विश्व पर्यावरण दिवस 2015 पर निबंध
"बात अगर वैश्विक संकट की हो तो भले ही किसी एक व्यक्ति का निर्णय बहुत छोटा लगता है, लेकिन जब अरबों लोग एक ही मकसद से आगे बढ़ते हैं, तो बड़ा परिवर्तन आता है।" संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून की यह बात भले ही आपको छोटी लग रही हो, लेकिन बात जब पर्यावरण की आती है, तो ये दो लाइनें दो किताबों का रूप ले सकती हैं।

जी हां 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में दुनिया भर में कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा और उन सबका मकसद एक ही होगा, "पृथ्वी बचाओ।"
पर्यावरण दिवस का इतिहास
एक समय था जब अलग-अलग देश अपनी-अपनी सीमाओं में पर्यावरण की रक्षा की बात करते थे। लेकिन जब संयुक्त राष्ट्र का गठन हुआ तो यह चर्चा वैश्विक हो गई और 1972 में यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली ने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। इसका मुख्य मकसद प्रकृति और पृथ्वी की रक्षा करना और पर्यावरण को बेहतर बनाना।
आज के दिन दुनिया के लगभग सभी देशों में स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय के स्तर पर तमाम कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, ताकि आने वाली पीढ़ी पर्यावरण की रक्षा का महत्व समझ सके। लेकिन दुनिया में और क्या-क्या होता है, इससे अभी भी हजारों लोग अनभिज्ञ हैं। तो चलिये बात करते हैं, पर्यावरण दिवस से जुड़ी ऐसी बातों की, जो शायद आप अबसे पहले नहीं जानते थे।
पर्यावरण पर्यावरण गीत (एंथम)
"अर्थ एंथम" को लिखा है कवि व भारत के राजदूत रहे अभय के ने, जिसे जून 2013 में लॉन्च किया गया था। इस गीत का विमोचन तत्कालीन केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने दिल्ली में किया था। यह आठ भाषाओं में लिखा जा चुका है- अरबी, चीनी, अंग्रेजी, फ्रेंच, रूसी, स्पेनिश, हिंदी और नेपाली।
सबसे ज्यादा वृषारोपण
विश्व पर्यावरण दिवस वह दिन है, जिस दिन दुनिया में सबसे ज्यादा वृषारोपण होते हैं। तमाम देश हैं, जहां एक इस दिन लाखों पेड़ लगाये जाते हैं।

नेपाल के बच्चों के विशेष प्रयास
विश्व पर्यावरण दिवस पर पूरे नेपाल में कक्षा 1 से लेकर कॉलेज स्तर तक के बच्चों को पर्यावरण दिवस के कार्यक्रमों में आना अनिवार्य होता है। नेपाल के गांवों, कस्बों व शहरों में कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जिसमें बढ़चढ़ कर लोग हिस्सा लेते हैं। नेपाल में विश्व पर्यावरण दिवस को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है।
होता है हर साल एक नया थीम
विश्व पर्यावरण दिवस पर हर साल एक नया थीम होता है। बात अगर पिछले 5 वर्षों की करें तो निम्न थीम निर्धारित किये जा चुके हैं।
2016: विश्व को एक बेहतर जगह बनाने की रेस में शमिल हों'''''' |
2015: 7 बिलियन सपने। एक ग्रह। देखभाल के साथ इस्तेमाल करें।
2014: छोटे द्वीप और पर्यावरण में परिवर्तन।
2013: सोचें, खायें और रक्षा करें।
2012: ग्रीन इकॉनमी: क्या आप इसमें शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र की चिंता
संयुक्त राष्ट्र ने अपने एक पत्र में लिखा कि जिस तेजी से विश्व की जनसंख्या बढ़ रही है, उससे यह तो पक्का है कि 2050 में खाने-पीने, रहने आदि की बड़ी मारा-मारी होगी। इसलिये हमारी जिम्मेदारी बनती है कि प्रकृति के संसाधनों का अगर हम दोहन कर रहे हैं, तो उनकी रक्षा और संरक्षण करना भी हमारा कर्तव्य है। 2050 जब जनसंख्या में 9.6 बिलियन का इजाफा होगा, तब हम क्या करेंगे।
दूसरी सबसे बड़ी चिंता है ग्लोबल वॉर्मिंग की। इसकी वजह से हमारे पर्यावरण को बड़ा नुकसान हो रहा है। ग्लेशियर्स के बिघलने की वजह से समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है। अगर हम पर्यावरण की रक्षा नहीं कर पाये तो दुनिया भर के हजारों द्वीप डूब जायेंगे। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से ही अब हर साल गर्मी के मौसम में जरूरत से ज्यादा गर्मी पड़ने लगी है। वहीं बारिश पिछले कई सालों से औसत से कम हो रही है। ग्लोबल वॉर्मिंग के एक नहीं हजारों कारण हैं, जिनमें सबसे बड़ा कारण बेतरतीब शहरीकरण और औद्योगिकीकरण है।
क्यों जरूरी है जागरूकता
कुल मिलाकर पार्यवरण को बचाने की जंग तो जारी है, लेकिन जंग तेज नहीं है। इस युद्ध को तेज करने के लिये पूरी दुनिया को नेपाल से सीख लेनी चाहिये और सभी देशों को विश्व पिर्यावरण दिवस को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाना चाहिये। और ज्यादा से ज्यादा लोगों को पर्यावरण प्रेमी बनाने के लिये जागरूक करना चाहिये।
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