Cattle care in Summers : गर्मी के मौसम में मवेशियों को कैसे सुरक्षित रखें पशुपालक किसान, विशेषज्ञ से जानिए
शहरीकरण की अंधी दौड़ में मवेशियों का जीना मुहाल हो गया है। कंक्रीट के फैलते जंगलों के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है। जानिए, चुनौतियों के बीच गर्मियों में मवेशियों की देखभाल कैसे करें
नई दिल्ली, 09 मई : तापमान में जल्दी-जल्दी होने वाले उतार-चढ़ाव से कैसे निपटें। डीडी किसान पर प्रसारित एक लाइव फोन-इन कार्यक्रम में इस सवाल पर डॉ अधिराज मिश्रा ने कहा, तापमान में उतार-चढ़ाव और जलवायु परिवर्तन के बीच प्रोडक्शन प्रभावित होने से पशुपालकों को बड़ा नुकसान होता है। उत्पादों में नुकसान न हो और किसान सह पशुपालकों की आय में भी वृद्धि हो, इसके लिए कई कदम उठाए जाने चाहिए। डॉ अधिराज भारत सरकार के पशुपालन मंत्रालय में सहायक आयुक्त हैं। उन्होंने पशुपालन और गर्मी की चुनौती से कैसे निपटें, इस संबंध में कई सवालों के जवाब भी दिए। गर्मी के सीजन में पशुओं को तनाव मुक्त रखने के लिए आवास के आसपास सफाई रखें। फ्लोर दिन में दो बार धोने से गर्मी से राहत के अलावा थन वाले मवेशियों के रहने की जगह पर सफाई का भी ध्यान रखा जा सकता है। गोशाला ठंडा रखने के उपाय पर डॉ अधिराज ने बताया कि भीगी बोरियों के प्रयोग से ठंडी हवा का ध्यान रखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि कॉमर्शियल जगहों पर स्प्रिंकलर और एग्झॉस्ट पंखों जैसे विकल्प अपनाए जाते हैं। आम लोग छतों में सफेद पेंट का प्रयोग करते हैं। योजनाबद्ध तरीके से छायादार पेड़ों को लगाने से भी गोशाला का ठंडा रखने में मदद मिलती है.

हरे चारे के साथ दिन में तीन बार पिलाएं पानी
पशुपालक मवेशियों को हरा चारा खिलाएं। पशुओं के रहने की जगह पर शेड की ऊंचाई 10 फीट होनी चाहिए, जिससे हवा का संचार हो सके और छत की तपन से मवेशी बेचैन न हों। हरे चारे में 70-90 फीसद पानी की मात्रा होती है, जिससे पानी की कमी नहीं होती। पशुओं के रहने की जगह पर छत पर चार से छह-इंच मोटी घासफूस की परत या छप्पर डाल दें। इससे गर्मी को रोकने में मदद मिलती है। गर्मी में पशुओं को भूख कम लगती है और प्यास ज्यादा। पशुओं को दिन में कम से कम तीन बार पानी पिलाएं। शरीर का तापमान रोकने में मदद मिलती है।
पानी में नमक और आटा मिलाकर पिलाएं
मवेशी के रहने की जगह पर खिड़की, दरवाजों और अन्य खुली जगहों पर बोरी या टाट लगाने के अलावा संभव हो तो पंखे लगवाए जाएं। इससे बेहतर हवा का संचार होने के अलावा पशुओं को छत की तपन से बचाया जा सकेगा। शरीर के तापमान को कंट्रोल करने के लिए पानी में थोड़ी मात्रा में नमक और आटा मिलाकर मवेशी को पिलाने से डिहाइड्रेशन जैसी परेशानी नहीं होती।

