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आकाश का कमालः मल्टी लेयर में 44 फसलें, किसानों को लखपति बनाने का निकाला फाॅर्मूला

सागर के युवा किसान आकाश चौरसिया ने मल्टी लेयर फार्मिंग में कमाल ही कर दिया। उन्होंने सवा एकड़ में 44 प्रकार की फसलें सब्जियां एक साथ लगाई हैं। उनका यह खेत सालभर करीब 250 लोगों के लिए भोजन के बराबर उपज प्रदान करेगा।

Akash Chourasia


सागर से लेकर दुबई तक मल्टी लेयर फार्मिंग के मॉडल फॉर्म हाउस तैयार कराकर आकाश चौरसिया दुनियाभर के किसानों के लिए आर्दश बन गए हैं। जैविक खेती को बढ़ावा देने वाले आकाश ने अपने सवा एकड़ के एक खेत में अनूठा प्रयोग (इन्वेंटर) किया है। उन्होंने इसमें एक साथ पांच लेयर में 44 प्रकार की फसलें लगाई हैं। उनका दावा है कि इस मॉडल से किसान एक साल में 100 प्रतिशत लखपति बन सकते हैं। आकाश देश-दुनिया भर के किसानों को जैविक, गो आधारित, विषरहित व मल्टी लेयर फार्मिंग का लगातार प्रशिक्षण देते हैं।

मल्टी लेयर फार्मिंग

आकाश चैरसिया ने सागर के कपूरिया स्थित अपने खेत में एक आदर्श जैविक खेती का मॉडल तैयार किया है। इसमें उन्होंने करीब सवा एकड़ के एक खेत में देशी ग्रीन हाउस (पॉलीहाउस) तैयार किया है। इसके अंदर तीन-तीन फीट के बेड बनाए हैं। यहां उन्होंने जमीन के अंदर मिट्टी पर उगने वाली और बेल व फल वाले पौधे लगाए हैं। एक साथ यह जमीन पांच फसलें देती है।

मल्टी लेयर फार्मिंग

इस खेत को तैयार करने के लिए उन्होंने बांस, ग्रीननेट, खास, वर्मी कम्पोस्ट, वर्मीवाश का उपयोग किया है। यहां पर उन्होंने फरवरी-मार्च में मिट्टी के बेड तैयार कर एक साथ 44 फसलें लगाई हैं। यह अपने आप में अब तक का रिकाॅर्ड है। आकाश जैविक खेती का लंबे समय से प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। भारत के लगभग सभी प्रांतों से लोेग उनके यहां जैविक खेती का प्रशिक्षण लेने लोग आते हैं।

मल्टी लेयर फार्मिंग

महज सवा एकड़ में कैसे उगा सकते हैं 44 फसलें
आकाश चैरसिया ने वनइंडिया.हिन्दी से बात करते हुए बताया कि सबसे पहला काम वे खेत की मिट्टी को सुधारने के लिए करते हैं। मिट्टी का पूरा ट्रीटमेंट कर उसकी उर्वरकता को बढ़ाते हैं। उनके खेत में मिट्टी बिलकुल चायपत्ती जैसी भुरभुरी बनाई गई है। बांस, तार और ग्रीन नेट से बनाए गए देशी ग्रीन हाउस में बेमौसम फेसलें भी अच्छी उपज देती हैं। आकाश के अनुसार हर फसल और पौधे का एक तय रूटजोन होता है, इसलिए वे आपस में टकराव नहीं करते हैं और आसानी से विकसित होकर अच्छी उपज प्रदान करते हैं। इनके तल को अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है। आकाश सीधे शब्दों में बताते हैं कि जंगल हमें सिखाते हैं कि एक साथ कई पेड़-पौधे कैसे उग सकते हैं। हमें कुदरत के सिस्टम से सीखना चाहिए। जब तक हम प्रेक्टिकल नहीं करेंगे, सीखेंगे नहीं तक तक खेती में आगे नहीं बढ़ सकते।

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    सागर के आकाश चौरसिया ने मल्टी लेयर में खेत में लगाई 44 किस्म की फसलें

    यह 44 प्रकार फसलें एक खेत में लगाई गई हैं

    :- कंद वाली फसलें (जमीन के अंदर)
    1 - अदरक
    2- पीली हल्दी
    3- काली हल्दी
    4- अरबी

    ----------------

    :- पत्ती वाली फसलें (फर्स्ट फ्लोर)
    1- धनिया
    2- पालक
    3- चोलाई
    4- मैथी नार्मल
    5- लाल भाजी
    6- नौरपा भाजी
    7-चेतुआ भाजी
    8- नोनिया भाजी
    9- कस्तूरी मैथी
    10- राजगिरा भाजी
    11-लेट्यूस
    -------------------

    :- लता वाली फसलें (सेकंड फ्लोर)
    1 लोकी
    2 गिलकी
    3 तोरई
    4 टिंडा
    5 ककड़ी
    6 करेला
    7 खीरा
    8 परवल
    9 कुंदरू
    10 ककोड़ा
    11 तरबूज
    12 खरबूज
    -----------------
    :- फल वाली फसलें (थर्ड फ्लोर)
    1 पपीता
    2 सहजन
    3 केला
    ------------------

    :- फूल-फल वाली फसलें (ग्रांउड प्लस फर्स्ट फ्लोर)
    1 बैगन
    2 मिर्ची
    3 टमाटर
    4 भिंडी
    5 ब्रोकली
    6 शिमला मिर्च
    7 लोंग मिर्च
    8 बरबती
    9 हरा प्याज
    10 हरा लहसुन
    11 बाजरा
    12 रागी
    13 कोंदो

    --------------------

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