हरियाणा: डिप्टी CM बोले- उचाना की चमचमाती सड़कें एवं गांव हलके में सार्वजनिक विकास की कहानी बता रहे हैं
हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि क्षेत्र का विकास उनकी पहली प्राथमिकता है। इसके लिए वे निरंतर प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि कोरोना काल या किसान आंदोलन जैसी गतिविधियों के बावजूद भी उन्होंने उचाना हलके को विकास की अग्रिम पंक्ति में रखने की कोशिश की है।

उचाना शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में चमचमाती सड़कें और गांव दर गांव चल रहे सार्वजनिक विकास कार्य प्रगति की कहानी बता रहे हैं। क्षेत्र के विकास के लिए कोई कमी नहीं आने दी। यह बात उपमुख्यमंत्री ने रविवार को देर शाम उचाना के गांव डूमरखां के राजकीय उच्च विद्यालय में उचाना प्रगति जनसभा को संबोधित करते हुए कही।
बता दें कि उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला अपने विधानसभा क्षेत्र उचाना के गांव डुमरखां में पहुंचे। जहां उन्हे बैलगाड़ी में बैठाकर बीन-बाजा, ढ़ोल नगाड़ों और सैंकड़ों युवाओं द्वारा नारे लगाते हुए जलूस की शक्ल में जनसभा स्थल तक लाया गया। उपमुख्यमंत्री को गांव की सर्वजातिय कमेटी द्वारा पगड़ी भेंट की गई और उचाना क्षेत्र के ब्रह्मण समाज द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।
उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने अपने संबोधन में कहा कि उचाना की वर्षों पुरानी मांग पीने के पानी की समस्या का भी स्थाई समाधान किया गया है। इसके लिए लगभग 70 करोड़ रुपए की लागत से 17 गांव को पीने का स्वच्छ पानी भाखड़ा सिरसा ब्रांच से दिया जाएगा। वर्ष 2019 से 2023 तक जितना विकास उचाना हलके में हुआ है, उतना विकास किसी की भी सरकार में नहीं हुआ। खेड़ी मसानिया में देश का दूसरा फायर ट्रेनिंग सेंटर बनाने का काम किया जाएगा, इससे हजारों युवाओं को रोजगार प्राप्त होंगे।
साथ में उन्होंने कहा कि उचाना विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक गांवों में विकास कार्यों के लिए मौजूदा सरकार द्वारा निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान सरकार के साढ़े तीन साल में उचाना विधानसभा क्षेत्र में 800 करोड़ रुपए सैकड़ों विकास परियोजनाओं पर खर्च किए गए है। उचाना को नए बाईपास की सुविधा के साथ-साथ नेशनल हाईवे से भी जोड़ा जाएगा। जिससे क्षेत्रवासियों को सुगम यातायात मुहैया होगा।
इसके साथ डिप्टी सीएम ने कहा कि मौजूदा सरकार द्वारा प्रदेश की आधी आबादी महिलाओं के लिए भी क्रांतिकारी फैसले लिए गए। जिसके तहत प्रदेश की सभी पंचायत संस्थाओं में महिलाओं को पचास प्रतिशत तथा सभी ग्रामीण राशन डिपो में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।









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