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इस्लामोफोबिया!: कनाडा में एक हिंदुस्तानी की जॉब गई, दूसरी संस्थाओं ने भी किया किनारा

नई दिल्ली- कनाडा में एक स्थानीय सरकार के फैसले पर उंगली उठाना एक भारतीय को भारी पड़ गया। उस व्यक्ति ने रमजान के मौके पर मुस्लिमों को मिली कुछ रियायतों पर तंज कसा था तो उसकी कंपनी ने तो उसे नौकरी से हटा ही दिया। वह कई और संस्थाओं के बोर्ड में भी थे, उन्हें हर जगह से हटा दिया गया है। जानकारी के मुताबिक उसके खिलाफ औपचारिक जांच भी शुरू की जा रही है। दरअसल, वहां रमजान के महीने में अजान को लेकर कुछ ढील दिए जाने की वजह से उसने स्थानीय प्रशासन पर सवाल उठाया था।

इस्लामोफोबिया! के चक्कर में गई जॉब

इस्लामोफोबिया! के चक्कर में गई जॉब

कनाडा में कुछ दिन पहले रवि हूडा नाम के एक भारतीय ने ब्रैम्पटॉन सिटी के एक फैसले पर सवाल उठाया था। उसने ट्वीट करके मुसलमानों के लिए मस्जिदों से अजान की ऊंची आवाज में छूट दिए जाने पर तंज कसा था। ऐसी छूट वहां पहले चर्चों को ही मिली हुई थी। उस ट्वीट के बाद रवि हूडा पर चौतरफा आरोप लगने शुरू हो गए। हूडा रियल एस्टेट कंपनी रिमैक्स में काम करते थे, किसी ने उनके ट्वीट को कंपनी को टैग कर दिया। इसपर कंपनी ने तुरंत संज्ञान लेते हुए कहा कि हूडा को नौकरी से निकाल दिया गया है। यही नहीं वे और जिन-जिन संस्थाओं से जुड़े हुए उन सबसे उन्हें हटा दिया गया है।

ब्रैम्पटॉन सिटी के मेयर ने किया था फैसला

ब्रैम्पटॉन सिटी के मेयर ने किया था फैसला

दरअसल, कुछ दिनों पहले ब्रैम्पटॉन सिटी के मेयर पैट्रिक ब्रॉन ने एक ट्वीट कर कहा था कि 1984 में पास ऑनटैरियो ध्वनि संबंधी बायलॉ में सिर्फ चर्चों की घंटियों को छूट मिली हुई थी। लेकिन, अब यह छूट सभी धर्मों को निर्धारित घंटों और निश्चित ध्वनि स्तर तक दी जाती है। मुस्लिम समुदाय के लोग अब सूरज ढलने के समय अजान दे सकते हैं, क्योंकि यह 2020 है और हम सभी धर्मों के साथ एक तरह का बर्ताव करते हैं। सीधे-सीधे कहें तो उनके इस आदेश से ब्रैम्पटॉन की मस्जिदों से रमजान के पवित्र महीने में अजान की इजाजत दी गई थी, जिसकी ज्यादा आवाज पर पहले पाबंदी थी।

हूडा ने क्या लिखा था?

हूडा ने क्या लिखा था?

ब्रैम्पटॉन सिटी के मेयर के फैसले पर रवि हूडा ने जवाब में लिखा, 'आगे क्या ? ऊंट और बकरे वालों के लिए अलग से लेन, कुर्बानी के नाम पर घर पर जानवरों को काटने की अनुमति मिलेगी, सभी महिलाओं को सिर से पांव तक ढकने के लिए बायलॉ बनेंगे, सिर्फ कुछ वेबकूफों के वोट के लिए... ' बड़ी बात ये थी कि हूडा ने अपने ट्विटर हैंडल पर खुद को इमीग्रेशन कंसल्टेंट और कम्यूनिटी वॉलेटिंयर भी बताया था। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना ट्विटर हैंडल बदल लिया और उसे प्राइवेट कर लिया।

हूडा पर चौतरफा ऐक्शन

हूडा पर चौतरफा ऐक्शन

हूडा की इस ट्वीट के बाद कुछ यूजर्स ने बताया कि वह बोलटॉन स्थित मैकविले पब्लिक स्कूल के एग्जक्यूटिव काउंसिल मेंबर भी हैं। जब पील जिला स्कूल बोर्ड को इसकी भनक लगी तो उसने बयान जारी कर कहा कि उसने हूडा को काउंसिल से निकाल दिया है और अब से उन्हें अपने किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होने देगा। उधर मैकविले पब्लिक स्कूल अपनी वेबसाइट पर बयान जारी किया कि 'किसी निजी व्यक्ति का विचार मैकविले पब्लिक स्कूल परिवार का या पील का विचार नहीं हो सकता। इस तरह की टिप्पणी परेशान और आहत करने वाली हैं और किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं की जा सकती।'

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