मोटी सैलरी वाली नौकरी छोड़ Natural Farming का फैसला, रवि-सुनंदा के पसीने से सींचे खेतों में लहलहा रही फसलें
Natural Farming सुनने में भले ही कमाल का आइडिया लगता है, लेकिन इसकी शुरुआत बेहद चुनौतीपूर्ण होती है। चैलेंज स्वीकार करने के बाद लोग कामयाबी भी हासिल करते हैं। ये कहानी है रवि और सुनंदा नाम के दंपती की।

Natural Farming: लाखों की सैलरी पैकेज छोड़ने के फैसले आसान नहीं होते, लेकिन बुलंद हौसले और आत्मविश्वास से लिए गए ऐसे फैसले कई बार कामयाबी की सुनहरी तहरीरें लिख डालते हैं। तेलंगाना के एक कपल का ऐसा ही प्रयास खेती-किसानी से जुड़ने वाले लोगों के लिए प्रेरणा बन सकता है।
इंजीनियर और लेक्चरर का कमाल
दंपती पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर और लेक्चरर था। इनके बारे में कहना गलत नहीं कि इन्होंने बंद कमरों और एसी वाली नौकरी छोड़कर मिट्टी में मेहनत का रास्ता चुना और कामयाबी से मिसाल भी कायम की।

नैचुरल फार्मिंग में कामयाबी के झंडे गाड़े
कहानी तेलंगाना के आसिफाबाद की है जहां एक तकनीकी विशेषज्ञ और लेक्चरर प्राकृतिक खेती में कामयाबी के झंडे गाड़ रहे हैं। रवि और सुनंदा पर्यावरण के अनुकूल खेती करते हैं। किसानों के लिए रोल मॉडल बनी दंपती की कई विशेषज्ञों ने जमकर तारीफ की है।

कोरोना काल से पहले मोटी कमाई वाली नौकरी
सॉफ्टवेयर इंजीनियर रवि और उनकी पत्नी सुनंदा विजयनगरम गांव में खेती करते हैं। आसिफाबाद के कौटाला मंडल में रहने वाली दंपती करीब चार साल पहले अच्छी-खासी कमाई वाली नौकरी करती थी।

लॉकडाउन में पहली बार खेती
दरअसल, कोविड-19 महामारी के गत करीब तीन साल में बहुत लोगों का जीवन अप्रत्याशित रूप से बदला है। मदनू रवि और उनकी पत्नी सुनंदा का मामला भी कोई अलग नहीं है। 2021 के लॉकडाउन में इस दंपती ने पहली बार खेती में हाथ आजमाया।

मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी के बाद खेती
रवि 2019 तक हैदराबाद की प्रमुख मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर रहे, जबकि सुनंदा तिरुपति के पद्मावती महिला विश्वविद्यालय में लेक्चरर थीं। इन दोनों ने 2021 में लॉकडाउन के दौरान घर से काम करते हुए जब भी समय मिला, प्राकृतिक खेती में हाथ आजमाया।

दो साल का अनुभव, किसानों के लिए रोड मॉडल बने
खेती-किसानी में दो साल का अनुभव लेने के बाद, रवि और सुनंदा अब पर्यावरण के अनुकूल कृषि (Natural Farming) में किसानों के सामने सफल रोल मॉडल के रूप में उभरे हैं। विशेषज्ञों ने दोनों की जमकर तारीफ भी की है।

किन परिस्थियों में खेती की शुरुआत हुई
रवि और सुनंदा की सफल खेती के बारे में तेलंगाना टुडे की रिपोर्ट के अनुसार दोनों ने मिलकर खेती में करियर बनाने का फैसला लिया। माता-पिता के प्रभाव, कुछ समस्याओं और कोविड-19 लॉकडाउन के बीच परिस्थितयां ऐसी बनीं जिसमें उद्यम की प्रेरणा मिली।

मिट्टी का घोल तैयार कर करते हैं खेती
दंपती के अनुसार, जैविक कृषि उत्पादों का सेवन कर स्वस्थ रहने के अलावा खेती में रूचि बढ़ी और उन्होंने देसी फसलों का उत्पादन शुरू किया। दोनों मिट्टी के घोल का उपयोग कर देसी फसलें तैयार करते हैं।

