Jaipur: चुनाव में भागीदारी पर ताल ठोककर बोले ट्रांसजेंडर, 'वोट भी करेंगे, अधिकार भी मांगेंगे'

Jaipur News: ट्रांसजेंडर्स को भले ही कानूनी अधिकार मिल गए हों, लेकिन आज भी समाज की मुख्य धारा में उन्हें जोड़कर नहीं देखा जाता। फिर चाहे वह वर्कप्लेस हो या फिर मतदान का अधिकार। ट्रांसजेंडर कम्युनिटी को मताधिकार के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम 'वोट ताल ठोक के' आयोजित किया गया।

जिला निर्वाचन अधिकारी, जयपुर तथा वसुधा जन विकास संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में इसका आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मकसद शहर के ट्रांसजेंडर्स को वोटिंग राइट्स के लिए अवेयर करना था, ताकि वे ज्यादा से ज्यादा वोट करें और अपने कई अधिकारों को हासिल करने की सशक्त तरीके से मांग उठा सकें।

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कार्यक्रम में आईएएस व जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिल्पा सिंह मुख्य अतिथि थीं। साथ ही राजकीय महाविद्यालय, जयपुर की प्रिंसिपल डॉ. स्निग्धा शर्मा विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित रहीं। इस अवसर पर जयपुर की इलेक्शन टीम की ओर से ईवीएम और इसके जरिए सही तरीके से वोट देने का सही तरीका बताया।

यहां उपस्थित सभी व्यक्तियों को मतदान की शपथ दिलाई गई। आईएएस शिल्पा सिंह ने ट्रांसजेंडर्स से अपील की कि अगर उन्हें वोटर आईडी कार्ड में नाम, पते या अन्य किसी भी प्रकार का सुधार कराने की जरूरत है तो वे इसे तुरंत दूर करा सकते हैं। साथ उन्होंने कहा कि ट्रांसजेंडर्स के मुद्दे तभी सशक्त रूप से सामने आ सकेंगे, जब वे मतदान करेंगे।

इस जागरूकता कार्यक्रम का मकसद ट्रांसजेंडर्स को एक मंच पर एकत्र कर उनकी वोटिंग संबंधी समस्याओं को जानना है, ताकि जिला निर्वाचन आयोग जल्द ही इनका समाधान कर सके।

वीएचए एप करेगा प्रॉब्लम दूर

स्वीप की नोडल अधिकारी डॉ. स्निग्धा शर्मा ने बताया कि सिस्टेमेटिक वोटर एजुकेशन एंड इलेक्टोरल पार्टिसिपेशन (स्वीप) अपने वीएचए एप के माध्यम से वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के साथ वोटर कार्ड संबंधी समस्याओं को भी दूर करने में लगा हुआ है।

वसुधा जन विकास संस्थान की निदेशक मोना शर्मा ने बताया कि ट्रांसजेंडर्स को मुख्यधारा में लाने के लिए वर्ष 2014 में ही मतदान का अधिकार मिल चुका है। आज भी ट्रांसजेंडर मतदान प्रतिशत बेहद कम है। इनके गंभीर मुद्दों को भी इसलिए तवज्जो नहीं मिल पाती, कई तरह की सरकारी सुविधाओं से ये आज तक वंचित हैं, क्यों इन्होंने यह मान लिया है कि उनकी समस्याओं पर सरकार ध्यान देगी ही नहीं। ऐसे में इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए वोटिंग के प्रति जागरूकता लाना और मतदान में उनका विश्वास बढ़ाना इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था।

हमें भी तो मिला मौका
देश में बर्थ सर्टिफिकेट प्राप्त करने वाली प्रथम ट्रांसजेंडर नूर शेखावत ने वोटिंग की पुरजोर पैरवी की। उन्होंने बताया कि वे राजस्थान यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने वाली प्रथम ट्रांसजेंडर हैं, लेकिन आज भी हमारे ऐसे कई मुद्दे हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है। समाज हमें मुख्यधारा में आने ही नहीं देता।

उसके लिए हमारे मुद्दे, समस्याएं मायने नहीं रखतीं। इसी वजह से ट्रांसजेंडर भिक्षावृत्ति व मांगलिक कार्यों में मांग कर ही अपना पेट भर पाते हैं। मेरी यह इच्छा है कि जैसे मैंने अधिकार प्राप्त किए हैं, उसी प्रकार सभी ट्रांसजेंडर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें।

मनीषा किन्नर ने कहा कि हम वोट भी देने लगे हैं मगर कुछ समय के लिए हमारे उत्थान भी बातें होती हैं और लेकिन इस दिशा में काम नहीं होता। सरकार ने कभी भी किन्नर समुदाय को बुलाकर उनके मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया। मेरी सरकार से यही मांग है कि जैसे समय-समय पर महिलाओं, बच्चों, विकलांगों व गरीबों के विषयों पर बात की जाती है, वैसे हमारे मुद्दों पर भी बात की जाए।

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