Tamil Nadu Govt Crisis: विजय का होगा राज्याभिषेक या द्रविड़ दिग्गज खेलेंगे कोई खेल? सरकार गठन की 10 संभावनाएं!
Tamil Nadu Govt Crisis: तमिलनाडु की राजनीति इस वक्त अपने सबसे बड़े सस्पेंस दौर से गुजर रही है। विधानसभा चुनाव के नतीजे आए चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक यह साफ नहीं हो पाया कि राज्य में अगली सरकार किसकी बनेगी। सुपरस्टार से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी होने का तमगा तो हासिल कर लिया है, लेकिन सत्ता की कुर्सी अभी भी उनसे 10 सीट दूर नजर आ रही है।
TVK ने 108 सीटें जीतीं, लेकिन विजय को दो सीटों में से एक छोड़नी होगी। ऐसे में पार्टी की संख्या घटकर 107 रह जाएगी। 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है। हालांकि एक सीट खाली होने के बाद प्रभावी संख्या 233 रह जाएगी और बहुमत 117 पर आ सकता है। विजय ने कांग्रेस के पांच विधायकों के समर्थन पत्र के साथ राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर के पास पहुंचे थे लेकिन राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने बहुमत के जादुई आंकड़े (117) की कमी का हवाला देते हुए फिलहाल विजय को सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया है। इसके बाद तमिलनाडु की राजनीति में ऐसे-ऐसे समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई, जिन्हें कुछ दिन पहले तक असंभव माना जा रहा था।

क्या कट्टर दुश्मन DMK और AIADMK एक साथ आएंगे? क्या 'थलपति' विजय कांग्रेस और वामपंथियों के सहारे नैया पार लगाएंगे? या फिर राज्य राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ रहा है? हमने इन समीकरणों को गहराई से खंगाला है। आइए जानते हैं तमिलनाडु की राजनीति में सरकार बनाने (या न बनने) की वो 10 बड़ी संभावनाएं जो इस वक्त चर्चा में हैं।
सीटों का गणित क्या कहता है? (Tamil Nadu Seat Math)
तमिलनाडु विधानसभा का मौजूदा समीकरण इस तरह है:
- TVK - 108
- DMK - 59
- AIADMK - 47
- कांग्रेस - 5
- पीएमके - 4
- IUML - 2
- CPI - 2
- CPI(M) - 2
- VCK - 2
- BJP - 1
- DMDK - 1
- AMMK - 1
यही आंकड़े इस पूरे राजनीतिक ड्रामे की असली कुंजी हैं। अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि सरकार कौन बनाएगा। सवाल यह भी है कि अगर TVK सरकार नहीं बना पाती, तो तमिलनाडु किस दिशा में जाएगा? आइए अब जानते हैं 10 बड़ी संभावनाएं क्या हैं, जो चर्चा में हैं।
▶️1. स्टालिन के नेतृत्व में 'महा-द्रविड़' गठबंधन (DMK-AIADMK Alliance under Stalin Leadership)
यह सुनने में भले ही नामुमकिन लगे, लेकिन राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। पहली संभावना यह है कि विजय की बढ़ती लोकप्रियता को रोकने के लिए DMK (59) और AIADMK (47) हाथ मिला लें। इस फॉर्मूले में एम.के. स्टालिन मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं। दोनों पार्टियों का मानना है कि अगर विजय एक बार सत्ता में आ गए, तो पारंपरिक द्राविड़ राजनीति का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। यह गठबंधन 106 के आंकड़े तक पहुंचता है, जिसे निर्दलीयों और छोटे दलों के सहारे 118 तक ले जाया जा सकता है।
