Greenhouse Farming : बिजली बिल में 33 फीसद बचत कर सकते हैं किसान
ग्रीन हाउस में खेती फसलों की सुरक्षा के अलावा आर्थिक नजरिए से भी मुनाफा देने वाला है। अमेरिका में हुई रिसर्च के मुताबिक ग्रीन हाउस में खेती से 33 फीसद बिजली बिल बचाया जा सकता है।
जॉर्जिया, 06 जून : वर्तमान दौर को आर्थिक युग कहा जाता है। यहां कदम-कदम पर पैसों की जरूरत पड़ती है। बात चाहे सामान्य जीवन जीने की हो या खेती किसानी की। हर क्षेत्र में पैसों के जरूरत बढ़ती जा रही है। खास तौर पर खेती-किसानी में किसानों को कम लागत में खेती करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। कई बार तो लागत तक वसूल नहीं होती और औने-पौने दाम पर फसलों और कृषि उत्पादों को बेचना पड़ता है। हालांकि, अगर वैज्ञानिक तरीकों का सहारा लिया जाए तो पहली बार में भले ही थोड़े अधिक पैसे खर्च करने पड़ें, लेकिन आने वाले दिनों में किसान अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते हैं। ऐसी ही एक तकनीक है ग्रीन हाउस फार्मिंग (greenhouse farming)। एक एकड़ में ग्रीन हाउस का स्ट्रक्चर खड़ा करने के लिए 40-60 लाख रुपये का खर्च आता है, लेकिन उत्साहजनक बात ये भी है कि बैंक से हॉर्टिकल्चर में वित्तीय मदद मिलती है। वनइंडिया हिंदी की इस रिपोर्ट में जानिए ग्रीन हाउस फार्मिंग से जुड़ी कुछ रोचक बातें

ग्रीन हाउस में क्या उगा सकते हैं
ग्रीनहाउस फार्मिंग के अंतर्गत पॉली हाउस और शेडनेट जैसी चीजें आती हैं। ग्रीन हाउस मूलतः फ्लोरीकल्चर यानी फूलों की खेती और हॉर्टिकल्चर से जुड़ा है। फूलों और फल-सब्जी की खेती में काम आने वाले ग्रीन हाउस में टमाटर, स्ट्रॉबेरी की खेती के साथ-साथ केसर की खेती भी की जा सकती है। एक शोध में यह बात सामने आई है कि किसानों का बिजली बिल में कटौती की दिशा में ग्रीन हाउस कारगर साबित हो सकता है।
ऐसी खेती के लिए ग्रीन हाउस आदर्श
- सब्जियों और फूलों की खेती
- फूलों में जरबेरा और डच गुलाब का उत्पादन
- कई रंगों में शिमला मिर्च और खीरे की उन्नत प्रजाति की खेती।
- फूलों की खेती में पूरे साल उत्पादन
- सीजन खत्म होने के बाद भी सब्जियों और फलों का उत्पादन
- पानी की कम जरूरत
- बीमारियों से बचाव में कीटनाशकों का प्रभावी इस्तेमाल

बिजली बिल में 33 फीसदी तक बचत
अमेरिकी शहर जॉर्जिया में हुई रिसर्च में कहा गया है कि ग्रीन हाउस फार्मिंग के दौरान इंटरनेट से जुड़ी हुई लाइटिंग सिस्टम का उपयोग करने पर बिजली के बिल में उल्लेखनीय कमी आती है। ग्रीन हाउस में नियंत्रित तापमान होता है। इसके अलावा पर्यावरण से जुड़ी दूसरी चीजों को भी नियंत्रित किया जा सकता है। रिसर्च में यह भी सामने आया है कि प्रेडिक्टिव लाइटिंग कंट्रोल सिस्टम (Predictive lighting control system) की मदद से किसान अपने बिजली बिल में 33 फीसदी तक बचत कर सकते हैं। हाल ही में इजराइल दौरे पर गए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी वहां के ग्रीन हाउस का दौरा कर जानकारी ली थी।

ग्रीन हाउस में 10 से 12 गुना अधिक केसर उत्पादन
ग्रीन हाउस के लाभ का एक उदाहरण केसर की खेती ग्रीन हाउस में करने का चलन बढ़ना भी है। एक अनुमान के मुताबिक ग्रीन हाउस में 10 से 12 गुना अधिक केसर उत्पादन होता है। हॉर्टिकल्चर में ग्रीनहाउस काफी मददगार होता है। सैफ्रॉन एक मुख्य हॉर्टिकल्चर फसल है जिसमें मार्केट की डिमांड के मुताबिक लाखों रुपए की आमदनी भी होती है।
ग्रीनहाउस में इकोलॉजिकल सिस्टम कंट्रोल
जम्मू-कश्मीर में सितंबर 2014 में आई बाढ़ के बाद काफी हद तक केसर की खेती वाली जमीनों पर असर पड़ा। ऐसे में ग्रीनहाउस स्ट्रक्चर काफी मददगार साबित होता है। ग्रीनहाउस टेक्नोलॉजी में इकोलॉजिकल सिस्टम को कंट्रोल किया जा सकता है। ग्रेटरकश्मीर डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में 15,000 से अधिक परिवार और 200 से अधिक गांव केसर के खेती से सीधे या इनडायरेक्ट तरीके से जुड़े हैं। ऐसे में इनके उत्पादन की गुणवत्ता सुधारने के लिए ग्रीन हाउस टेक्नोलॉजी अपनाए जाने की जरूरत है।

