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असुर महिषासुर के नाम पर है 'मैसूर' शहर का नाम, नवरात्रि में कुछ लोग मनाते हैं यहां शोक

मैसूर। आदिशक्ति का पर्व नवरात्रि का शुभारंभ आज से हो चुका है। अगले 9 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। सबको पता है कि मां दुर्गा ने इन दिनों असुर महिषासुर का वध किया था लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में ऐसी भी जगह है, जहां महिषासुर को दैत्य नहीं बल्कि भगवान की तरह पूजा जाता है, यही नहीं उसके नाम पर शहर का नाम भी रखा गया है, और वो शहर और कोई नहीं बल्कि भारत का मशहूर और पारंपरिक शहर 'मैसूर' है।

 महिषासुर

महिषासुर

अपने दशहरे के लिए विश्वभर में मशहूर इस शहर का नाम दैत्य के नाम पर है क्योंकि इतिहासकारों ने कहा है कि पौराणिक कथाओं में उल्लेख है कि महिषासुर एक राक्षस जरूर था लेकिन उसके अंदर भी काफी अच्छे गुण थे इसलिए कर्नाटक के इस ऐतिहासिक शहर मैसूर का नाम उसके नाम पर रखा गया है।

महिषासुर का वध देवी चामुंडेश्‍वरी ने किया था

महिषासुर का वध देवी चामुंडेश्‍वरी ने किया था

मैसूर यूनिवर्सिटी के एनशियंट हिस्‍ट्री और आर्कियोलॉजी विभाग के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर एवी नरसिम्‍हा मूर्ति के मुताबिक मैसूर का नाम महिषासुर की कथा से निकला है। महिषासुर का वध देवी चामुंडेश्‍वरी ने किया था इसलिए यहां मां का मंदिर है लेकिन इस शहर का नाम असुर के नाम पर ही है।

महिषासुर दलित था

महिषासुर दलित था

इतिहासकारों ने कहा कि महिषासुर के अंदर कुछ अच्छी बातें थीं इस कारण उसके नाम पर शहर का नाम है ऐसा अशोक के समय मिले दस्‍तावेजों से पता चलता है। लोग कहते हैं कि महिषासुर दलित था। हालांकि इस बारे में कोई उल्लेख नहीं है और वो आदिवासी था कि नहीं। यही नहीं अशोक के समय मिले दस्‍तावेजों से यह भी साबित होता है कि वो बौद्द धर्म का प्रचारक था।

भैसों की धरती

भैसों की धरती

मैसूर यूनिवर्सिटी के पूर्व इतिहासकार पीवी नंजराज उर्स ने कहा है कि मैसूर को पहले येम्‍मे नाडु या भैसों की धरती कहा जाता था जो बाद में यह महिषा नाडु हो गई और बाद में वो नाम मैसूर में तब्दील हो गया।

आदिवासी प्रजातियां मानती हैं महिषासुर को भगवान

आदिवासी प्रजातियां मानती हैं महिषासुर को भगवान

देश की कुछ आदिवासी प्रजातियां महिषासुर को अपना भगवान मानती हैं और इसी कारण नवरात्रि में मां दुर्गा की जब लोग पूजा करते हैं तब वो लोग 9 दिन शोक मनाते हैं और एक मूर्ति को महिषासुर मानकर उसके शरीर में वहां-वहां तेल लगाते हैं जहां-जहां मां दुर्गा ने उस पर त्रिशूल से वार किया था।

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