नहीं होता है। यह तकनीक को सपोर्ट करता है, जिससे अंपायर के लिए आसानी रहती है। बॉल के रास्ते को ट्रेक करने के लिए एआई कंप्यूटर विजन और डेटा का इस्तेमाल करता है। इसके बाद अनुमान लगाता है कि पिच होने के बाद गेंद कहां जाएगी।
इसके अलावा बल्ले पर लगे किनारे को जानने के लिए ऑडियो विश्लेषण करता है, बैकग्राउंड से आने वाली आवाज को कम करके बल्ले से लगे किनारे का पता लगाता है। यह बैट और पैड के मामले में फ्रेम विश्लेषण भी करता है, जिससे टीवी अंपायर को एक दिशा मिल जाती है। अंततः निर्णय टीवी अंपायर ही देता है। एआई सिर्फ तकनीक को सपोर्ट करते हुए अंपायर का काम आसान कर देता है।
AI का काम डेटा प्रोसेस करना है
लब्बोलुआब यही है कि इंटरनेशनल क्रिकेट में DRS के दौरान AI का उपयोग गेंद की ट्रैकिंग, अल्ट्राएज और हॉटस्पॉट जैसी तकनीकों में होता है। AI डेटा को प्रोसेस करके अंपायर को सटीक निर्णय लेने में मदद करता है। फाइनल फैसला इंसान ही लेता है, जो टीवी अंपायर के रूप में मौजूद होता है।












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