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Betel Leaf Farming : पान के पत्तों की खेती से लाखों कमा सकते हैं किसान, जानिए जरूरी बातें

पान के पत्तों की खेती (Betel Leaf Farming) कर किसान लाखों रुपये का मुनाफा कमा सकते हैं। कुछ रिसर्च में पान को 'ग्रीन गोल्ड' कहा गया है, जिसकी अनदेखी की गई है। पढ़िए पान की खेती से जुड़ी जरूरी बातें

नई दिल्ली, 01 जून : भारत की मिट्टी में ऐसी-ऐसी चीजों की खेती की जाती है, जिसकी तुलना बहुमूल्य सोने तक से की जाती है। ऐसी ही एक खेती है- बीटल लीफ फार्मिंग (Betel Leaf Farming) यानी पान के पत्ते की खेती। पान के पत्ते ऐसी मिट्टी पर उगाए जाते हैं, जहां नमी बनी रहती हो। खेती के जानकारों की राय में पान के पत्ते उपजाने वाले किसान साल में लाखों रुपये कमा सकते हैं। पान की खेती में मुनाफा भी शानदार होता है। ग्रीन गोल्ड कहा जाने वाला पान मेडिसिनल प्लांट भी माना जाता है, यानी इसमें कई औषधिय गुण भी होते हैं।वनइंडिया हिंदी की इस रिपोर्ट में पढ़ें पान की खेती से जुड़े जरूरी टिप्स।

भारत में पान की 500 से अधिक वेराइटी

भारत में पान की 500 से अधिक वेराइटी

पान के पत्तों की खेती (Paan Ki Kheti) के लिए बारिश वाले इलाके ज्यादा बेहतर होते हैं। यानी जिस जमीन पर नमी हो वहां पान की खेती आसानी से की जा सकती है। दक्षिण भारतीय राज्यों के अलावा पूर्वोत्तर भारत में भी पान की खेती बहुतायत में की जाती है। इन राज्यों में दूसरी फसलों के अलावा पान की खेती भी उसी शिद्दत से की जाती है। एक अनुमान के मुताबिक भारत में पान की 500 से अधिक वेराइटी मौजूद हैं।

पान में कई औषधीय गुण

पान में कई औषधीय गुण

मगध क्षेत्र यानी बिहार के गया और औरंगाबाद के इलाकों में लोकप्रिय पान की वेराइटी मगही पान की खेती कई किसानों के बीच पॉपुलर है। इसके अलावा बांग्ला पत्ती पान की खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है। दरअसल, पान के पत्तों का पॉपुलर उपयोग पान खाने के अलावा पूजा-पाठ में भी किया जाता है। पान को मेडिसिनल प्लांट भी माना जाता है, यानी इसमें कई औषधीय गुण भी होते हैं।

पान 'ग्रीन गोल्ड' यूं ही नहीं कहा जाता

पान 'ग्रीन गोल्ड' यूं ही नहीं कहा जाता

भारत का 'ग्रीन गोल्ड' कहा जाने वाला पान, कई राज्यों में उपजाया जाता है। पूर्वोत्तर भारत में पान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। पान की खेती का सही तरीका तापमान को कंट्रोल करना है। मतलब अच्छी पैदावार और पत्तों की क्वालिटी बेहतर रखने के लिए पान के पौधों को 10 से 30 डिग्री सेल्सियस के तापमान के बीच रखना होता है। तापमान कंट्रोल में रहे तो एक हेक्टेयर में लगभग 80 लाख पान (100-125 क्विंटल पान पत्ते) उपजाए जा सकते हैं। मार्केट में एक पत्ते की कीमत एक रुपये मिलती है। ऐसे में मार्केट में डिमांड के आधार पर लगभग 40-50 लाख रुपये सालाना कमा सकते हैं।

केरल का स्पेशल तिरुर पान, मिला जीआई टैग

केरल का स्पेशल तिरुर पान, मिला जीआई टैग

केरल में तिरुर के पान पत्तों (Tirur Betel leaf) को अगस्त, 2019 में जीआई टैग (Geographical Indication) दिया गया। तिरुर के पान पत्तों की खेती प्रमुख रूप से केरल के तिरुर, तनूर, तिरुरांगडी, कुट्टिपुरम, मलप्पुरम और मलप्‍पुरम जिले के वेंगारा प्रखंड में होती है। तिरुर बीटल लीफ खाने से अच्‍छे स्‍वाद का एहसास होता है। इसमें औषधीय गुण भी हैं। आम तौर पर तिरुर पान पत्ता मसाला बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। सांस्‍कृतिक उपयोग के अलावा तिरुर पान की इंडस्ट्री में भी काफी डिमांड है।

पान की खेती के लिए तैयारी

पान की खेती के लिए तैयारी

पान की खेती के लिए नमी वाली मिट्टी के अलावा हल्की ठंडी और छायादार जगहों को अच्छा माना जाता है। खेत की अच्छी तरह जुताई के बाद खेत को खुला छोड़ना चाहिए। बरेजा यानी शेड जैसी संरचना बनाने से पहले दूसरी बार जुताई कर मिट्टी भुरभुरी कर लेनी चाहिए। अधिक गर्मी और ठंड दोनों पानी की खेती के लिए नुकसानदेह हैं। ऐसे में तापमान नियंत्रित करने के लिए पॉली हाउस या छावनी बनाने का ऑप्शन मौजूद है।

इन राज्यों में पान की खेती

इन राज्यों में पान की खेती

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में पान के पत्ते की खेती कर किसान लाखों रुपये कमा रहे हैं। इन राज्यों के अलावा मैदानी इलाकों के राज्य- उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार और उत्तराखंड में भी पान के पत्तों की खेती की जा सकती है।

पान की खेती में लागत और मुनाफा

पान की खेती में लागत और मुनाफा

पान के पत्तों की खेती में लंबा समय नहीं लगता। यानी बुआई के बाद लगभग 120 दिन में पान के पत्ते तोड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं। पान की खेती के साथ साथ उसी खेत में बेलवाली अन्य फसलें भी उपजाई जा सकती हैं। यानी कुंदरू, नेनुआ (तोरई) और लौकी जैसी सब्जियां भी इसी खेत में लगाई जा सकती हैं। एक एकड़ में पान की खेती करने पर लगभग 40 से 50 लाख रुपये की कमाई हो सकती है। शुरुआत में पान की खेती में लगभग 70 से 80 हजार की लागत आएगी, लेकिन बाद में मार्केट में पूरे साल डिमांड होने के कारण अच्छी कमाई हो सकती है।

केमिकल से दूर पान की जैविक खेती

केमिकल से दूर पान की जैविक खेती

पान की खेती से पहले एक एकड़ खेत में सड़ी हुई गोबर खाद डालने से उत्पादन बेहतर होता है। अधिक मुनाफा लेने के लिए पान की जैविक खेती करें। रासायनिक खाद का इस्तेमाल न करें। बांस का उपयोग करके पान की बेलों को मिट्टी से ऊपर रखें। लाइन से बांस लगाने पर पत्तों के ब बीच में जाकर देखभार की जा सकती है। बांसों पर पान की बेल अच्छे से फैले इसके लिए तार बांधें। बेल जितनी अधिक फैलेगी उत्पादन और कमाई उसी अनुपात में बढ़ेगी।

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