AI बना हेल्थ सेक्टर का नया गेमचेंजर, Rare Diseases की पहचान में Doctors से भी आगे, रिसर्च में दावा
AI Diagnoses Rare Diseases: आर्टिफिशियल टेक्नोलॉजी (AI) अब डॉक्टरों को भी टक्कर देती दिख रही है। मरीज की बीमारी पहचानने से लेकर इमरजेंसी में इलाज संभालने तक यह कई कामों में डॉक्टरों से बेहतर प्रदर्शन कर रही है या कर सकती है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की साइंस में पब्लिश हुई एक रिसर्चमें पाया गया कि आर्टिफिशियल टेक्नोलॉजी कई मामलों में डॉक्टरों के बराबर या उनसे बेहतर काम कर सकती है।
इससे साफ है कि आने वाले समय में इलाज के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वहीं माइक्रोसॉफ्ट ने भी अपना नया सिस्टम पेश किया है जो मुश्किल बीमारियों की पहचान में काफी मददगार बताया जा रहा है।

इमरजेंसी केस में भी AI रहा आगे
OpenAI का advanced AI मॉडल अब इमरजेंसी रूम में भी मरीज की हालत समझने में बेहतर काम कर रहा है। AI मरीजों के लिए जरूरी टेस्ट सुझाने से लेकर पूरे इलाज को संभालने में मदद कर रहा है। कई मामलों में अनुभवी डॉक्टरों के बराबर या उनसे बेहतर भी रिजल्ट दे चुका है।
रिसर्च में इस मॉडल को बोस्टन के एक अस्पताल के 76 इमरजेंसी केस पर इस्तेमाल किया गया। इसे तीन स्टेप में परखा और टेस्ट कियआ गया है। शुरुआत में मरीज की जांच, डॉक्टर से पहली मुलाकात और फिर मरीज को वार्ड या ICU में भेजने तक दो अलग-अलग डॉक्टरों ने बिना यह जाने कि जवाब AI का है या इंसान का इसका मूल्यांकन किया और पाया कि AI हर स्टेप में डॉक्टरों के बराबर या उनसे बेहतर रहा है।
AI ने सिर्फ केस स्टडी में ही नहीं बल्कि कम जानकारी और मुश्किल हालात में भी बीमारियों को पहचानने में अच्छा काम किया है। Massachusetts General Hospital के पुराने और जटिल केस जो कई सालों से टेस्ट के लिए इस्तेमाल होते आ रहे हैं, उनमें भी AI ने अच्छा रिजल्ट दिया है।

माइक्रोसॉफ्ट का नया AI सिस्टम क्या है?
माइक्रोसॉफ्ट का नया AI सिस्टम MAI-DxO एक एडवांस टूल है जिसे मुश्किल बीमारियों की पहचान के लिए तैयार किया गया है और टेस्ट में इसने लगभग 85.5% मामलों में सही नतीजे दिए जबकि डॉक्टरों का स्कोर करीब 20% रहा।
यह सिस्टम एक अकेला AI नहीं है, बल्कि कई AI मॉडल की टीम की तरह काम करता है। जहां अलग-अलग AI मिलकर सवाल पूछते हैं, संभावित बीमारी पर चर्चा करते हैं, गलतियों को पकड़ते हैं और सही जांच चुनते हैं। इसे ' चेन ऑफ डिबेट'कहा जाता है।
इस तरीके से AI न सिर्फ ज्यादा सही डायग्नोसिस करता है बल्कि कम और जरूरी टेस्ट चुनकर खर्च भी कम करता है। हालांकि यह अभी सिर्फ रिसर्च स्तर पर है और अस्पतालों में इस्तेमाल के लिए तैयार नहीं है इसके लिए आगे और टेस्टिंग, सेफ्टी चेक और सरकारी मंजूरी लेनी होगी।
क्या AI बन जाएगी नया डॉक्टर?
स्टडी के राइटर अर्जुन मनराई के मुताबिक यह रिसर्च सिर्फ लिखित जानकारी पर आधारित थी जबकि असली इलाज इससे कहीं ज्यादा मुश्किल होता है। असल में डॉक्टर मरीज से सीधे बात करते हैं उसकी पूरी समस्या और लक्षण समझते हैं,X-ray और ECG जैसी रिपोर्ट देखते हैं और मरीज की भावनाओं व हालात को भी ध्यान में रखते हैं कई बार इलाज सिर्फ रिपोर्ट के आधार पर नहीं बल्कि अनुभव और समझ से तय किया जाता है। जो अभी AI पूरी तरह नहीं कर सकता।
AI के पास जानकारी को तेजी से समझने और सुझाव देने की ताकत जरूर है लेकिन इंसानों जैसा अनुभव,भावनाओं और स्थिति के हिसाब से फैसला लेने की समझ अभी सीमित है। इसलिए इलाज के मामले में अंतिम फैसला हमेशा डॉक्टर ही लेते हैं जबकि AI एक असिस्टेंट के तौर पर काम करता है जो डॉक्टर को सही दिशा में मदद देता है।














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