ऐसा हो मवेशियों के रहने का आवास
पशुपालन को बिजनेस मॉडल के रूप में अपनाया जा रहा है। हालांकि, ग्लोबल वार्मिंग के कारण पशुपालकों के लिए मवेशी के लिए आवास का इंतजाम करना बड़ा चैलेंज है। डॉ अधिराज मिश्रा ने बताया कि पूर्व और पश्चिम की दिशा में दरवाजे-खिड़की बनाने से गर्मियों में फायदा मिलता है, क्योंकि गर्मी का सीजन लंबा चलता है। दीवार उत्तर और दक्षिण दिशा की ओर बनाने से हवा का प्रवाह बना रहता है। आवास की हाईट 12-15 फीट होनी चाहिए।
मवेशियों को गर्म हवाओं और लू से बचाएं
घर के सेंटर के अलावा साइड में ओवरहैंग के इंतजाम से बारिश के पानी और सूरज की सीधी रौशनी से बचा जा सकता है। गर्मियों के मौसम में पशुओं को गर्म हवा से बचाना चाहिए। पशुओं को लू लगने और शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन जैसी परेशानी होती है, जिससे बचने के लिए गर्म हवाओं के थपेड़ों से बचाने का हरसंभव प्रयास करना चाहिए।
गर्मियों में पशुओं के रहने की जगह बढ़ाएं, तनाव घटेगा
गर्मियों के मौसम में मवेशियों के प्रोडक्शन मैनेजमेंट से जुड़े एक सवाल के जवाब में डॉ अधिराज ने बताया कि दुधारु पशुओं को दिन में कई बार पानी पिलाना चाहिए। गर्मियों में भूसे की बजाय हरा चारा खिलाने का प्रयास करना चाहिए। आवास में गाय या भैंस के लिए 40-45 स्क्वायर फीट की जगह चाहिए, लेकिन गर्मियों में 10 फीसद जगह बढ़ा देनी चाहिए। इससे उनका तनाव कम होगा। पशु चिकित्सक की सलाह पर हर्बल टॉनिक भी दी जा सकती है। गर्मियों में पशुओं की भूख घट जाती है ऐसे में विटामिन, मिनरल मिक्सचर और कैल्शियम टॉनिक पर्याप्त मात्रा में देने से पशुओं की उत्पादकता प्रभावित नहीं होती।

मवेशियों को टीका बरसात से पहले लगवाएं
बीमारियों से बचाव और गर्मियों में पशुओं के रखरखाव से जुड़े एक सवाल पर डॉ अधिराज ने कहा कि गर्मी के सीजन में बहुत अधिक बीमारियां नहीं होतीं, लेकिन बरसात के मद्देनजर मवेशियों का टीकाकरण करा लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि पेट में होने वाले कीड़े जिसे पैरासाइट कहा जाता है, मवेशियों के गोबर की जांच करा कर कृमि नाशक दवाओं की खुराक देनी चाहिए।
किसान क्रेडिट कार्ड के विकल्प मौजूद
मत्स्यपालन, डेयरी और पशुपालन मंत्रालय की ओर से छोटे किसानों को मिलने वाले लाभ के बारे में डॉ अधिराज ने बताया कि फिशरीज और पशुपालन के लिए भी किसान क्रेडिट कार्ड का प्रयोग किया जा सकता है। इसके लिए कैंप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया से जुड़े किसानों को योजनाओं की सूचना फेसबुक-ट्विटर पर भी दी जा रही है।
मवेशियों की देसी नस्ल पर जोर
क्लाइमेट चेंज की चुनौती से निपटने के लिए फसलों की वेराइटी विकसित की गई है। पशुपालन में मवेशी की नस्ल पर डॉ अधिराज ने कहा कि सरकार साल 2014 से ही राष्ट्रीय गोकुल मिशन चला रही है। इसका मकसद देसी नस्ल को बढ़ावा देना है। इन मवेशियों पर तापमान बढ़ने का कम असर होता है। उन्होंने कहा कि विदेशी नस्ल की तुलना में ये मवेशी हीट रेजिस्टेंट होते हैं, बीमारियां कम होती हैं।
मवेशियों के बच्चों की देखभाल
प्रचंड गर्मी के प्रति इंसानों की तरह मवेशी के बच्चे भी संवेदनशील होते हैं। भेड़-बकरी जैसे छोटे जानवरों को गर्मी के प्रकोप से बचाने के उपायों पर डॉ अधिराज ने बताया कि गर्मी के मौसम में सुबह 9 बजे से पहले और शाम में 7 बजे के बाद ही छोटे जानवरों को खुली जगहों पर घास चरने के लिए भेजें। हरे चारे में पानी की मात्रा 70 से 90 फीसद होती है, इससे फायदा होता है। कृमिनाशक दवाएं समय पर देनी चाहिए।












Click it and Unblock the Notifications