Mobile Network: आज भी देश के 25 हजार से अधिक गांवों में मोबाइल नेटवर्क नहीं
Mobile Network: आधुनिक तकनीक और संचार साधनों ने आमजन का आपस में मेलजोल और वार्तालाप सुगम कर दिया है। मोबाइल ने सामाजिक पुनर्जागरण का एक नया अध्याय लिखा है। आज लोग आसानी से हजारों किलोमीटर दूर अपने नाते-रिश्तेदारों और परिचितों से न केवल मोबाइल पर बात कर सकते हैं, वरन वीडियो कॉल कर लाइव देख भी सकते हैं। बदलते समय ने मोबाइल को मानव जीवन का अनिवार्य अंग बना दिया है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज भी भारत के तकरीबन 25 हजार से अधिक गांवों में मोबाइल काम नहीं करता, क्योंकि वहां नेटवर्क ही नहीं है। इनमें सर्वाधिक गांव ओडिशा और मध्यप्रदेश के हैं। इस सूची में महाराष्ट्र, अरुणाचल, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, मेघालय, झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के गांव भी शामिल हैं। और तो और देश की बॉर्डर की सुरक्षा के लिए तैनात सीमा सुरक्षा बल की 98 चौकियां भी मोबाइल नेटवर्क की सुविधा से वंचित हैं।

25,067 गांवों में आज भी मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और जसकौर मीणा ने देश में मोबाइल सेवा से वंचित गांवों को लेकर सरकार से जानकारी मांगी थी। जिस पर केंद्रीय संचार राज्य मंत्री देवुसिंह चौहान ने दूरसंचार सेवा प्रदाताओं की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के हवाले से बताया कि देश के 5,97,618 बसे हुए गांवों में से 25,067 गांवों में अभी मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं है। सरकार सभी गांवों में मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध कराने की योजना पर तीव्र गति से कार्य कर रही है। फिर भी पांच राज्य ऐसे हैं, जो मोबाइल नेटवर्क में पिछड़े हुए हैं।
पांच राज्य मोबाइल नेटवर्क के मामले में पिछड़े
मोबाइल नेटवर्क के मामले में सबसे पिछड़े राज्यों में सर्वप्रथम ओडिशा आता है। जहां के 6099 गांवों में आज तक मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंचा है। इसके बाद दूसरे पायदान पर मध्यप्रदेश है। यहां के 2612 गांवों में अभी तक मोबाइल की घंटी नहीं बजी है। इसके अलावा महाराष्ट्र के 2328 और तेलंगाना व आंध्रप्रदेश के 1787 गांवों में अभी तक मोबाइल नेटवर्क ने दस्तक नहीं दी है। वहीं राजस्थान में 941 गांव आज भी मोबाइल सेवा से नहीं जुड़ सके हैं। छत्तीसगढ़ के 1847 गांवों में मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं है। वहीं झारखंड के 1144, अरुणाचल के 2223, मेघालय के 1674, उत्तर प्रदेश के 347 गांवों में मोबाइल नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
बीएसएफ की 98 चौकियों पर भी नहीं है नेटवर्क
सबसे बड़ी बात यह है कि राजस्थान में भारत-पाक बॉर्डर पर ऐसी 98 सीमा चौकियां हैं, जहां मोबाइल का नेटवर्क नहीं आता। जिसके चलते जवानों को अपने परिजनों से फोन पर बात भी सेना के लैंडलाइन से ही करनी पड़ रही है। दूर-दूर तक कोई मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण जवान परिजनों से वीडियो कॉल पर भी बात नहीं कर पाते हैं।
मोबाइल नेटवर्क नहीं तो युवकों की शादी नहीं
मोबाइल आज कितनी बड़ी जरूरत बन गया है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नेटवर्क न होने से इन गांवों के कई लड़कों की शादियां नहीं हो पा रही हैं। लड़की के घर वालों का तर्क होता है कि शादी के बाद हम अपनी बेटी से फोन पर बात कैसे करेंगे। वहीं दूसरे शहरों में पढ़ रहे गांव के बच्चे छुटि्टयों में भी यहां नहीं आना चाहते। क्योंकि बिना नेटवर्क के वे ना तो अपने दोस्तों से बात कर सकते हैं, ना ही ऑनलाइन क्लास और दूसरे अपडेट्स का उन्हें पता चल पाता है।












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