क्या महिलाओं के जरिए यूपी में जन्म ले रही है एक नई कांग्रेस?
नई दिल्ली, 1 फ़रवरी 2022: दशकों से जाति और धर्म के दुश्चक्र में फंसी यूपी की राजनीति में महिलाएं एक बड़ा मुद्दा बन सकती हैं, इसे किसने सोचा था, लेकिन कांग्रेस पार्टी जिस तरह महिलाओं के मुद्दे को अपने प्रचार अभियान के केंद्र में लायी है उसने यूपी के विधानसभा चुनाव में नया रंग भर दिया है। कभी कांग्रेस पार्टी ने महिला आरक्षण बिल संसद से पास कराने की नाकाम कोशिश की थी, लेकिन महिलाओं को 40 फ़ीसदी टिकट देने का उसका ऐलान ज़मीन पर उतरकर महिलाओं के बीच पार्टी को लेकर नया यक़ीन भर रहा है।

बीते कुछ सालों के घटनाक्रमों पर अगर निष्पक्ष नज़र डालें तो पता चलेगा कि कांग्रेस पार्टी प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी के नेतृत्व में यूपी के हर कोने पर संघर्ष कर रही थी। इनमें ज़्यादातर मुद्दे महिलाओं के उत्पीड़न से जुड़े थे। यही वजह है कि जब प्रियंका गांधी ने 'लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ' नारा दिया तो यह किसी करंट की तरह पूरे प्रदेश में फैल गया और इसी नारे के साथ कांग्रेस द्वारा आयोजित मैराथन में हज़ारों की तादाद में महिलाओं ने हिस्सा लिया।
जिस आक्रामकता और विस्तृत रोडमैप के साथ कांग्रेस ने महिलाओं के मुद्दे को पूरे प्रदेश में उठाया, इससे उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हुई है। अतीत में झांकें तो उत्तर प्रदेश की महिलाओं का राजनीतिक सशक्तिकरण वक्त से साथ सिमटता चला गया। महिलाओं के स्वाभिमान और भागीदारी की बातें बेमानी साबित हो रही है। उत्तर प्रदेश की मौजूदा विधान सभा के 403 सदस्यों में महिलाएं केवल 40 है। 22 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के लिहाज़ से यह संख्या नगण्य है। ऐसे में जब कांग्रेस ने 40 फ़ीसदी टिट महिलाओं को देने का वादा किया तो लोगों को यकीन नहीं हुआ, लेकिन पार्टी प्रत्याशियों की सूची बताती है कि इस मुद्दे पर कांग्रेस ने कोई समझौता नही किया और वादे के मुताबिक 40 फ़ीसदी टिकट महिलाओं को दिया है।
यहां यह भी ध्यान देने की बात है कि कांग्रेस ने तमाम ऐसी महिलाओं को टिकट दिया है जो न सिर्फ उत्पीड़न का शिकार रही हैं बल्कि उन्होंने निर्भय होकर अत्याचार के ख़िलाफ़ संघर्ष भी किया है। उन्नाव में रेप पीड़ित की मां को टिकट देने की बात राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुई है। राजनीतिक पंडित ऐसी महिलाओं की चुनावी जीत पर संशय जता रहे हैं लेकिन प्रियंका गांधी ने साफ कहा है कि संघर्ष के इन प्रतीकों के साथ खड़े होना पार्टी की नैतिक ज़िम्मेदारी है।
इस लिहाज से देखा जाये तो 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने एक नयी नैतिक आभा अर्जित की है। जहां सत्ता बरक़रार रखने को बेक़रार बीजेपी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कराने में जुटी है, वहीं समाजवादी पार्टी के पास जवाब में जाति आधारित गठजोड़ के सिवा कुछ नहीं है। ऐसे में कांग्रेस महिलाओं के हक़ को एक बड़ा मुद्दा बनाकर बड़ी लक़ीर खींच रही है जिसके सामने कोई भी चुनावी नतीजा बौना साबित होगा। पार्टी नेताओं का कहना है कि यूपी में महिलाओं को 40 फ़ीसदी टिकट देने की कहानी अब देशव्यापी मुद्दा बनेगा और सभी राजनीतिक पार्टियों को इस मोर्चे पर जवाब देना पड़ेगा।
इस मुद्दे पर गंभीरता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रियंका गांधी की ओर से एक करोड़ पोस्टकार्ड यूपी की महिलाओं को भेजे जा रहे हैं जिसमें पार्टी के तमाम वादों का ज़िक्र करते हुए समर्थन की अपील की गयी है। इनमें 12वीं की लड़कियों को समार्टफोन और स्नातक कर रही लड़कियों को स्कूटी देने से लेकर 20 लाख सरकारी नौकरियों में 8 लाख महिलाओं को देने जैसे वादे शामिल हैं। महिलाओं में इसे लेकर काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया है और पार्टी को यकीन है कि वह महिलाओं के बीच एक नयी पैठ बनाने में कामयाब होगी।
कांग्रेस ने महिलाओं के लिए अलग से घोषणापत्र जारी करके भी एक नयी पहल की है। इसे शक्ति विधान नाम दिया गया है जिसमें महिलाओं के लिए किए जा रहे पार्टी के वादों को विस्तार से रखा गया है। ये सारी कोशिशें महिला सशक्तिकरण और महिलाओं को राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में ऐतिहासिक मानी जा रही हैं। कांग्रेस की कोशिश है कि यूपी में महिलाओं के रूप में उसके पास एक नया सामाजिक आधार हो। प्रियंका गांधी के नेतृत्व में उसे ऐसा कर पाने का भरोसा भी जगा है।












Click it and Unblock the Notifications