▶️2. पलानीस्वामी का कद और स्टालिन का 'सुपर सीएम' रोल (EPS as CM and Stalin as Super CM)
दूसरी संभावना यह है कि दोनों द्राविड़ पार्टियां साथ आएं, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (EPS) को मिले। इस समीकरण में स्टालिन एक 'सुपर सीएम' या मार्गदर्शक की भूमिका में रहकर पर्दे के पीछे से सरकार चला सकते हैं। यह फॉर्मूला AIADMK के उन कार्यकर्ताओं को शांत करने के लिए हो सकता है जो DMK के साथ जाने के सख्त खिलाफ हैं।
▶️3. सिचुएशनल लीडरशिप: किसी तीसरे चेहरे पर सहमति (A Neutral Face for CM Post)
तीसरी संभावना 'सिचुएशनल लीडरशिप थ्योरी' पर आधारित है। यदि स्टालिन और पलानीस्वामी एक-दूसरे के नाम पर सहमत नहीं होते हैं, तो वे किसी ऐसे चेहरे को मुख्यमंत्री बना सकते हैं जो दोनों के लिए स्वीकार्य हो। यह एक ऐसा न्यूट्रल चेहरा हो सकता है जो सरकार को स्थिरता दे सके और विजय को सत्ता से दूर रख सके।
▶️4. विजय का 'इंद्रधनुष' गठबंधन (Vijay Rainbow Coalition with Congress & Others)
चौथी संभावना के केंद्र में खुद विजय हैं। विजय (107 सीटें) के साथ कांग्रेस (5), पीएमके (4), सीपीआई (2) और वीसीके (2) मिलकर सरकार बना सकते हैं। इसमें भाजपा का एक विधायक भी शामिल हो सकता है। यह गठबंधन बहुमत के बेहद करीब पहुंच जाएगा। कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने पहले ही संकेत दे दिया है कि वे विजय के साथ हैं। उन्होंने DMK पर 'धर्मनिरपेक्षता से विश्वासघात' करने का आरोप लगाते हुए कहा कि DMK अब भाजपा की 'बी टीम' (AIADMK) के साथ खड़ी है।
▶️5. विजय-AIADMK और भाजपा का त्रिकोणीय मेल (TVK, BJP, and AIADMK Tie-up)
पांचवीं संभावना यह है कि विजय की पार्टी TVK, भाजपा और AIADMK के साथ मिलकर सरकार बनाए। इस समीकरण में एक चर्चा यह भी है कि भाजपा AIADMK में सेंधमारी कराकर कुछ विधायकों को विजय के पाले में ला सकती है। हालांकि, इसकी संभावना कम है क्योंकि पलानीस्वामी के समर्थक विधायक फिलहाल काफी एकजुट नजर आ रहे हैं।
▶️6. फ्लोर टेस्ट का गणित और अनुपस्थिति का खेल (The Floor Test Strategy and Absenteeism)
छठी संभावना बहुत दिलचस्प है। भाजपा और विजय मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करें और फ्लोर टेस्ट के दौरान कुछ विपक्षी विधायकों को सदन से अनुपस्थित (Absent) रहने के लिए राजी कर लिया जाए। इससे बहुमत का आंकड़ा नीचे गिर जाएगा और विजय आसानी से विश्वास मत जीत लेंगे। इसी के उलट, विजय (107) और AIADMK (47) का सीधा गठबंधन सबसे सरल रास्ता दिखता है।
AIADMK सांसद एम. थंबीदुरई ने एएनआई से कहा, "जनता चाहती है कि AIADMK फिर से सत्ता में आए। भगवान की कृपा से उचित समय पर AIADMK की सरकार जरूर बनेगी।" उनके इस बयान ने विजय के साथ गठबंधन की अटकलों को और तेज कर दिया है।
▶️7. रजनीकांत: द्राविड़ राजनीति के नए 'किंगमेकर'? (Rajinikanth as the Mediator and CM Face)
सातवीं संभावना सुपरस्टार रजनीकांत से जुड़ी है। रजनीकांत इस वक्त DMK और AIADMK के बीच सेतु का काम कर रहे हैं। चर्चा है कि यदि दोनों दल किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाते हैं, तो वे रजनीकांत को एक 'न्यूट्रल सीएम' के तौर पर स्वीकार कर सकते हैं। यह राज्य के लिए एक बड़ा राजनीतिक सरप्राइज होगा, लेकिन रजनी के दोनों पक्षों से अच्छे संबंधों को देखते हुए इसे नकारा नहीं जा सकता।
