Ajendra Singh Lodhi कौन हैं? अखिलेश की करीबी MP ने PM मोदी को दी गंदी-गंदी गालियां, बोला- 'मैं डरने वाला नहीं'
Ajendra Singh Lodhi PM Modi Controversial Statement Video Viral: उत्तर प्रदेश की हमीरपुर लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद अजेंद्र सिंह लोधी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दिया गया अभद्र बयान सुर्खियों में छाया हुआ है। 11 मई, सोमवार को कलेक्ट्रेट में स्मार्ट मीटर, बिजली और पानी की समस्या को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान लोधी ने न केवल प्रधानमंत्री को 'देशविरोधी' बताया, बल्कि अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें निशाना बनाया। उन्होंने BJP को मुकदमा दर्ज कराने की खुली चुनौती दी और कहा, 'मैं डरने वाला नहीं हूं।'
यह घटना सिर्फ एक सांसद का व्यक्तिगत बयान नहीं है। यह 2024 लोकसभा चुनाव के बाद सपा में व्याप्त हताशा, पश्चिम बंगाल में BJP की भारी जीत के बाद पैदा हुए राजनीतिक दबाव और 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी का हिस्सा मानी जा रही है। लोधी, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबी माने जाते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं आखिर कौन हैं अजेंद्र सिंह लोधी ? अखिलेश के करीबी कैसे?

Who Is Ajendra Singh Lodhi: अजेंद्र सिंह लोधी कौन हैं?
अजेंद्र सिंह लोधी बुंदेलखंड क्षेत्र के हमीरपुर जिले से ताल्लुक रखते हैं। वे लोधी (OBC) समुदाय से आते हैं और सपा के युवा चेहरों में गिने जाते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने हमीरपुर सीट से जीत हासिल कर सपा को बुंदेलखंड में महत्वपूर्ण बढ़त दिलाई। हमीरपुर सीट लंबे समय से BJP और क्षेत्रीय दलों के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई का केंद्र रही है।
Ajendra Singh Lodhi Education-Net Worth: गाली देने वाले MP कितने पढ़े लिखे?
लोकसभा चुनाव 2024 के चुनावी हलफनामें के मुताबिक, लोधी जनतंत्र इंटर कॉलेज, कुलपहाड़ (UP बोर्ड) से 1989 में 12वीं पास हैं। इनकी कुल संपत्ति 5 करोड़ से ज्यादा की है। लोधी बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाकों में अपनी जमीनी पकड़ के लिए जाने जाते हैं। सपा ने उन्हें PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के तहत आगे बढ़ाया। OBC वोट बैंक, खासकर लोधी समुदाय को साधने में उनकी भूमिका अहम रही। लोकसभा पहुंचने के बाद उन्होंने हमीरपुर-महोबा क्षेत्र के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय और बेहतर रेल कनेक्टिविटी जैसे स्थानीय मुद्दे संसद में उठाए।

Ajendra Singh Lodhi Akhilesh Yadav Links: अखिलेश यादव के करीबी कैसे बने?
2022 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद अखिलेश यादव ने बुंदेलखंड में पार्टी संगठन को मजबूत करने की रणनीति अपनाई। युवा OBC चेहरों को तरजीह दी गई। अजेंद्र सिंह लोधी उसी रणनीति का हिस्सा बने। सपा सूत्रों के अनुसार, उन्हें अखिलेश यादव की 'नई पीढ़ी' की टीम में शामिल किया गया। बुंदेलखंड में BJP की मजबूत पकड़ को तोड़ने के लिए सपा ने जातीय समीकरणों पर विशेष ध्यान दिया। लोधी समुदाय के अलावा क्षेत्रीय मुद्दों 'किसानी, बेरोजगारी, पलायन और संसाधनों की कमी' पर लोधी की सक्रियता ने उन्हें पार्टी में तेजी से तरक्की दी।
Shivpal Yadav से संबंध कितने गहरे?
अजेंद्र सिंह लोधी का शिवपाल सिंह यादव से अच्छा राजनीतिक तालमेल माना जाता है। बुंदेलखंड और इटावा-औरैया बेल्ट में शिवपाल यादव की संगठनात्मक पकड़ मजबूत रही है। लोधी, अखिलेश (Akhilesh Yadav) और शिवपाल (Shivpal Singh Yadav) दोनों खेमों के बीच संतुलन बनाए रखने वाले नेता के रूप में देखे जाते हैं। दोनों के साथ मंच साझा करने के कई फोटो और कार्यक्रम सार्वजनिक हैं।
Ajendra Singh Lodhi का MPLADS रिपोर्ट कार्ड कैसा? सांसद के काम का लेखा-जोखा
लोकसभा सांसद के रूप में अजेंद्र सिंह लोधी को करीब 9.80 करोड़ रुपये MPLADS फंड आवंटित हुए।

