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Mango as snack : 'सुपरफूड' है एक कप आम, शरीर की सूजन घटाने में मदद, बॉडी ग्लूकोज भी कंट्रोल

'फलों का राजा' कहा जाने वाला आम (mango) एक कप सुपरफूड से कम नहीं। एक कप आम में 20 से अधिक विटामिन मिलते हैं। नाश्ते में आम खाने से सेहत पर शानदार प्रभाव पड़ता है। जानिए

फ्लोरिडा (अमेरिका), 28 मई : एक अध्ययन में कहा गया है कि 'फलों का राजा' आम स्नैक (snack- नाश्ता) के रूप में भी खाया जा सकता है। इसके नियमित सेवन से स्वास्थ्य पर सकारात्मक परिणाम देखे गए हैं। अमेरिका में हुई इस स्टडी से पता लगा है कि बच्चों और बड़ों के अलावा गर्भवती महिलाओं को भी आम खाने से फायदा होता है। नाश्ते में आम (mango as snack) नियमित सेवन से शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी नहीं होती। शरीर में ग्लूकोज की मात्रा नियंत्रित करने में भी आम मददगार साबित होता है। एक कप आम में 99 कैलोरी और 20 से अधिक अलग-अलग विटामिन और खनिज पाए जाते हैं। पोषक तत्वों से भरपूर आम 'सुपरफूड' से कम नहीं। इस रिपोर्ट में जानिए कि आम को स्नैक्स के रूप में खाने से किस तरह के लाभ मिलते हैं।

आमों का सेवन स्नैक्स के रूप में

आमों का सेवन स्नैक्स के रूप में

बेहतर ग्लूकोज नियंत्रण, शरीर में सूजन और जलन कम करने में आम का सेवन लाभदायक साबित होता है। पॉजिटिव असर को देखते हुए कहा जा सकता है कि आमों का सेवन स्नैक्स के रूप में किया जाना चाहिए। पूरे आम स्नैक्स की तरह (whole mangos as a snack) खाने से बेहतर स्वास्थ्य परिणाम मिले हैं। दूसरी ओर नियंत्रित स्नैक का परिणाम उतना अच्छा नहीं पाया गया।

वयस्कों में आम के सेवन से ग्लाइसेमिक कंट्रोल

वयस्कों में आम के सेवन से ग्लाइसेमिक कंट्रोल

'न्यूट्रिशन, मेटाबॉलिज्म एंड कार्डियोवैस्कुलर डिजीज' में प्रकाशित पायलट स्टडी में आम को स्नैक के रूप में देखा गया। इस स्टडी में पाया गया कि मोटे और ओवरवेट की समस्या से जूझ रहे वयस्कों में आम के सेवन से ग्लाइसेमिक कंट्रोल हुआ, सेहत के संदर्भ में दूसरे फैक्टर्स में भी सुधार हुआ, साथ ही शरीर में जलन और सूजन (inflammation) की समस्या कम हुई। रिसर्च के दौरान पाया गया कि 97 प्रतिशत अमेरिकी वयस्क स्नैक्स का सेवन करते हैं। ये उनकी दैनिक ऊर्जा सेवन का 24 प्रतिशत होता है। स्टडी में रोजाना 100 कैलोरी ताजे आम वाले नाश्ते की तुलना कम वसा वाले कुकीज़ से की गई। दोनों कैलोरी में बराबर थे।

12 सप्ताह तक नाश्ते में आम

12 सप्ताह तक नाश्ते में आम

आम स्नैक के रूप में कितना लाभदायक है, यह समझने के लिए हुई स्टडी में 27 वयस्कों ने भाग लिया। सभी की बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) के आधार पर ओवरवेट (overweight) या मोटापा के साथ वर्गीकृत किया गया। इन लोगों में किसी भी तरह की दूसरी स्वास्थ्य समस्या नहीं थी। प्रतिभागियों को 12 सप्ताह तक उनके सामान्य आहार के मुताबिक शारीरिक स्तर को बनाए रखते हुए नाश्ते के रूप में या तो आम दिया गया या कम वसा वाली कुकीज़ दी गईं। चार-सप्ताह की अवधि (wash-out period) बीतने के बाद 12 सप्ताह तक दोबारा वैकल्पिक स्नैक दिए गए।

आम खाने से सूजन और जलन में कमी

आम खाने से सूजन और जलन में कमी

स्टडी के लिए फिक्स टाइम के बाद शोधकर्ताओं ने शरीर में ग्लूकोज, इंसुलिन, लिपिड प्रोफाइल, लीवर फंक्शन एंजाइम समेत सूजन और जलन का प्रभाव मापा। स्टडी से मिले परिणामों के मुताबिक आम के सेवन से ग्लाइसेमिक (glycemic) नियंत्रित करने में मदद मिली। आम के प्रभाव से ग्लाइसेमिक लेवल में सुधार हुआ। ग्लाइसेमिक ब्लड ग्लूकोज लेवल को मैनेज करने सहित मधुमेह की बीमारी रोकने में महत्वपूर्ण कारक है। लोगों के शरीर में सूजन और जलन दोनों में कमी भी आई।

