Karnataka Donkey Farm : एक लीटर दूध 5000 में ! भारत के दूसरे डंकी फार्म को 17 लाख का ऑर्डर
एक लीटर दूध की कीमत 5 हजार रुपये। सुनने में ये चौंकाने वाला जरूर लगता है, लेकिन कर्नाटक में एक युवक के डंकी फार्म पर गधी का दूध इसी कीमत पर बिक रहा है। जानिए कर्नाटक में पहले गधे का फार्म खोलने वाले युवक की कहानी।
मेंगलुरु (कर्नाटक), 13 मई : क्या एक लीटर दूध की कीमत हजारों रुपये हो सकती है ? अगर आपका जवाब ना है, तो पढ़िए ये खबर। एक युवक ने स्नातक (BA) तक पढ़ाई के बाद कर्नाटक में गधों का फार्म (Karnataka Donkey Farm) खोला है। कर्नाटक के पहले डंकी फार्म पर गधी के दूध (donkey milk) के लिए 17 लाख रुपये का ऑर्डर मिल चुका है। समाचार एजेंसी पीटीआई की ओर से जारी खबर में दावा किया गया है कि गधी का दूध दुर्लभ और औषधीय गुणों से भरपूर है। इस कारण एक लीटर दूध लगभग 5 हजार रुपये में बेचा जा रहा है। पढ़िए, कर्नाटक के डंकी फार्म पर गधी के दूध के लिए 17 लाख रुपये का ऑर्डर मिलने की कहानी।
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महाराष्ट्र में donkey milk 10 हजार रुपये प्रति लीटर !
गौरतलब है कि वनइंडिया हिंदी इससे पहले एक लीटर दूध 10 हजार रुपये में बेचे जाने की खबर दिखा चुका है। ये मामला महाराष्ट्र के उस्मानाबाद का था। अगस्त, 2021 में गधी का दूध 10 हजार रुपये प्रति लीटर बिकने की खबर सामने आई थी। जानिए कर्नाटक के पहले डंकी फार्म की कहानी

कर्नाटक का पहला, भारत का दूसरा गधा फार्म
मेंगलुरु दक्षिण कन्नड़ जिले में आता है। यहां के बंतवाल गांव में 42 वर्षीय व्यक्ति ने गधे का फार्म शुरू कर इतिहास रच दिया है। गत 8 जून को खुला यह फार्म कर्नाटक में अपनी तरह का पहला और केरल के एर्नाकुलम जिले के बाद देश में दूसरा है।

क्यों शुरू किया डंकी फार्म ?
डंकी फार्म शुरू करने वाले श्रीनिवास गौड़ा का कहना है कि उन्होंने गधों की दुर्दशा से विचलित होने के बाद डंकी फार्म शुरू करने का फैसला लिया। श्रीनिवास बताते हैं कि गधों को अक्सर ठुकरा दिया जाता है। उन्हें कम आंका जाता है। ऐसे में उन्होंने अपनी जमीन पर गधों का फार्म शुरू कर इनकी देखरेख का फैसला लिया।

2.3 एकड़ जमीन पर शुरू किया इसीरी फार्म्स
स्नातक (BA) तक डिग्री लेने के बाद गौड़ा ने गधों का फार्म ही क्यों चुना ? इस पर श्रीनिवास गौड़ा बताते हैं कि पहले उन्होंने एक सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी की। नौकरी छोड़ने के बाद सबसे पहले 2020 में इरा गांव में 2.3 एकड़ जमीन पर इसीरी फार्म्स (Isiri farms) की शुरुआत की। इस केंद्र को एकीकृत कृषि और पशुपालन, पशु चिकित्सा सेवाएं, प्रशिक्षण और चारा विकास केंद्र (integrated agriculture and animal husbandry, veterinary services, training and fodder development centre) के रूप में जाना जाता है।

गधों से पहले खरगोश और मुर्गे भी पाले
श्रीनिवास गौड़ा अपने काम के बारे में बताते हैं कि उनके इसीरी फार्म्स पर बकरी पालन से शुरुआत की गई। इस केंद्र पर खरगोश और कड़कनाथ मुर्गे (Kadaknath chicken) भी पाले जाते हैं। गौड़ा ने कहा कि बाद में गधों का फार्म भी शुरू किया। इसमें 20 गधे हैं। बता दें कि कड़कनाथ मुर्गे छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक वातावरण में पलते हैं। मार्केट डिमांड और अच्छा मुनाफा देखते हुए अब दूसरे राज्यों में भी कड़कनाथ मुर्गों के फार्म खोले जा चुके हैं। कड़कनाथ की कीमत हजार रुपये प्रति किलो तक मिलती है।

गधी का दूध महंगा, औषधीय गुणों से भरपूर
डंकी फार्म के पीछे प्रेरणा के बारे में श्रीनिवास बताते हैं कि देश में गधों की प्रजातियों की संख्या घट रही हैं। अब धोबियों के बिजनेस में कपड़े धोने की मशीन और लिनन धोने के लिए अन्य तकनीकों का प्रयोग हो रहा है। ऐसे में गधों का उपयोग नहीं किया जाता। वे बताते हैं कि जब गधे का फार्म शुरू करने का विचार दोस्तों के साथ शेयर किया तो लोग आशंकित थे। उनका मजाक भी उड़ाया गया, लेकिन गधी का दूध स्वादिष्ट, बहुत महंगा और औषधीय महत्व का होता है।

गधी का दूध 150 रुपये में 30 मिलीलीटर !
डंकी फार्म के बारे में भावी योजना के बारे में श्रीनिवास गौड़ा बताते हैं कि लोगों को गधी का दूध पैकेट में पैक कर बेचने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि 30 मिलीलीटर दूध के पैकेट की कीमत 150 रुपये होगी। इसकी सप्लाई मॉल, दुकानों और सुपरमार्केट के माध्यम से की जाएगी।

17 लाख रुपये का ऑर्डर
डंकी फार्म की आर्थिक सफलता के बारे में श्रीनिवास गौड़ा कहते हैं कि गधी के दूध के लिए 17 लाख रुपये के ऑर्डर पहले ही मिल चुके हैं। उन्होंने कहा, सौंदर्य उत्पादों में इसका इस्तेमाल होता है। ऐसे में गधी का दूध बड़े पैमाने पर बेचने की योजना है।












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