पशुओं के प्रति क्रूरता को लेकर तेलंगाना सरकार सख्त, सभी सूअर फार्मों की जांच के आदेश
पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम के लिए तेलंगाना की सभी जिला समितियों को पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 (1) (ई) का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

तेलंगाना पशुपालन विभाग के निदेशक ने सभी जिला पशु चिकित्सा और पशुपालन अधिकारियों/जिला सोसायटी के सदस्य सचिवों को पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम करने के निर्देश दिए हैं। अपने निर्देशों में उन्होंने कहा कि क्षेत्र स्तर के अधिकारियों को हिदायत दी जाए कि वो तेलंगाना में सुअर पालन फार्मों में गर्भधारण और बच्चे पैदा करने वाले क्रेटों के उपयोग पर नजर रखें।
निदेशक की तरफ से जारी पत्र में सभी जिलों में पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम के लिए जिला समितियों को पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 (1) (ई) का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। इस अधिनियम के तहत अगर कोई व्यक्ति किसी जानवर को किसी भी पिंजरे या इसी तरह के किसी बाड़े में रखता है, तो जानवर को उसमें चहलकदमी के लिए ऊंचाई, लंबाई और चौड़ाई में पर्याप्त जगह होनी चाहिए और अगर ऐसा नहीं होता है तो ये दंडनीय अपराध है।
पशुपालन विभाग ने मर्सी फॉर एनिमल्स इंडिया फाउंडेशन के अनुरोध पर ये पत्र जारी किया है। फाउंडेशन की अधिकारी निहारिका कपूर ने कहा, 'गर्भावस्था और दूध पिलाने वाले सूअरों को गर्भधारण और फैरोइंग क्रेट में कैद करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती है। नतीजतन, सूअरों की हड्डी खराब हो जाती है और उनमें बहुत ज्यादा तनाव के लक्षण दिखने लगते हैं।'
पत्र में कहा गया कि मर्सी फॉर एनिमल्स इंडिया फाउंडेशन और अन्य समूहों की अपील के बाद, दिल्ली, बिहार, गोवा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, मणिपुर, मिजोरम, गुजरात, राजस्थान, सिक्किम, पश्चिम बंगाल और पंजाब सहित 16 से अधिक राज्यों में पहले ही गर्भावस्था और फैरोइंग क्रेट के उपयोग पर रोक लगा दी गई है।












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