एक फूल 1000 रुपये तक ! इसकी खेती से मालामाल हो सकते हैं किसान, जानिए ब्रह्म कमल की विशेषता
ब्रह्मकमल का फूल (brahma kamal) दुर्लभ होने के साथ-साथ विशिष्ट भी है। रात के समय खिलने वाला ब्रह्मकमल किसानों के जीवन में उजाला ला सकता है। मीडिया रपटों के मुताबिक एक ब्रह्म फूल की कीमत 1000 रुपये तक जाती है। पढ़िए रिपोर
नई दिल्ली, 13 जून : ब्रह्म कमल (brahma kamal) के फूल दुर्लभ होने के साथ महंगे भी हैं। कीमत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक ब्रह्म फूल की कीमत 1000 रुपये तक जाती है। नैसर्गिक रूप से ब्रह्म कमल उत्तराखंड की वादियों में खिलता है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट में इस फूल के उत्तराखंड से बाहर खिलने की खबरें भी सामने आई हैं। ब्रह्म कमल छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु जैसे प्रदेशों में भी खिल रहा है। कृषि मामलों के जानकारों की मानें तो इस फूल की खेती की जा सकती है। ब्रह्म कमल को उपजाने के लिए नियंत्रित वातावरण बनाने और मिट्टी के उपचार की जरूरत पड़ती है। मुख्य रूप से ब्रह्म कमल रात में खिलता है। पूरे साल में ब्रह्म कमल केवल जुलाई से सितंबर के दौरान ही खिलते हैं। पढ़िए ब्रह्म कमल से जुड़ी रोचक बातें, जानिए कैसे करें ब्रह्म कमल की खेती।

कब खिलता है ब्रह्म कमल
ब्रह्म कमल की खेती से लाखों की आमदनी की जा सकती है। एक फूल की कीमत 500-1000 रुपये के बीच होती है। खास बात ये कि इसके फूल पानी में नहीं खिलते। रात में खिलने वाला ब्रह्म कमल केवल जुलाई से सितंबर के दौरान ही खिलता है। ब्रह्म कमल सिर्फ रात में ही खिलता है सुबह होते ही इसका फूल की पंखुड़ियां अपने आप बंद हो जाती हैं। यह एकमात्र ऐसा फूल है जिसकी पूजा की जाती है। माना जाता है इस फूल के दर्शन से मनोकामना पूरी होती है।

बीमारियों के इलाज में ब्रह्म कमल का इस्तेमाल
ब्रह्म कमल में कई मेडिसिनल गुण होते हैं। जड़ी-बूटी के रूप में इस्तेमाल किया जाने वाला ब्रह्म कमल कई बीमारियों को ठीक करने में कारगर है। जानकारों की मानें तो पुरानी खांसी की बीमारी ठीक करने में ब्रह्म कमल रामबाण है। वनस्पति विज्ञान में ब्रह्म कमल को एपीथायलम ओक्सीपेटालम या Saussurea obvallata नाम से पहचाना जाता है। लोगों की मान्यता है ब्रह्म कमल की पंखुड़ियों से अमृत की बूंदें टपकती हैं। इससे निकलने वाली बूंदों को जमा कर पीने से थकान मिट जाती है। ब्रह्म कमल से कैंसर जैसी कई खतरनाक बीमारियों का इलाज भी होता है। लीवर संक्रमण और यौन रोगों के इलाज में भी ब्रह्म कमल काफी उपयोगी है।

ब्रह्म कमल की रोपाई
ब्रह्म कमल की खेती का प्लान बनाने वाले लोगों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। ब्रह्म कमल की रोपाई से पहले मिट्टी और गोबर की खाद को अच्छी तरह मिला लेना चाहिए। मिट्टी के उपचार के बाद ब्रह्म कमल की पत्ती को 3-4 इंच की गहराई में रोपा जाता है। अगर गमले में रोपाई की गई है, तो बुआई के बाद पानी भरना है।

ऐसे वातावरण में खिलता है ब्रह्म कमल
ब्रह्म कमल का पौधा ऐसी जगह रखें जहां सूरज की सीधी रोशनी म आती हो। पौधा बड़ा होने के बाद ब्रह्म कमल में केवल इतनी सिंचाई करनी है, जिससे मिट्टी की नमी बनी रहे। ब्रह्म कमल को विकसित होने में कम पानी लेकिन नियंत्रित वातावरण की जरूरत पड़ती है।

तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ में ब्रह्म कमल
मूल रूप से उत्तराखंड की पहाड़ियों में उगने वाला ब्रह्म कमल अब तमिलनाडु में भी खिल रहा है। सितंबर 2021 की ईटीवी भारत डॉटकॉम की खबर के मुताबिक ब्रह्म कमल का फूल तमिलनाडु के इरोड जिले में खिला था। यह फूल सूर्योदय से पहले मुरझा जाता है। हिमालय के वातावरण का फूल तमिलनाडु में खिलने पर लोगों को काफी आश्चर्य हुआ था।
ब्रह्म कमल छत्तीसगढ़ में दो जगहों पर खिला
इसके अलावा जुलाई 2021 में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में ब्रह्म कमल खिलने की खबर सामने आई थी। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में भी ब्रह्म कमल खिलने की खबर सुर्खियों में रह चुकी है। भानुप्रतापपुर में एक साथ 6 ब्रह्म कमल खिलने का दावा किया गया था।

उत्तरकाशी और ब्रह्मकमल का कनेक्शन
उत्तरकाशी जिले में ब्रह्म कमल सोमेश्वर देवता का पुष्प माना जाता है। ब्रह्म कमल तोड़ने के लिए ग्रामीण अपने आराध्य देव सोमेश्वर की आज्ञा लेते हैं। माना जाता है कि इस देवपुष्प को घर में रखने से सुख-समृद्धि बढ़ती है। औषधीय गुणों से भरपूर ब्रह्म कमल उत्तरकाशी में कई रिश्तेदारों को प्रसाद स्वरूप भेंट देने की परंपरा भी है।

सूर्यास्त के बाद खिलता है फूल
ब्रह्म कमल का अर्थ होता है ब्रह्मा का कमल। यह फूल देवी नन्दा का प्रिय पुष्प माना जाता है। उत्तराखंड में नन्दाष्टमी के त्योहार के समय ब्रह्मकमल तोड़ा जाता है। आम तौर पर फूल सूर्यास्त के बाद नहीं खिलते, लेकिन ब्रह्म कमल के खिलने के लिए सूर्य अस्त होने का इंतजार करना पड़ता है। ब्रह्म कमल को हिमाचल में दूधाफूल, कश्मीर में गलगल और उत्तर-पश्चिमी भारत में बरगनडटोगेस नाम से भी जाना जाता है।

वास्तुदोष और बुरी नजरों से बचाव
उत्तराखंड में भोटिया जाति के लोग और ऊंचाई वाले इलाकों की ग्रामीण आबादी ब्रह्म कमल को घरों की चौखट के ऊपर और देवालय में रखते हैं। माना जाता है कि घर की चौखट पर ब्रह्म कमल लगाने से वास्तुदोष दूर होता है। मान्यता है कि ब्रह्म कमल बुरी नजरों से भी बचाता है।
ब्रह्म कमल इन मंदिरों में जाता है
ब्रह्म कमल का वैज्ञानिक नाम साउसिव्यूरिया ओबलावालाटा (Saussurea obvallata) है। ब्रह्म कमल हिमालय में 11 हजार से 17 हजार फुट की ऊंचाइयों पर खिलता है। केदारनाथ और बदरीनाथ के मंदिरों में ब्रह्म कमल फूल अर्पित किया जाता है।
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