- 118 कार्यों की सिफारिश की गई
- 90 कार्यों को मंजूरी मिली
- कुल 6.41 करोड़ रुपये जारी हुए
- केवल 1 कार्य पूर्ण रूप से पूरा हुआ (20 लाख रुपये खर्च)
- पूर्ण और जारी कार्यों पर कुल 4.40 करोड़ रुपये खर्च
यह आंकड़ा उनके सांसद कार्यकाल की शुरुआती अवधि का है, लेकिन विपक्ष इसे 'काम कम, बोल ज्यादा' की श्रेणी में रखकर आलोचना कर रहा है।
विवादित बयान: क्या कहा अजेंद्र सिंह लोधी ने?
कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में लोधी ने कहा कि मोदी जी जो कुछ बोलते हैं, बहुत अच्छा बोलते हैं। पेट्रोल की खपत कम करें, सोना न खरीदें, लेकिन खुद विदेश यात्राओं पर करोड़ों खर्च कर दें। ये अडानी-अंबानी की सरकार है, देश की नहीं। बंगाल में SIR के जरिए लाखों वोट खत्म किए, फिर EVM बदली। 2027 में सपा की सरकार बन रही है। मुकदमा लिखाएंगे तो लिखा लो, मैं डरने वाला नहीं। उन्होंने स्मार्ट मीटर, फसल बीमा घोटाले, स्कूल बंद करने और स्वास्थ्य व्यवस्था की भी आलोचना की।
BJP ने बताया निंदनीय
BJP नेताओं ने इस बयान को 'अत्यंत निंदनीय' बताया। बीजेपी जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा ने कहा कि प्रधानमंत्री पूरे विश्व में सम्मानित हैं। ऐसा बयान सपा के संस्कार दिखाता है। वहीं, विधान परिषद जितेंद्र सिंह सेंगर ने कहा कि सांसद को माफी मांगनी चाहिए। BJP इसे सपा की हताशा का प्रतीक बता रही है, खासकर पश्चिम बंगाल चुनाव में मिली करारी हार के बाद।
राजनीतिक असर समझें...
- सपा में बौखलाहट: 2024 लोकसभा चुनाव में सपा ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन 2026-27 के आगामी चुनावों से पहले पार्टी पर दबाव बढ़ रहा है। पश्चिम बंगाल में BJP की जीत ने विपक्षी दलों में चिंता बढ़ाई है। अजेंद्र लोधी जैसे युवा नेताओं के आक्रामक बयान इसे 'आक्रामक रक्षा' की रणनीति भी माना जा सकता है।
- PDA फॉर्मूले की परीक्षा : सपा PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) गठजोड़ पर निर्भर है। लोधी जैसे OBC चेहरों को आगे बढ़ाकर पार्टी जातीय समीकरण साधना चाहती है। लेकिन ऐसे बयानों से क्या यह रणनीति उल्टी पड़ रही है? यह सवाल उठ रहा है।
- 2027 UP चुनाव की तैयारी: 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने हैं। सपा BJP के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाकर अपनी कार्यकर्ता बेस को एकजुट रखना चाहती है। लेकिन अभद्र भाषा का इस्तेमाल पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।
- बुंदेलखंड का महत्व: बुंदेलखंड UP की राजनीति में अहम क्षेत्र है। पानी, बिजली, रोजगार और पलायन यहां के प्रमुख मुद्दे हैं। लोधी इन मुद्दों पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन तरीका विवादास्पद हो गया।
2027 के चुनाव तक यह घटना सपा के लिए सबक भी बन सकती है और BJP के लिए प्रचार का हथियार भी। पंजाब और UP की सियासत दिखा रही है कि भारतीय राजनीति में आक्रामकता बढ़ रही है, लेकिन सीमाएं भी तय हैं। अजेंद्र सिंह लोधी भले ही 'डरने वाले नहीं' कह रहे हों, लेकिन उनका यह बयान सपा को कितना महंगा पड़ेगा, यह 2027 के चुनाव नतीजे तय करेंगे।













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