कम बारिश से पूर्वोत्तर में खेती पर असर, बढ़ेगी महंगाई

Rain
अगरतला/गुवाहाटी। मुख्यत: कृषि पर आधारित पूर्वोत्तर राज्यों में मौजूदा मानसून सत्र में 40 फीसदी कम बारिश हुई है, जिससे विशेषज्ञों ने कृषि और जल की उपलब्धता प्रभावित होने का अंदेशा जताया है। कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के मुताबिक इस साल बारिश प्रतिकूल रही है।

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक मौजूदा मानसून सत्र (जून-सितंबर) में मणिपुर में 70 फीसदी, मेघालय में 50 फीसदी, नागालैंड में 40 फीसदी, मिजोरम में 34 फीसदी, अरुणाचल प्रदेश में 31 फीसदी, असम में 25 फीसदी और त्रिपुरा में 24 फीसदी कम बारिश हुई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून के दौरान कम बारिश से मौसमी खेती प्रभावित होती है और मानसून सत्र के बाद अधिक बारिश होने से सब्जियों और बागवानी खेती प्रभावित होती है। इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (आईसीएआर) के वैज्ञानिक मृणमॉय दत्ता ने कहा कि इस साल पूरे पूर्वोत्तर में खेती के लिए मानसून अनुकूल नहीं रहा।

असम के कृषक संगठन ने राज्य सरकार से सूखे जैसी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहने की मांग की है। दुनिया में सबसे गीले क्षेत्र के रूप में विख्यात दक्षिणी मेघालय के सोहरा में भी 15-16 फीसदी कम बारिश हुई है। सोहरा को पहले चेरापूंजी के नाम से जाना जाता था।

कृषि विशेषज्ञ बहारुल इस्लाम मजूमदार ने आईएएनएस से कहा, "मानसून के बाद अधिक बारिश होने से शीत ऋतु की फसलें, सब्जियां और बागवानी से संबंधित फसल प्रभावित हो सकती हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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