आम में कुकीज से अधिक चीनी, नुकसान नहीं

आम में कुकीज से अधिक चीनी, नुकसान नहीं

अमेरिका में मानव शरीर पर आम के प्रभाव की स्टडी में पता चला कि प्रतिभागियों ने जब नाश्ते में कम वसा वाले कुकीज़ खाए तो उनके ब्लड ग्लूकोज (blood glucose) लेवल में कोई गिरावट नहीं आई। हालांकि, जब नाश्ते में आम खाए गए तो चार सप्ताह में और फिर 12 सप्ताह में ब्लड ग्लूकोज (blood glucose) के स्तर में 0.004 (p= 0.004) की कमी आई। ये कमी इसलिए भी अहम है क्योंकि कुकीज़ की तुलना में आमों में चीनी स्वाभाविक रूप से दोगुनी थी।

मेडिकल साइंस में दिखे आम के प्रभाव
शोधकर्ताओं ने नाश्ते में आम खाने पर कुछ और महत्वपूर्ण सुधार भी देखे। मेडिकल साइंस में इन फैक्टर्स को टोटल एंटीऑक्सीडेंट कैपेसिटी (total antioxidant capacity -TAC) और सी रिएक्टिव प्रोटीन (C-reactive protein -CRP) कहा जाता है। TAC में एंटीऑक्सीडेंट का स्तर मापा जाता है। यानी खाद्य पदार्थ कोशिकाओं में ऑक्सीडेशन (oxidation) कितनी अच्छी तरह रोक सकते हैं। CRP का उपयोग शरीर में सूजन या जलन (inflammation) मापने के लिए किया जाता है।

जिन्हें मीठा स्नैक्स पसंद उनके लिए अच्छी खबर

जिन्हें मीठा स्नैक्स पसंद उनके लिए अच्छी खबर

स्टडी में शामिल प्रमुख सदस्य प्रोफेसर डॉ मी यंग होंग (Dr. Mee Young Hong) के मुताबिक आम में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। ऐसे में कुकीज़ की तुलना में सूजन और जलन से अधिक सुरक्षा मिलती है। आम के हेल्थ बेनिफिट पर स्टडी के परिणामों से पता चलता है कि आम में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट के अलावा फाइबर और पॉलीफेनोल्स (polyphenols) भरपूर मात्रा में होता है। ऐसे में चीनी की खपत कम करने और ग्लूकोज नियंत्रण में मदद मिल सकती है। एंटीऑक्सिडेंट सूजन और जलन से सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। डॉ होंग सैन डिएगो स्टेट यूनिवर्सिटी में व्यायाम और पोषण विज्ञान स्कूल में प्रोफेसर हैं। उन्होंने कहा कि आम के फायदों पर आगे और शोध की जरूरत है। हालांकि, शुरुआती निष्कर्ष मीठे स्नैक्स का आनंद लेने वाले लोगों के लिए उत्साहजनक हैं।

आम की सर्वोत्तम खुराक पर और शोध जरूरी

आम की सर्वोत्तम खुराक पर और शोध जरूरी

शरीर पर आम के प्रभाव की स्टडी की कुछ सीमाएं भी रहीं। इनमें आम की केवल एक खुराक का उपयोग करके सैंपल लेना, ऐसे प्रतिभागियों पर आम के प्रभाव को मापना जिन्हें पहले से कोई स्वास्थ्य संबंधी परेशानी नहीं थी, शामिल हैं। स्टडी में कहा गया है कि भविष्य में होने वाले शोध में आम की सर्वोत्तम खुराक (optimal dose of mango) का पता लगाना चाहिए। रिसर्चर्स का मानना है कि मेटाबॉलिज्म (metabolic conditions) से जुड़ी समस्या से जूझ रहे लोगों में आम के सेवन के दीर्घकालिक प्रभावों की जांच करनी चाहिए। स्टडी से जुड़े लोगों का मानना है कि आम में पाए जाने वाले बायोएक्टिव कंपाउंड के असर का अलग आकलन करना चाहिए। आम के फाइबर तुलना ऐसे ही फाइबर वाले दूसरे स्नैक से करना भी फायदेमंद माना गया है।

18 साल के आंकड़े पर हुई स्टडी

18 साल के आंकड़े पर हुई स्टडी

दरअसल, दुनिया भर की खानपान की संस्कृतियों में आमों का व्यापक सेवन किया जाता है। स्वास्थ्य पर आम के लाभ से जुड़ी रिसर्च से स्वस्थ आहार में आम को शामिल करने के महत्व को बेहतर ढंग से समझने में योगदान दिया है। एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार 'न्यूट्रिएंट्स' ('Nutrients' and 'Nutrition, Metabolism & Cardiovascular Diseases') में आम खाने के फायदे पर रिसर्च की रिपोर्ट पब्लिश हुई है। इस स्टडी में 2001-2018 के दौरान हुए सर्वे- यूनाइटेड स्टेट्स नेशनल हेल्थ एंड न्यूट्रिशन एग्जामिनेशन सर्वे (United States National Health and Nutrition Examination Survey (NHANES) 2001-2018) के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें नियमित आम खाने वाले लोगों के शरीर में पोषक तत्वों की तुलना उन लोगों से की गई, जिन्होंने आम का नियमित सेवन नहीं किया।

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