धूप न खिलने पर भी पौधों को मिलती है रौशनी
ग्रीन हाउस के लाइटिंग सिस्टम की मदद से पौधों के लिए जरूरी रोशनी उसी समय जलती है जब जरूरत हो। यानी अगर सूरज की रोशनी पड़ रही हो लाइटिंग सिस्टम खुद ब खुद बंद हो जाता है। रिसर्च में कहा गया है कि बारिश और बादल वाले दिनों में पौधों को लाइट का सप्लीमेंट (आर्टिफिशियल लाइट से पौधों के लिए जरूरी रोशनी) दिया जाता है। जिससे धूप न खिलने पर भी पौधों पर बुरा असर ना पड़े। यह भी रोचक है कि प्रभावी होने के साथ-साथ ग्रीन हाउस की लाइटिंग थोड़ी महंगी भी है। 2017 की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के हॉर्टिकल्चर में हर साल 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर की बिजली खपत हुई। आंकड़े यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी ने जारी किए हैं।

लाइटिंग को कंट्रोल करने के विकल्प
अमेरिका में ग्रीन हाउस पर हुए रिसर्च के संबंध में कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चरल एंड एनवायरमेंटल साइंस के प्रोफेसर मार्क वन इरसेल (Marc Van Iersel) ने बताया कि बाजार में एलईडी लाइट आने के बाद ग्रीन हाउस की संरचना के लिए अवसर पैदा हुए हैं। इसमें लाइटिंग को कंट्रोल किया जा सकता है, जो पहले संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि लाइटिंग को ऑप्टिमाइज करने के लिए काफी शोध किए गए हैं। बकौल इरसेल, लाइटिंग सिस्टम के स्मार्ट कंट्रोल के लिए की दिशा में कोई काम नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि ग्रीन हाउस में लगी लाइटों के लिए बिजली का खर्च ग्रीन हाउस संचालन में लगने वाले खर्च का 10 से 30 परसेंट के बीच होता है।

सूरज की रौशनी का पूर्वानुमान !
यूनिवर्सिटी आफ जॉर्जिया के शोधकर्ताओं ने एक नया लाइटिंग सिस्टम तैयार किया है। इसकी मदद से ग्रीनहाउस की इलेक्ट्रिकल डिमांड यानी बिजली की जरूरत कम होती है। पौधों को भी नुकसान नहीं होता यूनिवर्सिटी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र शीरीन अफजाली (Shirin Afazli) ने कंट्रोल सिस्टम विकसित किया है। इसमें सेंसर का उपयोग किया गया है। सेंसर की मदद से ग्रीन हाउस के बाहर के मौसम का पता लगाया जा सकता है।
रोशनी का अनुमान लगाने की प्रोग्रामिंग
पीएचडी स्टूडेंट साहांद मोसार्फियां (Sahand Mosharafian) और एसोसिएट प्रोफेसर जावेद मोहम्मदपुर वेलिनी (Javad Mohammadpour Velni) ने अपने लैबोरेट्री में लाइट प्रोडक्ट इन एल्गोरिदम (light-predicting algorithms) तैयार किया। दोनों को एक साथ मिलाने पर आने वाले दिनों में इस सिस्टम की मदद से भविष्य की सूरज की रोशनी का अनुमान लगाया जा सकेगा ऐसा होने के कारण लाइट को ऑप्टिमाइज करने में मदद मिलती है और पौधों को सही मात्रा में रोशनी मिल पाती है।

ग्रीन हाउस से वसंत ऋतु में अधिक बचत
बता दें कि ग्रीन हाउस का उपयोग अधिकांशतः जाड़े और वसंत ऋतु के दौरान किया जाता है। शोध में जुटी टीमों ने दोनों सीजन में अपने सिस्टम का परीक्षण किया। दोनों में सफलता भी हासिल हुई। ग्रीन हाउस में लाइट ऑप्टिमाइजेशन का प्रभाव दोनों सीजन में देखा गया, लेकिन वसंत ऋतु में बड़ा असर देखा गया। दोनों सीजन में पौधों के विकास में रुकावट के बिना लाइट ऑप्टिमाइजेशन से 33 फीसदी बिजली बिल की बचत हुई। हालांकि, जाड़े के दिनों में बचत घटकर चार परसेंट रह गई। इस सिस्टम से बिजली के बिल में अधिकांश बचत तब हुए जब सूरज की रोशनी खिली हुई थी। जाड़े के मौसम में दिन छोटे होते हैं। ऐसे में ग्रीन हाउस में लगाई गई बिजली ऑन रखने की जरूरत पड़ती है। इस कारण बिजली के बिल में महज चार पर्सेंट ही बचत देखी गई।

कम खर्चे में खाद्य पदार्थों का उत्पादन
शोधकर्ताओं के मुताबिक ग्रीन हाउस की खेती में आने वाला खर्च और कम हो सकता है। शोध में कहा गया कि जॉर्जिया में हुई रिसर्च के दौरान बिजली के फिक्स्ड कॉस्ट पर आकलन किया गया है, लेकिन रियल वर्ल्ड में खेती के दौरान लागत घटती-बढ़ती रहती है। यानी कीमतें अलग-अलग होती हैं। बहरहाल, इस शोध की कामयाबी को देखते हुए कहा जा सकता है कि धरती पर घट रहे संसाधनों के बीच ग्रीन हाउस जैसे विकल्पों के माध्यम से कम खर्चे में पैदा होने वाले खाद्य पदार्थ उत्साहजनक संकेत दे रहे हैं। अमेरिकी शहर जॉर्जिया में हुई स्टडी 'प्लांट्स जर्नल' में प्रकाशित हुई है।
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