फरीदकोट पहुंचे संत बलबीर सिंह सीचेवाल, विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवा से की मुलाकात
विधानसभा अध्यक्ष संधवा से मुलाकात कर बोले- पर्यावरण की शुद्धता में सभी का सहयोग जरूरी

शुद्ध पर्यावरण सभी की जरूरत है, परंतु यह तभी संभव है, जब सभी लोग पर्यावरण शुद्धता के लिए अपने सामर्थ्य के अनुरूप अपना सहयोग करें। यह बातें पर्यावरणविद् एवं राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने संधवा गांव में विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवा व अन्य पर्यावरणविदों के साथ बैठक के दौरान कही।
संधवा गांव में विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवा के घर पर सुबह के समय पर्यावरणविद् एवं राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल व उनकी टीम के पहुंचने पर विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सीचेवाल का सिरोपा पहनाकर स्वागत किया गया। इस दौरान बैठक के लिए कई पर्यावरणविद् भी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान विधानसभा अध्यक्ष संधवा ने कहा कि पर्यावरण का संतुलन बिगड़ने का खामियाजा भी हम सभी को ही भुगतना पड़ता है, जरूरत है कि वर्तमान समय में सरकार व आम लोगों द्वारा सभी स्तर पर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए प्रयास किए जाएं, ताकि मानवता को बिगड़ते पर्यावरण के कारण कोई नुकसान न होने पाए।
बैठक में उपस्थित निरोआ पंजाब मंच के कन्वीनर व भाई कन्हैया कैंसर रोको सेवा सोसाइटी के प्रधान गुरप्रीत सिंह चंदबाजा द्वारा सतलुज के प्रदूषण का मुद्दा उठाया गया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जो प्रयास किए जा रहे है, उसका जमीनी स्तर पर असर होता हुआ नहीं दिखाई दे रहा है, जरूरत है कि इस अहम मद्दे के प्रति सरकार और सजग हो।
लोकसभा क्षेत्र जालंधर उपचुनाव में पर्यावरण को मुख्य मुद्दा बनाने के लिए सभी पार्टियों के उम्मीदवारों को सौंपे और दिए जा रहे मांग पत्रों की कड़ी में पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवाको उनके निजी आवास पर मांग पत्र सौंपा। सीचेवाल ने सौंपते हुए कहा कि पंजाब के निवासियों की तत्काल मांग है कि पर्यावरण को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया जाए, क्योंकि पर्यावरण प्रदूषण इस समय सबसे महत्वपूर्ण और गंभीर मुद्दा है।
जालंधर लोकसभा क्षेत्र की पर्यावरण संबंधी 7 प्रमुख मांगों को विस्तार से बताते हुए बाबा बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि कलासंग्या और जमशेर ड्रेनेज सहित चिट्टी वेन का गंदा और जहरीला पानी सतलुज नदी में फेंका जा रहा है, जिससे मालवा के लोगों को कैंसर हो रहा है और राजस्थान, काला पीलिया सहित कई भयानक बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। उक्त जहरीला पानी भूजल को भी प्रदूषित कर रहा है।
उन्हें जल अधिनियम 1974 के कड़ाई से क्रियान्वयन, प्राकृतिक जल संसाधनों के सुधार के लिए आवश्यकतानुसार शोधन संयंत्रों की स्थापना, उक्त उपचार संयंत्रों के उपचारित जल को कृषि हेतु उपयोग करने की व्यवस्था की समस्याओं पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। बाबा सीचेवाल ने दावा किया कि गांव सीचेवाल, सुल्तानपुर लोधी, दसूहा और फगवाड़ा आदि क्षेत्रों और कस्बों के उपचारित पानी का उपयोग कृषि के लिए किया जा रहा है।
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