Bigest Hindu Temple: दुनिया का 8वां अजूबा बना अंकोरवाट हिंदू मंदिर...मंदिर देख आपको विश्वास नही होगा
Hindu Temple: कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर इटली के पोम्पई को पिछाड़कर दुनिया का 8वा अजूबा बन गया है। हिंदू धर्म सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। इसकी पुरातन संस्कृति की झलक पूरी दुनिया में दिखती है। यही कारण है कि इस धर्म के प्रतीक, अवशेष, चिन्ह यहां तक प्राचीन मंदिर विदेशों में भी मिलते हैं। मंदिर हिन्दूओं के सांस्कृतिक धरोहर का पहचान है। विश्व विरासत स्थलों में शामिल अंगकोर वाट मंदिर कंबोडिया देश में मीकांग नदी के किनारे सिमरिप नगर में अंकोर नामक स्थान पर स्थित है । इसका पुराना नाम " यशोधर पुर " था।
इस अद्भुत मंदिर परिसर को देखकर भारतीय संस्कृति और स्थापत्य कला के बारे में जानकारी प्राप्त होती है, कि इसका विस्तार और प्रभाव कहां तक था। इतिहास के बड़े-बड़े सम्राट अपने राज्यों में अनेकों मंदिरों का निर्माण करवाते रहे है। ऐसा ही मंदिर कंबोडिया में भी है। सैकडों वर्ष पुराना इस मंदिर का निर्माण राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने बनवाया था। अंकोरवाट मंदिर हिंदू भगवान विष्णुजी को समर्पित है।

अंकोरवाट यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट लिस्ट में शामिल दुनिया का सबसे विशाल हिंदू मंदिर है। मंदिर के दिवारों पर विभिन्न हिंदू ग्रंथों में उल्लेखित विभिन्न प्रसंगों का विस्तार से चित्रण किया गया है। यह मंदिर कुल 401 एकड़ से भी ज्यादा क्षेत्रफल में फैला है ।
इतिहास
वर्तमान में जिसे कंबोडिया कहते है उसका प्राचीन नाम कम्बुज था। कम्बुज राज्य में खमेर साम्राज्य था। खमेर भाषा में अंकोर शब्द का अर्थ राजधानी होता है। अंकोर शब्द संस्कृत के नगर शब्द से बना है। खमेर साम्राज्य लगभग 9वीं शताब्दी से 15वीं शताब्दी तक अपने उत्कर्ष पर था। आज इसी जगह अंकोरवाट का मंदिर स्थित है। जो कम्बोडिया का लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर परिसर तथा विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक कंबोडिया में स्थित है। यह कंबोडिया के अंकोर में है।
इस मंदिर का निर्माण कार्य सम्राट सूर्यवर्मन द्वितीय (1112-53ई.) के शासनकाल में हुआ था। तथा मंदिर का पूरा निर्माण सम्राट जयवर्मन सप्तमी ने करवाया था। कंबोडिया में बड़ी संख्या में हिन्दू और बौद्ध मंदिर हैं। अंकोरवाट के हिंदू मंदिरों पर बाद में बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव पड़ा। विद्वानों के अनुसार, यह चोल वंश के मंदिरों के जैसा भी मिलता जुलता दिखाई देता है।
मंदिर परिसर
मंदिर की कला कृति विभिन्न देशों के सभ्यताओं के धरोहर की अकृतियों जैसा दिखाई देता है। मिश्र व मैक्सिको के स्टेप पिरामिडों की तरह यह सीढ़ी पर उठता गया है। इसका मूल शिखर लगभग 64 मीटर ऊंचा है। इसके अतिरिक्त अन्य सभी आठों शिखर 54 मीटर ऊंचे हैं। मंदिर साढ़े तीन किलोमीटर लंबी पत्थर की दीवार से घिरा हुआ, उसके बाहर 30 मीटर खुली भूमि और फिर बाहर 190 मीटर चौड़ी खाई है। पहले के समय लोकतंत्र नही राजशाही नियम चलने के कारण कई बार अचानक हमले हुआ करते थे।
इसलिए मंदिर को बचा कर रखने के लिए और बाहरी अक्रांता मंदिर तक जल्दी पहुंच न सके इसलिए इस मंदिर की रक्षा के लिए चारों तरफ खाई बनवाई गई, जिसकी चौड़ाई लगभग 700 फुट गहरी है। दूर से देखने से ऐसा लगता है मानो यह खाई झील से घिरा हुआ है। मंदिर के पश्चिम की ओर इस खाई को पार करने के लिए एक पुल बनाया गया है। पुल के पार मंदिर में प्रवेश के लिए एक विशाल द्वार है। यहां भगवान विष्णु जो अपने वाहक गरुड़ पर विराजमान है, वो बहुत ही अदभुत और खूबसूरत दिखाई पड़ता है।
मंदिर के शीलाचित्रों की जानकारी
मंदिर की दीवारें रामायण और महाभारत जैसे हिंदू महाकाव्यों को दर्शाती है। अंकोरवाट मंदिर बहुत विशाल है और यहां के शिलाचित्रों में रामकथा बहुत संक्षिप्त रूप से दिखाई पड़ता है। मंदिर के दीवारों में माता सीता और भगवान श्रीराम के विवाह, हिरण पर तीर धनुष के चित्रण , सुग्रीव भगवान श्रीराम के मिलन, रावण वध, जैसे और अनेक कला चित्रों को देखने मिलेगा। स्वर्ग-नरक, समुद्र मंथन, देव-दानव युद्ध, जैसे बहुत से पुराणों के बारे में जानकारी प्राप्त किया जा सकता है । ये सारे तस्वीरों को देखने के बाद यकीन नहीं होता है आखिर कैसे कोई आम मानव बिना एडवांस टेक्नोलॉजी के इनको दीवारों पर बना जा सकता है।
कैसे पहुंचे कंबोडिया
भारत से कंबोडिया जाने का सबसे तेज़ तरीका हवाई यात्रा है। भारत और कंबोडिया के बीच की हवाई दूरी लगभग 2974 किमी है। सड़क की दूरी लगभग 4728.9 किमी है। हवाई यात्रा के लिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु से फ्लाइट मिल जाती है। इसके लिए आपको वीजा या ई-वीजा की अवसक्ता होगी। कंबोडिया से अंकोरवाट जाने के लिए आप बस या फिर कैब दोनों में से किसी एक का चयन कर सकते हैं।












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