▶️8. राष्ट्रपति शासन और दोबारा चुनाव का साया (President's Rule and Fresh Elections)
आठवीं संभावना संवैधानिक संकट की है। यदि कोई भी दल 118 का आंकड़ा पेश नहीं कर पाता, तो राज्यपाल राज्य में 6 महीने के लिए राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं। यह समय भाजपा के लिए नए राजनीतिक विकल्प तलाशने का मौका होगा। यदि 6 महीने में भी बात नहीं बनी, तो राज्य को दोबारा चुनाव (Fresh Polls) की ओर धकेला जा सकता है।
▶️9. द्राविड़ पार्टियों की 'वेट एंड वॉच' नीति (DMK-AIADMK's Wait and Watch Strategy)
नौवीं संभावना यह है कि DMK और AIADMK फिलहाल अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं। वे बाकी पार्टियों (खासकर लेफ्ट और वीसीके) की रणनीति को भांप रहे हैं। द्राविड़ दल हमेशा आखिरी वक्त पर चाल चलने के लिए जाने जाते हैं। हो सकता है कि वे विजय के गठबंधन को भीतर से तोड़कर एक नई और अप्रत्याशित योजना के साथ सामने आएं।
▶️10. विजय का 'इस्तीफा कार्ड' और संवैधानिक पेंच (The Mass Resignation Threat by TVK)
दसवीं और सबसे चौंकाने वाली संभावना विजय की चेतावनी से जुड़ी है। विजय ने कहा है कि यदि उनके अलावा किसी और को सरकार बनाने का मौका दिया गया, तो उनके सभी 107 विधायक सामूहिक इस्तीफा दे देंगे।
गणित समझिए: अगर 234 में से 107 इस्तीफा दे देते हैं, तो सदन की कुल संख्या 127 रह जाएगी।
इस स्थिति में बहुमत के लिए सिर्फ 64 विधायकों की जरूरत होगी।
तब DMK (59) और कांग्रेस (5) मिलकर आसानी से सरकार बना लेंगे।
यह विजय के लिए एक 'आत्मघाती' कदम हो सकता है, लेकिन यह विपक्षी खेमे में खलबली मचाने के लिए काफी है।
▶️राज्यपाल की भूमिका पर क्यों उठ रहे सवाल?
राज्यपाल द्वारा विजय को दो बार सरकार बनाने का मौका न देने के बाद विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस नेता खुलकर TVK के साथ खड़े दिख रहे हैं। वहीं भाजपा का कहना है कि राज्यपाल केवल संवैधानिक प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं।
भाजपा नेता बीएल संतोष ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि अंत में कांग्रेस को ही सबसे ज्यादा राजनीतिक नुकसान होगा। उधर भाजपा प्रवक्ता N. Thirupathy ने कहा कि यह "फ्रैक्चर्ड मैंडेट" है और अगर विजय बहुमत साबित कर देते हैं तो राज्यपाल संवैधानिक रूप से उन्हें मौका देंगे।
▶️ऊंट किस करवट बैठेगा?
तमिलनाडु के इस सियासी ड्रामे में हर मिनट समीकरण बदल रहे हैं। एक तरफ विजय का जोश है, तो दूसरी तरफ स्टालिन और पलानीस्वामी का अनुभव। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बी.एल. संतोष ने चुटकी लेते हुए कहा है, "वक्त ही बताएगा सरकार किसकी बनेगी, लेकिन एक बात तय है... कांग्रेस के हाथ सिर्फ निराशा ही लगेगी।"
फिलहाल सबकी नजरें राजभवन पर टिकी हैं। क्या राज्यपाल विजय को बहुमत साबित करने का एक मौका देंगे या फिर पर्दे के पीछे चल रही 'द्राविड़ जुगलबंदी' कोई नया इतिहास लिखेगी? आने वाले कुछ घंटे तमिलनाडु के अगले 5 साल का भविष्य तय करेंगे।














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