14 एकड़ जमीन पर धान और सब्जियों की खेती
सफल किसान दंपती रवि-सुनंदा अपनी 14 एकड़ जमीन में धान की पांच देसी किस्मों की खेती करते हैं। इसके अलावा, फलियां, दालें, तिलहन और आठ प्रकार की सब्जियां उगा रहे हैं। दोनों खास तरह के मिट्टी के घोल का इस्तेमाल करते हैं।

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मिट्टी की तैयारी में अरंडी के तेल का इस्तेमाल
देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान- पद्म श्री से सम्मानित चिंताला वेंकट रेड्डी ने नैचुरल फार्मिंग करने वाले किसानों के लिए टॉपसॉइल, सबसॉइल और अरंडी के तेल को मिलाकर खास उपचार का आविष्कार किया है। इसे मिलाकर मिट्टी का घोल का तैयार किया जाता है।

आसान और कम लागत वाली खेती
रवि-सुनंदा बताते हैं कि वे खेती के आधुनिक तरीकों से खेती की तुलना में नैचुरल फार्मिंग की प्रक्रिया से फसलों की अधिक उपज हासिल कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती तुलनात्मक रूप से आसान और कम लागत वाली भी थी।

मिट्टी का घोल कैसे मदद करता है
नैचुरल फार्मिंग के लिए खास मिट्टी के घोल के बारे में रवि-सुनंदा बताते हैं कि कीटनाशक, उर्वरक के रूप में काम करता है। मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है। इसका नतीजा होता है कि फसलों की उच्च उपज होती है। सबसॉइल में पौधे के विकास के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व और तत्व होते हैं।

अरंडी के तेल में एंटी वायरल गुण
ऊपरी मिट्टी में पौधे की वृद्धि के लिए आवश्यक कार्बनिक पदार्थ और वसा की मात्रा होती है। यदि वे उन पौधों का सेवन करते हैं जो मिट्टी की परतों से ढके होते हैं, तो कीट मर जाते हैं। अरंडी के तेल में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-वायरल गुण होते हैं।

प्राकृतिक खेती का अध्ययन किया
प्राकृतिक खेती करने से पहले हैदराबाद के आसपास और नागरकुर्नूल, निजामाबाद और मनचेरियल जिलों में स्थित सैकड़ों फार्मों का दौरा किया। ज्ञान और अनुभव बटोरने के बाद इन्होंने खुद ऐसी पहल शुरू की है जिसकी कामयाबी के कारण इन्हें कई पुरस्कार भी मिले हैं।

कई जगहों से सम्मान मिला
रवि और सुनंदा को 2023 में ग्राम भारती से नारी शक्ति पुरस्कार मिला। यदाद्री जिले के आदि गुरु भारती संघ से सर्वश्रेष्ठ किसान पुरस्कार, और महा न्यूज़ चैनल द्वारा रायथु राजू जैविक पुरस्कार और कई कृषि संगठनों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

सोशल मीडिया का भी शानदार इस्तेमाल
सुनंदा ने मास्टर्स डिग्री हासिल की है। रसायन विज्ञान में एमएससी कर चुकीं सुनंदा खेती को लोकप्रिय बनाने में सोशल मीडिया का भी सफल इस्तेमाल कर रही हैं। YouTube पर 'Su nandanam natural farms' नाम के चैनल पर दर्जनों वीडियो इनकी एक्टिविटी का प्रमाण हैं।
फेसबुक पेज और ऑनलाइन बिक्री
बदलते समय में डिजिटल मीडिया की ताकत पहचानने वाला ये कपल फेसबुक पेज भी चलाता है। प्राकृतिक खेती पर किसानों को संवेदनशील बनाने के साथ सुनंदा तेलुगू भाषा में अपने एक्सपीरियंस शेयर करती हैं।
खुदी को कर बुलंद.. सरकारी परिवहन से मिला सहयोग
सुनंदा और रवि को तेलंगाना स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (TSRTC) से भी मदद मिलती है। कार्गो सेवा से सामानों की खेप तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के अलावा कर्नाटक के कई हिस्सों में भेजे जाते हैं। ग्राहकों को ऑनलाइन जैविक कृषि उत्पाद भी बेचा जात है।
(Photo Credit- साभार फेसबुक @Bommisetty Sunanda और यूट्यूब @sunandanamnaturalfarms8429)












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